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जीजेयू में आज दिखेंगी हरियाणवी सांझ की झलकियां

Amar Ujala Bureau अमर उजाला ब्यूरो
Updated Mon, 22 Nov 2021 12:06 AM IST
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GJU will see glimpses of Haryanvi evening today
चौधरी रणबीर सिंह ऑडिटोरियम में आयोजित राज्यस्तरीय स्वयंसेवक शिविर में पदाधिकारी को सम्मानित क? - फोटो : Hisar
जीजेयू में आज दिखेंगी हरियाणवी सांझ की झलकियां
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फोटो : 79
- गुरु जंभेश्वर विश्वविद्यालय में चल रहा सात दिवसीय राज्य स्तरीय स्वयंसेवक शिविर
संवाद न्यूज एजेंसी
हिसार। गुरु जंभेश्वर विश्वविद्यालय में चल रहे सात दिवसीय राज्यस्तरीय स्वयंसेवक शिविर के छठे दिन सोमवार को हरियाणवी सांझ की झलकियां देखने को मिलेंगी। इसमें बाना, सगाई, बरात चढ़ाई, खोडिया, विदाई, भात न्योदा, भात, भात मोड़ना, घुड़चढ़ी, छटी, जलवा और कोथली सहित अन्य प्रथाएं जिनका प्रचलन कम हो गया और या फिर लुप्त होने की कगार पर है। इन प्रथाओं के प्रचलन से पहले की कहानियों को मंच के माध्यम से स्वयंसेवकों और दर्शकों को बताया जाएगा।
विशेष बात है कि यह हरियाणवी सांझ का मंचन पहली बार राज्यस्तरीय स्वयंसेवक शिविर में किया जाएगा। इसमें 10 टीमें अलग-अलग प्रथाओं पर प्रस्तुति देंगी। रविवार को राज्य स्तरीय स्वयंसेवक शिविर के 5वें दिन गुरु जंभेश्वर विश्वविद्यालय के चौधरी रणबीर सिंह ऑडिटोरियम में स्वच्छता विषय पर रंगोली बनाना, नशा मुक्ति और नारी शक्ति विषय पर पोस्टर बनाना व निबंध लेखन प्रतियोगिताएं आयोजित की। इसमें करीब 200 स्वयंसेवकों ने भाग लिया।
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पराली न जलाना और वायु प्रदूषण विषय पर विशेषज्ञों ने रखे मत
बायोनैनो विभाग के असिस्टेंट प्रोफेसर व राज्यस्तरीय स्वयंसेवक शिविर के कार्यक्रम समन्वयक अनिल कुमार, कैंप कमांडर अंजू गुप्ता ने बताया कि शिविर के 5वें दिन पराली न जलाने और वायु प्रदूषण को कम करने सहित दुष्परिणाम के विषय पर विशेषज्ञों ने अपने मत रखें। इसमें प्रो. नरसी राम बिश्नोई ने छात्रों को वायु प्रदूषण को कम करने के लिए प्रेरित किया। इस समस्या को हल करने के लिए अधिक से अधिक पेड़ लगाने और सौर ऊर्जा के इस्तेमाल का आह्वान किया।
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एनएसएस ने दिलाया दिल्ली का राजपथ
चार साल की मेहनत जब रंग लाई तो मन में एक अजीब सी खुशी और आंखों में आंसू थे। दोनों ही रुकने का नाम नहीं ले रहे थे। आखिरकार, 15 अगस्त की वह सुबह भी आ गई। जब मुझे दिल्ली के राजपथ पर कदम-ताल करने का मौका मिला। यह मुकाम दिलाया सिर्फ एनएसएस ने। 2017 में जीजेयू के फार्मेसी कोर्स में दाखिला लिया और तभी एनएसएस में अपना नाम लिखाया।
- अमित, नरवाना
झाड़ू की नहीं, लगाने वाले की होती है अहमियत
झाड़ू की नहीं, लगाने वाली की अहमियत होती है और उसी की पहचान दिलाती है एनएसएस। 2015 में एनएसएस से जुड़ा। 2017 में नेशनल इंटीग्रेरेशन कैंप, 2018 में राष्ट्रीय युवा महोत्सव और 2021 में दिल्ली के राजपथ पर चले। ये मुकाम एनएसएस के माध्यम से ही पाया जा सका। सात दिवसीय राज्यस्तरीय एनएसएस कैंप में काफी कुछ सीखकर जा रहे हैं।

- गंगा गौतम, पानीपत
पहले कांपते थे पैर, जब चेन्नई में दहाड़ा तो तालियों की सुनी गूंज
बोलने से पहले पैर कांपते थे, लेकिन एनएसएस ज्वाइन कर छोटे-छोटे कार्यक्रम में वक्ता की भूमिका निभाई। एक दिन चेन्नई के गुरु नानक देव ओटोबेल्स इंजीनियरिंग कॉलेज में राष्ट्र निर्माण में युवाओं की भूमिका विषय पर बोलने का मौका मिला। इस कार्यक्रम में कॉलेज से जुड़े विशेषज्ञ भी उसे सुनने का आए। जब चेन्नई में दहाड़ा तो तालियों की गूंज हर कोने से सुनाई दी। 2020 में लखनऊ में आयोजित राष्ट्रीय युवा महोत्सव और राष्ट्रीय युवा संसद में वर्चुअल तौर पर भाग लिया। इसमें प्रधानमंत्री ने उनका भाषण सुना।
- योगेश कुमार, पटौदी
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