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फर्जीवाड़ा : जो शुल्क नगर निगम कर चुका खत्म, कंप्यूटर संचालक ने फर्जी रसीद से वसूला

Amar Ujala Bureau अमर उजाला ब्यूरो
Updated Sat, 26 Aug 2023 12:32 AM IST
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Forgery: The fee that the Municipal Corporation has finished, the computer operator recovered from the fake receipt
हिसार। प्रॉपर्टी टैक्स के नाम पर नगर निगम में ही नहीं, उसके बाहर भी फर्जीवाड़ा हो रहा है। निजी कंप्यूटर संचालक ने प्रॉपर्टी मालिक से वह शुल्क भी वसूला, जिसे नगर निगम खत्म कर चुका है। यही नहीं कंप्यूटर संचालक ने प्रॉपर्टी मालिक को इस शुल्क की फर्जी रसीद भी दी। पार्षद अमित ग्रोवर इस रसीद को लेकर नगर निगम अधिकारियों के पास पहुंचे तो इस बात का खुलासा हुआ।
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सेक्टर 16-17 निवासी संतोष कुमारी ने बताया कि उसका सेक्टर में 328 वर्ग गज का प्लॉट है। पहले यह उनके पति के नाम था। फिर उन्होंने इसे अपने नाम करवा लिया। एचएसवीपी की तरफ से इसे लेकर उन्हें अलॉटमेंट लेटर दे दिया गया। इसके बाद नगर निगम के प्रॉपर्टी टैक्स रिकॉर्ड में नाम बदलवाना था। इसे लेकर उनके बेटे ने डाबड़ा रोड स्थित एक कंप्यूटर संचालक से ऑनलाइन आवेदन करवाया। उक्त कंप्यूटर संचालक ने उनसे आवेदन करने के नाम पर 1500 रुपये लिए। इस दौरान उनका 6600 प्रॉपर्टी टैक्स बकाया था, जो उन्होंने ऑनलाइन जमा करवा दिया। इसके अलावा कंप्यूटर संचालक ने उनसे एमसी चार्ज के नाम पर 4000 रुपये लिए। कंप्यूटर संचालक का कहना था कि नाम बदलवाने पर नगर निगम एक हजार रुपये प्रति 100 गज के हिसाब से यह फीस लेता है। यही नहीं कंप्यूटर संचालक ने उन्हें 4000 हजार रुपये की रसीद भी दी। मगर उन्हें कुछ शक हुआ और उन्होंने इस बारे में पार्षद अमित ग्रोवर को अवगत करवाया।
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31 मार्च से पहले तक लिए जाते थे एमसी चार्ज
निगम अधिकारियों की मानें तो 31 मार्च से पहले अगर कोई व्यक्ति प्रॉपर्टी टैक्स रिकॉर्ड में नाम बदलवाने के लिए ऑनलाइन आवेदन करता था तो उससे निगम यह शुल्क लेता था। यह शुल्क भी उसे ऑनलाइन ही जमा करवाना होता था। इसे जमा करवाने के बाद ही रिकॉर्ड में प्रॉपर्टी मालिक के नाम में परिवर्तन होता था। मगर अब निगम ने यह शुल्क लेना बंद कर दिया है।
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नहीं मिला रिकॉर्ड : ग्रोवर
पार्षद अमित ग्रोवर ने बताया कि वह रसीद लेकर डीएमसी विरेंद्र सहारण के पास गए थे। उन्होंने अपने स्टाफ से इस रसीद को वेरिफाई करने को कहा तो स्टाफ ने इस रसीद को फर्जी बताया। ग्रोवर ने कहा कि निगम में प्रॉपर्टी टैक्स के कार्यों धांधली व रिश्वतखोरी के कारण बाहरी एजेंट सक्रिय हैं। इससे पहले भी 25 हजार रुपये की फर्जी रसीद थमा दी गई थी, जिसकी जांच आज तक पूरी नहीं हुई। पार्षद ने कहा कि निगम के कर्मचारी ऐसे एजेंट से काम करवाने के लिए शहरवासियों से संपर्क करवाते हैं। इसका खुलासा भी जल्द किया जाएगा।
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