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दुनिया शीर्ष 30 प्रदूषित शहरों में हिसार, फेफड़े हो रहे कमजोर

Thu, 18 Mar 2021 01:22 AM IST
Rohtak Bureau रोहतक ब्यूरो
Updated Thu, 18 Mar 2021 01:22 AM IST
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Hisr in World's top 30 polluted city
शहर में स्थापित फैक्टरी से निकलता धुआं। - फोटो : Hisar
हिसार। दुनिया के सबसे प्रदूषित 30 शहरों में शामिल हिसार की हवा इतनी खराब है कि वह धीरे-धीरे फेफड़ों को कमजोर कर रही है।
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प्रदूषण के कारण होने वाली बीमारियों के लक्षण बेशक आज नजर नहीं आ रहे हों, लेकिन लगातार प्रदूषण में रहने के कारण कुछ समय बाद फेफड़ों से संबंधित बीमारी होने की आशंका है।
ऐसे में लोगों को पर्यावरण और स्वास्थ्य के प्रति सावधान होने की जरूरत है। शहर में विभिन्न कारणों से बढ़ रहा प्रदूषण बुजुर्गों और बच्चों के साथ ही युवाओं को भी अपनी चपेट में लेने लगा है। आइये नजर डालते हैं जिले में बढ़ रहे प्रदूषण के कारणों पर। बुधवार को भी शहर का एक्यूआई 318 दर्ज किया गया, जो स्वास्थ्य के लिए बेहद घातक है।
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ऑटो और अन्य वाहन
शहर में जिस तरह से ऑटो और अन्य वाहनों की संख्या बढ़ रही है, उसके साथ ही जाम की स्थिति बढ़ रही है। सड़कें और स्थान उतना ही है जितना पहले था, लेकिन जाम के दौरान धुआं उगलते वाहन हवा को जहरीला बना रहे हैं। इन वाहनों के प्रदूषण प्रमाणपत्र बनाने वालों के अनुभवी न होने को लेकर भी विशेषज्ञ सवाल उठाते रहे हैं। स्थिति यह है धुआं उगलते वाहन का भी प्रदूषण प्रमाणपत्र बन जाता है। ये वाहन कार्बन डाईऑक्साइड, सल्फर डाई ऑक्साइड, नाइट्रोजन ऑक्साइड जैसी घातक गैस व लैरोसेल जैसे स्वास्थ्य के लिए हानिकारक कणों की मात्रा हवा में घोल रहे हैं।
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ढंढूर में जल रहा सॉलिड वेस्ट
पूरे शहर का कचरा ढंढूर के जिस डंपिंग स्टेशन पर डाला जाता है, वहां अक्सर आग लगती है। हवा के साथ ही यहां का धुआं आसपास के क्षेत्रों में दूर-दूर तक फैल जाता है। प्लास्टिक, रबर, कागज, पॉलिथीन व अन्य कचरे का यह धुआं खतरनाक गैसें पैदा करता है, जो वायु मंडल में घुलने के बाद सांस की बीमारियों को बढ़ाता है।
फैक्टरियों और भट्ठों का धुआं
जिले में 300 से अधिक छोटी-बड़ी फैक्टरियां और 200 के करीब ईंट भट्ठे हैं। प्रदूषण फैलाने में इनकी भी भूमिका अहम है। पर्यावरण एवं प्रदूषण से संबंधित निर्धारित मानकों को पूरा नहीं को लेकर कई बार पर्यावरण विभाग ने नोटिस भेजे हैं, लेकिन इसके बाद भी फैक्टरियां और भट्ठे नियमों को ताक पर रखकर जहरीला धुआं उगल रहे हैं।
थर्मल पावर प्लांट, फसलों का भी बदल रहा रंग
जिले के बरवाला क्षेत्र में बना खेदड़ थर्मल पावर प्लांट भी वायु प्रदूषण बढ़ा रहा है। जब प्लांट की दोनों यूनिट चलती हैं तो स्थिति यह हो जाती है कि प्लांट के आसपास खेतों में लगी फसलों का रंग बदल जाता है। हवा के साथ इस प्लांट का जहरीला धुआं आसपास के पूरे क्षेत्र को अपनी चपेट में ले लेता है।
फसल अवशेषों का जलना
फसल अवशेषों के जलने के कारण पैदा होने वाले धुएं के कारण अक्तूबर-नवंबर में लोगों का सांस लेना मुश्किल हो जाता है। इस मौसम में हवा में नमी रहने के कारण यह धुआं ऊपर नहीं उठ पाता और जान आफत में डाल देता है। इस कारण अक्तूबर-नवंबर के समय जिले का वायु गुणवत्ता सूचकांक 500 (यंत्र भी इससे अधिक के प्रदूषण को नहीं मापता) के पार पहुंच जाता है, जो स्वास्थ्य के लिए बेहद खतरनाक होता है।
सांस लेने की क्षमता पर नकारात्मक प्रभाव
प्रदूषण फेफड़ों को भारी नुकसान पहुंचा रहा है। हम लगातार प्रदूषण में रहते हैं तो हो सकता है आज कोई दिक्कत नहीं हो, लेकिन भविष्य में फेफड़ों से संबंधित रोगों के लक्षण सामने आने लग जाएंगे। यानी प्रदूषण धीरे-धीरे फेफड़ों को कमजोर कर रहा है। बुजुर्गों और बच्चों के साथ युवाओं में भी सांस की दिक्कतें आने लगी हैं। प्रदूषण के कारण सबसे अधिक ब्रोकाइंटिस एलर्जी की समस्या रहती है, जिसे सीजनल अस्थमा भी कहा जा सकता है। इससे धीरे-धीरे सांस लेने की क्षमता पर नकारात्मक प्रभाव पड़ता है। ड्राई कफ की समस्या और रुटीन में सूखी खांसी का कारण प्रदूषण ही है।
- डॉ. अजय चुघ, फिजिशियन, नागरिक अस्पताल, हिसार।
प्रदूषण मामलों में कम होती है कार्रवाई
प्रदूषण के कई कारक हैं, जिनमें वाहनों से निकलने वाला धुआं, डंपिंग स्टेशन पर आग, फसल अवशेषों का जलना, थर्मल पावर प्लांट का धुआं आदि शामिल हैं। प्रदूषण से निजात पाने के लिए निगरानी बढ़ाने के साथ ही अधिक से अधिक पेड़ लगाने की जरूरत है। प्रदूषण के मामले में कार्रवाई कम होती है, इसलिए इसे गंभीरता से नहीं लिया जा रहा। सरकार एथनॉल प्लांट लगाने सहित अपने स्तर पर योजनाएं बना रही है, लेकिन आम लोगों को भी जागरूक होना होगा।

- प्रो. नरसी राम बिश्नोई, पर्यावरण विभाग गुजवि एवं सदस्य, प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड।

ढंढूर डंपिंग स्टेशन में लगी आग के कारण फैला धुआं। (फाइल फोटो)

ढंढूर डंपिंग स्टेशन में लगी आग के कारण फैला धुआं। (फाइल फोटो)- फोटो : Hisar

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