{"_id":"695d58de6f7998054b0edc66","slug":"gju-honoured-for-environmental-initiative-hisar-news-c-21-hsr1020-785054-2026-01-07","type":"story","status":"publish","title_hn":"Hisar News: पर्यावरणीय पहल के लिए जीजेयू को मिला सम्मान","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Hisar News: पर्यावरणीय पहल के लिए जीजेयू को मिला सम्मान
विज्ञापन
जीजेयू में इंस्टीट्यूट ऑफ सस्टेनेबिलिटी, ग्रीन अर्थ कुरुक्षेत्र की ओर से मिले प्रमाण-पत्र को कु
हिसार। गुरु जम्भेश्वर विश्वविद्यालय (जीजेयू) को तीन दिवसीय युवा महोत्सव को ‘सिंगल-यूज प्लास्टिक और कचरा-मुक्त स्वच्छ महोत्सव’ के रूप में आयोजित करने के लिए प्रमाणपत्र प्रदान किया गया है। यह प्रमाणपत्र इंस्टीट्यूट ऑफ सस्टेनेबिलिटी, ग्रीन अर्थ कुरुक्षेत्र की ओर से दिया गया।
नोडल अधिकारी (सॉलिड वेस्ट मैनेजमेंट) डॉ. मुकेश कुमार ने बताया कि तीन दिनों में कुल 180 किलोग्राम सूखा और 590 किलोग्राम गीला कचरा उत्पन्न हुआ था, जिसका वैज्ञानिक तरीके से पूर्णतः निपटान किया गया। युवाओं के महोत्सव का आयोजन 7 से 9 नवंबर 2025 के बीच डीन ऑफ स्टूडेंट वेलफेयर के तत्वावधान में किया गया था। कार्यक्रम के दौरान उत्पन्न समस्त कचरे का निपटान ठोस अपशिष्ट प्रबंधन नियम, 2016 के अनुसार वैज्ञानिक पद्धति से किया गया। कचरे को स्रोत पर ही गीले और सूखे कचरे में अलग-अलग संग्रहित किया गया।
रिसोर्स मैनेजमेंट एंड सस्टेनेबिलिटी सेंटर (आरएमएससी) में इकोमित्रा टीम ने कचरे का प्रबंधन किया। गीले कचरे से कम्पोस्ट तैयार किया जा रहा है, जबकि सूखा कचरा पुनर्चक्रण के लिए भेजा जा रहा है। आयोजन में किसी भी प्रकार की सिंगल-यूज प्लास्टिक का उपयोग नहीं किया गया, जैसे कि चम्मच, कांटे, प्लेट और गिलास।
विज्ञापन
विश्वविद्यालय की पर्यावरण संबंधी पहल
कुलपति प्रो. नरसी राम बिश्नोई ने बताया कि विश्वविद्यालय परिसर में आरएमएससी सेंटर की स्थापना घरेलू कचरे के समुचित प्रबंधन के लिए की गई है। उन्होंने गर्व के साथ कहा कि जीजेयू हरियाणा का पहला विश्वविद्यालय है जो सिंगल-यूज प्लास्टिक-मुक्त और कचरा-मुक्त परिसर की दिशा में निरंतर अग्रसर है। कुलपति ने विश्वविद्यालय के सभी निवासियों से अपील की कि वे अपने घरों और कार्यालयों में गीले और सूखे कचरे का पृथक्करण सुनिश्चित करें। कुलसचिव डॉ. विजय कुमार ने बताया कि इससे पूर्व 10 मार्च 2025 को आयोजित दीक्षांत समारोह को भी सिंगल-यूज प्लास्टिक और कचरा-मुक्त स्वच्छ महोत्सव के रूप में आयोजित किया गया था।
विज्ञापन
नोडल अधिकारी (सॉलिड वेस्ट मैनेजमेंट) डॉ. मुकेश कुमार ने बताया कि तीन दिनों में कुल 180 किलोग्राम सूखा और 590 किलोग्राम गीला कचरा उत्पन्न हुआ था, जिसका वैज्ञानिक तरीके से पूर्णतः निपटान किया गया। युवाओं के महोत्सव का आयोजन 7 से 9 नवंबर 2025 के बीच डीन ऑफ स्टूडेंट वेलफेयर के तत्वावधान में किया गया था। कार्यक्रम के दौरान उत्पन्न समस्त कचरे का निपटान ठोस अपशिष्ट प्रबंधन नियम, 2016 के अनुसार वैज्ञानिक पद्धति से किया गया। कचरे को स्रोत पर ही गीले और सूखे कचरे में अलग-अलग संग्रहित किया गया।
विज्ञापन
रिसोर्स मैनेजमेंट एंड सस्टेनेबिलिटी सेंटर (आरएमएससी) में इकोमित्रा टीम ने कचरे का प्रबंधन किया। गीले कचरे से कम्पोस्ट तैयार किया जा रहा है, जबकि सूखा कचरा पुनर्चक्रण के लिए भेजा जा रहा है। आयोजन में किसी भी प्रकार की सिंगल-यूज प्लास्टिक का उपयोग नहीं किया गया, जैसे कि चम्मच, कांटे, प्लेट और गिलास।
विज्ञापन
विश्वविद्यालय की पर्यावरण संबंधी पहल
कुलपति प्रो. नरसी राम बिश्नोई ने बताया कि विश्वविद्यालय परिसर में आरएमएससी सेंटर की स्थापना घरेलू कचरे के समुचित प्रबंधन के लिए की गई है। उन्होंने गर्व के साथ कहा कि जीजेयू हरियाणा का पहला विश्वविद्यालय है जो सिंगल-यूज प्लास्टिक-मुक्त और कचरा-मुक्त परिसर की दिशा में निरंतर अग्रसर है। कुलपति ने विश्वविद्यालय के सभी निवासियों से अपील की कि वे अपने घरों और कार्यालयों में गीले और सूखे कचरे का पृथक्करण सुनिश्चित करें। कुलसचिव डॉ. विजय कुमार ने बताया कि इससे पूर्व 10 मार्च 2025 को आयोजित दीक्षांत समारोह को भी सिंगल-यूज प्लास्टिक और कचरा-मुक्त स्वच्छ महोत्सव के रूप में आयोजित किया गया था।