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स्वास्थ्य विभाग को मिलीं 11 नई एंबुलेंस
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नागरिक अस्पताल के बाहर खड़ी एंबुलेंस
- फोटो : Hisar
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हिसार। जिला स्वास्थ्य विभाग को 11 नई एंबुलेंस मिली हैं। इन एंबुलेंस से पीएचसी स्तर पर सुविधाएं बढ़ेगी। यह पीटीए एंबुलेंस है यानी पेशेंट ट्रांसफर एंबुलेंस। इन पीटीए में ऑक्सीजन की सुविधा होती है न कि वेंटिलेटर। इसलिए इनको ज्यादातर पीएचसी स्तर पर ही रखा जाएगा। पीएचसी पर ज्यादातर गर्भवती महिलाओं को लाने ले जाने का काम होता है।
अब 7 एएलएस एवं 13 बीएलएस एंबुलेंस को विभाग द्वारा जिला स्तर पर ही इस्तेमाल किया जाएगा। इन एंबुलेंस में वेंटिलेटर से लेकर अन्य उपकरण की सभी सुविधाएं उपलब्ध हैं। इन नई एंबुलेंस के आने से विभाग को कोरोना की तीसरी निपटने में आसानी होगी। कोरोना के समय सामान्य और कोरोना मरीजों को लाने ले जाने के अलावा कोविड-19 शवों को भी लाने का वर्क लोड अधिक था। अधिकतर एंबुलेंस कोरोना में निर्धारित रखी गई थी। इनमें गर्भवती एवं सामान्य मरीजों को नहीं लाया जाता था। इसके बिना मरीजों को निजी एंबुलेंस का सहारा लेना पड़ा, जिसके लिए महंगे रुपये चुकाने पड़े थे।
6 बीएलएस को बदला था एएलएस में
अब स्वास्थ्य विभाग के पास जिलेभर में कुल 34 एंबुलेंस हो गई है। इससे पहले 23 एंबुलेंस मौजूद थी। इनमें से एक एएलएस, 19 बीएलएस, तीन पीटीए। कोरोना के चलते 6 बीएलएस (बेसिक लाइफ सपोर्ट) को एएलएस (एडवांस लाइफ सपोर्ट) में अपग्रेड किया। यह एंबुलेंस सभी सुविधाओं से युक्त होती है, जिसमें गंभीर मरीज को ले जाने में दिक्कत नहीं आती।
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जिले में करीब 150 निजी एंबुलेंस
जिले में करीब 150 निजी एंबुलेंस हैं। कोरोना काल में निजी एंबुलेंस चालकों ने मरीजों से तय रेट से अधिक रुपये वसूले थे, क्योंकि पीपीई किट, मास्क से लेकर गाड़ी तक को वॉशिंग करवाना पड़ता है। आमतौर पर निजी एंबुलेंस चालक 14 रुपये प्रति किलोमीटर के वसूलते हैं और शहर में 500 रुपये लेते हैं। वहीं स्वास्थ्य विभाग गर्भवती महिलाओं से लाने ले जाने के कोई रुपये नहीं लेता है और सामान्य मरीजों को छोड़ने व लाने के लिए बीएलएस के 7 रुपये एवं एएलएस के 15 रुपये लेता है।
हमें 11 एंबुलेंस मिली हैं और सभी पीटीए हैं। इनका पीएचसी स्तर पर इस्तेमाल किया जा सकेगा। इससे गर्भवती को लाने, छोड़कर आने और सामान्य मरीजों को छोड़ने में आसानी होगी। एएलएस और बीएलएस का जरूरत के अनुसार इस्तेमाल किया जा सकेगा। - डॉ. जितेंद्र शर्मा, डिप्टी सीएमओ, हिसार
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अब 7 एएलएस एवं 13 बीएलएस एंबुलेंस को विभाग द्वारा जिला स्तर पर ही इस्तेमाल किया जाएगा। इन एंबुलेंस में वेंटिलेटर से लेकर अन्य उपकरण की सभी सुविधाएं उपलब्ध हैं। इन नई एंबुलेंस के आने से विभाग को कोरोना की तीसरी निपटने में आसानी होगी। कोरोना के समय सामान्य और कोरोना मरीजों को लाने ले जाने के अलावा कोविड-19 शवों को भी लाने का वर्क लोड अधिक था। अधिकतर एंबुलेंस कोरोना में निर्धारित रखी गई थी। इनमें गर्भवती एवं सामान्य मरीजों को नहीं लाया जाता था। इसके बिना मरीजों को निजी एंबुलेंस का सहारा लेना पड़ा, जिसके लिए महंगे रुपये चुकाने पड़े थे।
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6 बीएलएस को बदला था एएलएस में
अब स्वास्थ्य विभाग के पास जिलेभर में कुल 34 एंबुलेंस हो गई है। इससे पहले 23 एंबुलेंस मौजूद थी। इनमें से एक एएलएस, 19 बीएलएस, तीन पीटीए। कोरोना के चलते 6 बीएलएस (बेसिक लाइफ सपोर्ट) को एएलएस (एडवांस लाइफ सपोर्ट) में अपग्रेड किया। यह एंबुलेंस सभी सुविधाओं से युक्त होती है, जिसमें गंभीर मरीज को ले जाने में दिक्कत नहीं आती।
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जिले में करीब 150 निजी एंबुलेंस
जिले में करीब 150 निजी एंबुलेंस हैं। कोरोना काल में निजी एंबुलेंस चालकों ने मरीजों से तय रेट से अधिक रुपये वसूले थे, क्योंकि पीपीई किट, मास्क से लेकर गाड़ी तक को वॉशिंग करवाना पड़ता है। आमतौर पर निजी एंबुलेंस चालक 14 रुपये प्रति किलोमीटर के वसूलते हैं और शहर में 500 रुपये लेते हैं। वहीं स्वास्थ्य विभाग गर्भवती महिलाओं से लाने ले जाने के कोई रुपये नहीं लेता है और सामान्य मरीजों को छोड़ने व लाने के लिए बीएलएस के 7 रुपये एवं एएलएस के 15 रुपये लेता है।
हमें 11 एंबुलेंस मिली हैं और सभी पीटीए हैं। इनका पीएचसी स्तर पर इस्तेमाल किया जा सकेगा। इससे गर्भवती को लाने, छोड़कर आने और सामान्य मरीजों को छोड़ने में आसानी होगी। एएलएस और बीएलएस का जरूरत के अनुसार इस्तेमाल किया जा सकेगा। - डॉ. जितेंद्र शर्मा, डिप्टी सीएमओ, हिसार