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Hisar News: 55 दिनों से धरनारत किसानों ने मंत्री श्रुति चौधरी को सौंपा मांगपत्र
Fri, 21 Aug 2026 01:09 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, हिसार
संवाद न्यूज एजेंसी, हिसार
Updated Fri, 21 Aug 2026 01:09 AM IST
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भिवानी। हरियाणा के नारनौंद, हांसी, तोशाम और बवानीखेड़ा विधानसभा क्षेत्रों के किसानों व ग्रामीणों को सुंदर ब्रांच और सुंदर सब-ब्रांच नहरों में पानी की भारी कटौती व असमान वितरण के कारण सिंचाई और पेयजल का बड़ा संकट झेलना पड़ रहा है। इस विरोध में सुन्दर ब्रांच नहर बचाओ किसान संघर्ष समिति और अखिल भारतीय किसान सभा के बैनर तले बास गांव से कंवारी गांव तक के किसान पिछले 55 दिनों से आंदोलनरत हैं। सिंचाई व जल संसाधन मंत्री श्रुति चौधरी को बवानीखेड़ा में मांगपत्र सौंपा गया।
पूर्व छात्र नेता उमेश भारद्वाज ने कहा कि सुंदर ब्रांच नहर की उपेक्षा से 70 से अधिक गांवों का जीवन दूभर हो गया है। क्षेत्र का भूजल खारा होने से खेती नहरी पानी पर निर्भर है। नहरों में पानी न आने से वाटर टैंक सूख गए हैं, लोग पीने के पानी को तरस रहे हैं और फसलें बर्बाद हो रही हैं। पहले नहर महीने में दो सप्ताह चलती थी, पर अब 42-42 दिनों के अंतराल पर कुछ दिनों के लिए पानी छोड़ा जाता है। अधिकारी कागजों में खानापूर्ति कर रहे हैं, जबकि 950 क्यूसेक के हकदार सेक्शन को महज 465 क्यूसेक पानी मिल रहा है।
किसानों की प्रमुख मांगें
मांगपत्र में रोटेशन व्यवस्था में सुधार, अंटा हेड की क्षमता वृद्धि, मौहला हेड पर 2500 क्यूसेक पानी और मिताथल फीडर को 600 क्यूसेक व जूई-निगाना फीडर को 800 क्यूसेक पानी देने की मांग की गई। किसानों ने टेल तक सफाई व पानी की उपलब्धता, भाखड़ा जल विवाद का समाधान, अवैध डिस्ट्रीब्यूटरी चैनल्स पर रोक और पानी चोरी पर कानूनी शिकंजा कसने की भी मांग की। उन्होंने चेतावनी दी है कि मांगें न मानने पर आंदोलन को जिला और राज्य स्तर पर बड़ा रूप दिया जाएगा। धरने की अध्यक्षता सरदारा राम यादव ने की।
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पूर्व छात्र नेता उमेश भारद्वाज ने कहा कि सुंदर ब्रांच नहर की उपेक्षा से 70 से अधिक गांवों का जीवन दूभर हो गया है। क्षेत्र का भूजल खारा होने से खेती नहरी पानी पर निर्भर है। नहरों में पानी न आने से वाटर टैंक सूख गए हैं, लोग पीने के पानी को तरस रहे हैं और फसलें बर्बाद हो रही हैं। पहले नहर महीने में दो सप्ताह चलती थी, पर अब 42-42 दिनों के अंतराल पर कुछ दिनों के लिए पानी छोड़ा जाता है। अधिकारी कागजों में खानापूर्ति कर रहे हैं, जबकि 950 क्यूसेक के हकदार सेक्शन को महज 465 क्यूसेक पानी मिल रहा है।
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किसानों की प्रमुख मांगें
मांगपत्र में रोटेशन व्यवस्था में सुधार, अंटा हेड की क्षमता वृद्धि, मौहला हेड पर 2500 क्यूसेक पानी और मिताथल फीडर को 600 क्यूसेक व जूई-निगाना फीडर को 800 क्यूसेक पानी देने की मांग की गई। किसानों ने टेल तक सफाई व पानी की उपलब्धता, भाखड़ा जल विवाद का समाधान, अवैध डिस्ट्रीब्यूटरी चैनल्स पर रोक और पानी चोरी पर कानूनी शिकंजा कसने की भी मांग की। उन्होंने चेतावनी दी है कि मांगें न मानने पर आंदोलन को जिला और राज्य स्तर पर बड़ा रूप दिया जाएगा। धरने की अध्यक्षता सरदारा राम यादव ने की।
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