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प्रधानमंत्री कह रहे थे हम सिर्फ एक कॉल की दूरी पर है, तीन दिन हो चुकी अभी तक कॉल सुनाई नहीं दी-गुरनाम सिंह चढूनी
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रामायण टोल पर किसानों के बीच पहुंचे भारतीय किसान यूनियन के प्रदेशाध्यक्ष गुरनाम सिंह चढूनी।
- फोटो : Hisar
भारतीय किसान यूनियन (चढ़ूनी) के अध्यक्ष गुरनाम सिंह चढ़ूनी शनिवार को रामायण टोल पर आंदोलनरत किसानों के बीच पहुंचे। इस दौरान उन्होंने कहा कि सरकार ने तीनों कानून सिर्फ अंबानी व अड़ानी के लिए लागू किए हैं, क्योंकि सरकार उन्हें फायदा पहुंचाना चाहती है और किसानों को बर्बाद करना चाहती है। गुरनाम सिंह ने कहा कि प्रधानमंत्री कह रहे थे कि हम सिर्फ एक कॉल की दूरी पर है। मगर उन्हें तीन दिन बीत चुके हैं, लेकिन हमें वह कॉल अभी तक सुनाई नहीं दी।
उन्होंने कहा कि सरकार ने तीनों कानून बाद में लागू किए, पहले गोदाम बनाए गए। सरकार की सोची समझी साजिश के तहत कानून लागू किए गए हैं। चढ़ूनी ने कहा कि सरकार पर चोट पर चोट लग रही हैं। कोई चीज तोड़ने के लिए कई वार करने पड़ते हैं। किसान आंदोलन पहले से ज्यादा मजबूत हुआ हैं। उन्होंने कहा कि 26 जनवरी की घटना बेनकाब हो चुकी है। हमारा आंदोलन तेज हुआ है, लेकिन सरकार का रवैया वही है। उन्होंने कहा कि बहुत चोटें सरकार को पड़ चुकी हैं, सिर्फ आखिरी चोट बाकी है। सरकार अंदर से तो टूट चुकी है, बस बाहर से टूटना बाकी है।
गुरनाम सिंह ने कहा कि सरकार हमारे आंदोलन को तोड़ने का पूरी तरह से प्रयास कर रही है। हर दिन हमारे किसान भाइयों को धमकाया व डराया जा रहा है और उन पर मुकदमे दर्ज किए जा रहे हैं। मगर हमारे किसान भाई वहीं डटे हुए हैं। गुरनाम सिंह ने कहा कि हमारे 200 के करीब किसान आंदोलन के दौरान शहीद हो चुके हैं और 150 से ज्यादा किसान युवाओं का पता नहीं कि उन पर केस दर्ज करके कौन सी जेलों में भेजा गया है। हमारा संघर्ष लगातार जारी है और हमारा यह भी नारा है कि जब तक तीनों कानून वापस नहीं तो हमारी घर वापसी भी नहीं।
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उन्होंने कहा कि सरकार ने तीनों कानून बाद में लागू किए, पहले गोदाम बनाए गए। सरकार की सोची समझी साजिश के तहत कानून लागू किए गए हैं। चढ़ूनी ने कहा कि सरकार पर चोट पर चोट लग रही हैं। कोई चीज तोड़ने के लिए कई वार करने पड़ते हैं। किसान आंदोलन पहले से ज्यादा मजबूत हुआ हैं। उन्होंने कहा कि 26 जनवरी की घटना बेनकाब हो चुकी है। हमारा आंदोलन तेज हुआ है, लेकिन सरकार का रवैया वही है। उन्होंने कहा कि बहुत चोटें सरकार को पड़ चुकी हैं, सिर्फ आखिरी चोट बाकी है। सरकार अंदर से तो टूट चुकी है, बस बाहर से टूटना बाकी है।
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गुरनाम सिंह ने कहा कि सरकार हमारे आंदोलन को तोड़ने का पूरी तरह से प्रयास कर रही है। हर दिन हमारे किसान भाइयों को धमकाया व डराया जा रहा है और उन पर मुकदमे दर्ज किए जा रहे हैं। मगर हमारे किसान भाई वहीं डटे हुए हैं। गुरनाम सिंह ने कहा कि हमारे 200 के करीब किसान आंदोलन के दौरान शहीद हो चुके हैं और 150 से ज्यादा किसान युवाओं का पता नहीं कि उन पर केस दर्ज करके कौन सी जेलों में भेजा गया है। हमारा संघर्ष लगातार जारी है और हमारा यह भी नारा है कि जब तक तीनों कानून वापस नहीं तो हमारी घर वापसी भी नहीं।
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