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शौक में सीखा था ट्रैक्टर चलाना, अब सपना है रोडवेज बस ड्राइवर बनने का
hisar
Updated Fri, 04 Apr 2014 12:20 AM IST
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समाज में महिलाओं के लिए ऐसा कोई क्षेत्र नहीं है जिसमें उन्होंने अपनी मौजूदगी दर्ज नहीं करवाई हो। चंडीगढ़ रोड स्थित गांव धांसू की ग्रेजुएट सुनीता रोडवेज ट्रेनिंग स्कूल में बस चलाने का प्रशिक्षण ले रही है। परिवार में दो भाईयों की मंझली बहन सुनीता का सपना रोडवेज ड्राइवर बनने का है।
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जिसकी शुरुआत उन्होेंने गांव में ट्रैक्टर चलाकर की थी। सुनीता हर रोज खेत में काम करने वाले मजदूरों के लिए घर से चाय-रोटी लेकर जाती थी। इस दौरान उसके पिता महाबीर ने सुनीता को ट्रैक्टर चलाना सिखाया। घर से खेत तक सुनीता ने ट्रैक्टर चलाना सीख लिया।
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सुनीता जब ट्रैक्टर लेकर जाती थी, तो पिता महाबीर का सीना चौड़ा हो जाता था और वह कहते, वो देखो मेरा तीसरा बेटा आ गया। सुनीता ने गांव बुगाना की अपनी एक सहेली के साथ लाईट मोटर व्हीकल लाईसेंस बनवा लिया।
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सुनीता के परिवार में उसकी मां गुड्डी के अलावा दो भाई है। सुनीता के दोनों भाई राजेंद्र और जगदीश खेती का काम करते है। वर्ष 2010 में सुनीता के पिता की हार्ट फेल हो जाने से मृत्यु हो गई। पिता की मौत के बाद सुनीता ने उनके सपने को साकार करने की ठान ली।
वह कहती है कि उसके भाईयों ने उसे आगे बढ़ने के सहयोग किया। इसके बाद उसने रोडवेज महकमें में हैवी व्हीकल चलाना सीखने के लिए फाइल लगा दी। परिवार के अलावा गांव की महिलाएं भी सुनीता की तरह अपनी बेटियों को बस चलाना सीखने के लिए प्रेरित करती है।
सुनीता ने बताया कि गांव में उसकी कई सहेलियां भी बस चलाना सीखना चाहती है। लेकिन उनके पास लाईट मोटर व्हीकल लाईसेंस नहीं है। वह कहती है कि गांव में उसकी दूसरी सहेलियां भी उससे बस चलाने के बारे पूछती है। वह कहती है उनके ट्रेंनर भी उसे बस चलाने के दौरान सभी बारिकियां सीखा रहे है।
मां गुड्डी देवी ने बताया कि सुनीता अपने पिता की लाडली बेटी थी। वह कहती है उसके पिता चाहते थे कि सुनीता की जिस क्षेत्र में रुचि है, वह उसी में सफलता हासिल करे। वह कहती है कि सुनीता रोडवेज में ड्राईविंग ट्रेनिंग पूरी करके विभाग में ही नौकरी के लिए आवेदन करें और नौकरी हासिल करे।