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2 माह से वरिष्ठ प्रोफेसर लैब की चाबी तो शोधार्थी शोध को तरसे

Fri, 18 Jun 2021 01:27 AM IST
Rohtak Bureau रोहतक ब्यूरो
Updated Fri, 18 Jun 2021 01:27 AM IST
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For 2 months, the key to the senior professor's lab, the researcher craves research
हिसार। गुरु जंभेश्वर विश्वविद्यालय के बायो एंड नैनो टैक्नोलॉजी विभाग में शोध वातावरण बेहद खराब है। हालात यह है कि यहां शोधार्थी की समस्याएं तो अलग, शिक्षक अपनी ही समस्याएं नहीं सुलझा पा रहे हैं। एक वरिष्ठ शिक्षक और उसके शोधार्थी को 2 माह से लैब की चाबी ही नहीं मिल रही और शोध कार्य अटका पड़ा है।
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वरिष्ठ प्रोफेसर डॉ. अशोक चौधरी दो बार चेयरपर्सन के नाम शिकायत कर चुके हैं। उन्होंने पहली बार 16 अप्रैल को दो महिला प्रोफेसरों पर दुर्व्यवहार और ताला बदलने की शिकायत की। इसके बाद 11 जून और 14 जून को शिकायत दी। ऐसे में सवाल उठता है कि जिस विभाग में शिक्षकों की ही सुनवाई न हो रही हो, वहां विद्यार्थियों और शोधार्थियों का क्या होगा।
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सेवानिवृत्ति से पहले किया जा रहा प्रताड़ित
प्रो. अशोक चौधरी ने विभाग के चेयरपर्सन के नाम दी गई शिकायत में कहा कि पूर्व चेयरमैन के कहने पर विभाग की महिला असिस्टेंट प्रोफेसर ने प्लांट बायोलॉजी मॉलिक्यूलर लैबोरेट्री नंबर 102 का लॉक बदल दिया। महिला प्रोफेसर ने इसकी सूचना उन्हें नहीं दी और न ही उन्हें या उनके शोधार्थी राजेश को लैब की अतिरिक्त चाबी दी। शोधार्थी राजेश देर शाम तक लैब में अपने शोध कार्य करता था, लेकिन अब वह अपना शोध कार्य कैसे करें। स्वयं उन्हें भी लैब में नहीं जाने दिया जा रहा और सेवानिवृत्ति से पहले प्रताड़ित किया जा रहा है। उन्होंने शिकायत में लिखा है कि इससे पहले दो बार लिखे जाने के बाद भी महिला प्रोफेसर पर कोई कार्रवाई नहीं हुई।
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महिला प्रोफेसरों पर कमरे में आकर धमकाने का आरोप
प्रोफेसर अशोक चौधरी ने सबसे पहले 16 अप्रैल को एक शिकायत विभाग के चेयरपर्सन और विवि प्रशासन को लिखी थी। शिकायत में उन्होंने कहा था कि 15 अप्रैल को दोपहर साढ़े 12 बजे विभाग की दो महिला प्रोफेसर उनके कमरे में आईं और गाली-गलौज करते हुए दुर्व्यवहार किया। उन्होंने कहा कि वे उन्हें चेयरपर्सन से नो ड्यूज नहीं लेने देंगी। इसके साथ ही महिला प्रोफेसर ने बिना उन्हें कुछ बताए उनकी लैब नंबर 102 का ताला भी बदल दिया और उन्हें कोई चाबी नहीं दी।
दो शोधार्थियों की शिकायत पर आज तक कार्रवाई नहीं
विभाग में इससे पहले एक शोधार्थी प्रशांत कुमार ने भी रिसर्च डेटा चोरी करने को लेकर शिकायत की थी। उन्होंने अपने ही गाइड पर डेटा चोरी करवाने का आरोप लगाया था। इस मामले में दो बार कमेटी बनी, लेकिन परिणाम कुछ नहीं निकला। वहीं, पिछले माह इस विभाग में रिसर्च कल्चर पर सवाल उठाते हुए मानसिक रूप से परेशान महिला शोधार्थी ने आत्महत्या कर ली थी।
लैब को लेकर होता रहा है बवाल
बायो एंड नैनो टेक्नोलॉजी विभाग में बायोटेक्नोलॉजी और बायो नैनो की चार-चार लैब हैं। विभाग के शोधार्थी अक्सर अलग-अलग लैब में अलग-अलग उपकरणों व मशीनों पर काम करते हैं। इन लैब के चार्ज को लेकर समय-समय पर बवाल होता रहा है। एक शिक्षक का दूसरे शिक्षक से मनमुटाव होने पर परिणाम अमूनन उनके शोधार्थियों को भुगतना पड़ता है।

लैब में कोई भी घूस जाता था, शायद इसलिए ताला बदला गया था। चाबी लैब के इंचार्ज या लैब अटेंडेंट के पास होगी। कोई भी प्रोफेसर वहां से ले सकता है। फिर भी शिकायत मिलेगी तो मामले को देखेंगे। - प्रो. टंकेश्वर कुमार, कुलपति, गुजवि
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