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ग्लैंडर्स ग्रसित घोड़ी के बच्चे की रिपोर्ट आई नेगेटिव
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घोड़ी का बच्चा।
- फोटो : Hisar
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ग्लैंडर्स बीमारी पशुपालकों और डॉक्टरों के गले की फांस बन गई है। पहले जहां पशुपालकों ने अपनी घोड़ियों के सैंपल लेने से इनकार कर दिया था। वहीं, शुक्रवार को पशुपालकों ने दावा किया है कि ग्लैंडर्स बीमारी केवल झूठा चारा खाने से ही फैलती है। यह सांस से नहीं फैलती। पशुपालकों ने कहा कि ग्लैंडर्स के कारण जिस घोड़ी की मौत हो चुकी है, उसका बच्चा डेढ़ माह का है।
वैज्ञानिकों द्वारा खून के सैंपल लिए जाने के बाद अब उसकी रिपोर्ट नेगेटिव यानी कि सही पाया गया है। पशुपालकों ने कहा कि घोड़ी का बच्चा दो माह तक खा-पी नहीं सकता और मां पर ही निर्भर रहता है। ऐसे में उसने ग्लैंडर्स ग्रसित घोड़ियों के साथ कुछ खाया पीया नहीं। इससे स्पष्ट है कि यह बीमारी झूठा चारा खाने या पानी पीने से ही आती है, सांस आदि से नहीं। ऐसे में वैज्ञानिकों को इस बिंदु पर जांच करनी चाहिए। वहीं, शुक्रवार को भी पशुपालन विभाग की टीम को पशुपालकों ने कोई सैंपल नहीं लेने दिया।
गौरतलब है कि शहर के सैनियान मोहल्ले में ग्लैंडर्स पीड़ित पांच घोड़ियों को मौत के घाट उतारने के बाद पशुपालक ग्लैंडर्स बीमारी के निदान, उनकी मौत पर मुआवजा एक लाख रुपये करने की मांग कर रहे हैं। उनकी मांग पूरी नहीं होने तक उन्होंने अपनी घोड़ियों के ग्लैंडर्स की जांच को लिए जाने वाले सैंपल देने से इनकार कर दिया है।
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वैज्ञानिकों द्वारा खून के सैंपल लिए जाने के बाद अब उसकी रिपोर्ट नेगेटिव यानी कि सही पाया गया है। पशुपालकों ने कहा कि घोड़ी का बच्चा दो माह तक खा-पी नहीं सकता और मां पर ही निर्भर रहता है। ऐसे में उसने ग्लैंडर्स ग्रसित घोड़ियों के साथ कुछ खाया पीया नहीं। इससे स्पष्ट है कि यह बीमारी झूठा चारा खाने या पानी पीने से ही आती है, सांस आदि से नहीं। ऐसे में वैज्ञानिकों को इस बिंदु पर जांच करनी चाहिए। वहीं, शुक्रवार को भी पशुपालन विभाग की टीम को पशुपालकों ने कोई सैंपल नहीं लेने दिया।
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गौरतलब है कि शहर के सैनियान मोहल्ले में ग्लैंडर्स पीड़ित पांच घोड़ियों को मौत के घाट उतारने के बाद पशुपालक ग्लैंडर्स बीमारी के निदान, उनकी मौत पर मुआवजा एक लाख रुपये करने की मांग कर रहे हैं। उनकी मांग पूरी नहीं होने तक उन्होंने अपनी घोड़ियों के ग्लैंडर्स की जांच को लिए जाने वाले सैंपल देने से इनकार कर दिया है।
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