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एचएयू : हरे पत्ते और गीला कचरा हो रहा बर्बाद, कबाड़घर बना 6 करोड़ का प्लांट

Thu, 19 Aug 2021 12:17 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो संदीप बिश्नोई, संवाद न्यूज एजेंसी, हिसार (हरियाणा)
संदीप बिश्नोई, संवाद न्यूज एजेंसी, हिसार (हरियाणा) Published by: अमर उजाला ब्यूरो Updated Thu, 19 Aug 2021 12:17 AM IST
सार

एचएयू में लाखों की संख्या में पेड़-पौधे हैं। पेड़ों की पत्तियों के अलावा पौधों की होने वाली कटाई-छंगाई के दौरान भारी मात्रा में हरा कचरा एकत्रित होता है। वहीं, एचएयू-लुवास के शिक्षकों और कर्मचारियों के सैकड़ों घर हैं। इन घरों से प्रतिदिन गीला कचरा निकलता है।

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Green leaves and wet waste getting wasted, 6 crore plant made of junkyard
हरियाणा कृषि विश्वविद्यालय।

विस्तार

पेड़-पौधों की पत्तियों और घरों से निकलने गीले कचरे से खाद बनाने की नसीहत देने वाले चौधरी चरण सिंह हरियाणा कृषि विश्वविद्यालय (एचएयू) में कई टन कचरा सड़क किनारे पड़ा है। विवि कैंपस में आवासीय क्षेत्र की सड़कों के किनारे पड़े इस कचरे से कम्पोस्ट खाद बनाई जा सकती है, लेकिन यह कचरा यहीं पर सूख कर उड़ने लगा है। एचएयू के आवासीय क्षेत्र में ही 13 स्थानों पर सूखे कचरे के ढेर लगे हैं। दूसरी तरफ, विश्वविद्यालय का 6 करोड़ से बना वेस्ट मैनेजमेंट प्लांट स्वयं कचरा बन रहा है। प्लांट का दो साल पहले करीब 90 फीसदी निर्माण पूरा हो चुका है।

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एचएयू में लाखों की संख्या में पेड़-पौधे हैं। पेड़ों की पत्तियों के अलावा पौधों की होने वाली कटाई-छंगाई के दौरान भारी मात्रा में हरा कचरा एकत्रित होता है। वहीं, एचएयू-लुवास के शिक्षकों और कर्मचारियों के सैकड़ों घर हैं। इन घरों से प्रतिदिन गीला कचरा निकलता है। बता दें कि विश्वविद्यालय प्रशासन द्वारा विश्वविद्यालय के बाहर साउथ बाईपास पर कचरा डालने को लेकर नगर निगम ने भी नोटिस दिया गया था। इस कचरे में प्लास्टिक से लेकर घरेलू कचरा था। इसके बाद विवि प्रशासन ने वहां कचरा डालना बंद किया था।
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2 वर्षों में भी नहीं हो पाया प्लांट का 10 प्रतिशत काम
एचएयू में वर्ष 2019 में 6 करोड़ की लागत से एक एग्री वेस्ट मैनेजमेंट प्लांट बनाया गया था। इस प्लांट का 90 प्रतिशत कार्य पूरा हो चुका था, लेकिन पिछले दो वर्षों में इसका 10 प्रतिशत कार्य पूरा नहीं हो पाया और यह अभी तक चालू नहीं हो सका है। हालात ये हो गए हैं दो वर्ष से अधूरा पड़ा ये प्लांट अब स्वयं कबाड़ बन रहा है। अगर यह प्लांट शुरू हो जाता तो विश्वविद्यालय जैविक खाद तैयार करने के साथ-साथ बायोगैस भी मिल सकती थी। इसके साथ ही विवि में बड़े स्तर पर पैदा होने वाले कचरे का भी निस्तारण हो जाता।
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यह था उद्देश्य : कचरा निस्तारण की समस्या होगी हल
एचएयू के इस कदम से कैंपस में रोजाना जनरेट होने वाले कचरे के निस्तारण में मदद मिलेगी। इसके अलावा इसमें कृषि अवशेषों का प्रयोग होने से किसान इन्हें जलाने से भी परहेज करेंगे। भविष्य में एचएयू शहर का कचरा और किसानों की पराली भी लेगा। यही नहीं आगे चलकर शहरवासियों को एचएयू फीलिग स्टेशन के माध्यम से सीएनजी मुहैया कराएगी।


कागजों में ऐसा है प्लांट और विशेषताएं

  • प्लांट क्षमता 100 किलोवाट
  • फीड इनपुट 10 टन प्रतिदिन
  • सब्स्ट्रेस गोबर, फूड वेस्ट, फसल व पेड़-पौधों के अवशेष
  • बायोगैस उत्पादन 2 लाख घन मीटर
  • अनुकूलित जैविक खाद 5 टन प्रतिदिन

गीले कचरे के लिए पिट बनाए गए हैं और खाद बनाई जा रही है। एग्री वेस्ट मैनेजमेंट प्लांट की वही स्थिति है, जो एक साल पहले थी। - डॉ. संदीप आर्य, मीडिया एडवाइजर

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