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सुप्त टीबी की पहचान कर उपचार शुरू करेगा स्वास्थ्य विभाग
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जीत स्कीम का शुभारंभ करते हुए सीएमओ डॉ. रत्ना भारती। साथ में मौजूद डिप्टी सीमएओ डॉ. कुलदीप डाबला व
- फोटो : Hisar
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हिसार। स्वास्थ्य विभाग टीबी होने से पहले ही सुप्त टीबी (छुपा हुआ) की पहचान कर इलाज शुरू करेगा। इसके लिए विभाग ने शुक्रवार को जीत योजना (ज्वाइंट इफर्ट फॉर इलीमिनेशन ऑफ टीबी) की शुरुआत की है। योजना का शुभारंभ सीएमओ डॉ. रत्ना भारती ने किया। डिप्टी सीएमओ डॉ. कुलदीप डाबला ने स्कीम के बारे में विस्तार से जानकारी दी।
जीत योजना की शुरुआत सबसे पहले प्रदेश के हिसार से की गई है। वर्तमान में जिले में टीबी के 3600 मरीज हैं। योजना के तहत स्वास्थ्य विभाग उन लोगों का टेस्ट करेगा, जिसमें कोई लक्षण नहीं हैं। ऐसे लोगों में छिपा हुआ टीबी हो सकता है। इसका पता लगाने के लिए विभाग इगरा नाम का टेस्ट करेगा। सबसे पहले विभाग का टीबी मरीजों के परिवारवालों पर फोकस रहेगा। उन सभी का इगरा टेस्ट किया जाएगा। अगर कोई पॉजिटिव मिलता है तो उसी समय इलाज शुरू कर दिया जाएगा। जीत स्कीम में 12 सदस्यों को टीम में शामिल किया गया है। हर ब्लॉक पर टीम रहेगी। जितेंद्र गौतम को जिला प्रभारी बनाया गया है। स्टेट हेड कौस्तुब होंगे। इस मौके पर स्वास्थ्य विभाग के ओर से फिजिशियन डॉ. अजय चुघ, बाल रोग चिकित्सक डॉ. मंजू हुड्डा, डॉ. जेपीएस नलवा, डॉ. अजय महाजन, टीबी अस्पताल से मनदीप सिंह मौजूद रहे।
2500 रुपये का टेस्ट निशुल्क करेगा स्वास्थ्य विभाग
चिकित्सकों के अनुसार पहले संदिग्ध लक्षण के आधार पर मरीजों के टीबी जांच के लिए सीबी नॉट टेस्ट किए जाते हैं। अब मरीज में लक्षण न हो तब भी बीमारी की पहचान की जा सकेगी। इसके लिए इगरा टेस्ट शुरू किया गया है। यह टेस्ट निजी अस्पताल में 2500 रुपये में होता है, जबकि स्वास्थ्य विभाग निशुल्क करेगा। टीबी में 3 हफ्ते से ज्यादा तक कफ बना रह सकता।
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बच्चों का बिना पॉजिटिव भी इलाज अनिवार्य
हर टीबी मरीज के परिवारवालों के इगरा टेस्ट किए जाएंगे। चाहे लक्षण हो या ना। इन्हीं के संपर्क से टीबी के फैलने की आशंका रहती है। अगर परिवार में 5 से 18 साल के बच्चे हैं तो उन सभी का बिना पॉजिटिव होने पर भी इलाज अनिवार्य होगा। टीबी की रोकथाम के लिए सुप्त टीबी को रोकना जरूरी है। सरकार ने देश को टीबी मुक्त बनाने के लिए 2024 का लक्ष्य रखा है।
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जीत योजना की शुरुआत सबसे पहले प्रदेश के हिसार से की गई है। वर्तमान में जिले में टीबी के 3600 मरीज हैं। योजना के तहत स्वास्थ्य विभाग उन लोगों का टेस्ट करेगा, जिसमें कोई लक्षण नहीं हैं। ऐसे लोगों में छिपा हुआ टीबी हो सकता है। इसका पता लगाने के लिए विभाग इगरा नाम का टेस्ट करेगा। सबसे पहले विभाग का टीबी मरीजों के परिवारवालों पर फोकस रहेगा। उन सभी का इगरा टेस्ट किया जाएगा। अगर कोई पॉजिटिव मिलता है तो उसी समय इलाज शुरू कर दिया जाएगा। जीत स्कीम में 12 सदस्यों को टीम में शामिल किया गया है। हर ब्लॉक पर टीम रहेगी। जितेंद्र गौतम को जिला प्रभारी बनाया गया है। स्टेट हेड कौस्तुब होंगे। इस मौके पर स्वास्थ्य विभाग के ओर से फिजिशियन डॉ. अजय चुघ, बाल रोग चिकित्सक डॉ. मंजू हुड्डा, डॉ. जेपीएस नलवा, डॉ. अजय महाजन, टीबी अस्पताल से मनदीप सिंह मौजूद रहे।
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2500 रुपये का टेस्ट निशुल्क करेगा स्वास्थ्य विभाग
चिकित्सकों के अनुसार पहले संदिग्ध लक्षण के आधार पर मरीजों के टीबी जांच के लिए सीबी नॉट टेस्ट किए जाते हैं। अब मरीज में लक्षण न हो तब भी बीमारी की पहचान की जा सकेगी। इसके लिए इगरा टेस्ट शुरू किया गया है। यह टेस्ट निजी अस्पताल में 2500 रुपये में होता है, जबकि स्वास्थ्य विभाग निशुल्क करेगा। टीबी में 3 हफ्ते से ज्यादा तक कफ बना रह सकता।
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बच्चों का बिना पॉजिटिव भी इलाज अनिवार्य
हर टीबी मरीज के परिवारवालों के इगरा टेस्ट किए जाएंगे। चाहे लक्षण हो या ना। इन्हीं के संपर्क से टीबी के फैलने की आशंका रहती है। अगर परिवार में 5 से 18 साल के बच्चे हैं तो उन सभी का बिना पॉजिटिव होने पर भी इलाज अनिवार्य होगा। टीबी की रोकथाम के लिए सुप्त टीबी को रोकना जरूरी है। सरकार ने देश को टीबी मुक्त बनाने के लिए 2024 का लक्ष्य रखा है।