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Hisar News: अनुमति लेकर एक पेड़ काटने पर भी लगाने होंगे दस पौधे
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हिसार। प्रदेश सरकार गैर वन क्षेत्रों में पेड़ों के संरक्षण के लिए नया कानून लागू करने की तैयारी में है। इसके तहत बिना अनुमति पेड़ काटने या नुकसान पहुंचाने पर 10,000 रुपये प्रति पेड़ जुर्माना लगेगा। इसके साथ ही पांच साल तक पौधरोपण और रखरखाव की लागत का 20 गुना पर्यावरणीय मुआवजा भी देना होगा। मुआवजा और जुर्माना जमा न करने पर कम से कम तीन महीने की कैद का प्रावधान प्रस्तावित है। अनुमति लेकर पेड़ काटने पर भी प्रत्येक पेड़ के बदले 10 पौधे लगाने होंगे। सरकार ने मसौदा सार्वजनिक करते हुए 30 नवंबर तक प्रदेशवासियों से ऑनलाइन सुझाव मांगे हैं।
हरियाणा के वन बल प्रमुख (हॉफ) केसी मीणा के हस्ताक्षर से दो नवंबर को इस प्रस्ताव के अनुमोदन के लिए सार्वजनिक सूचना जारी की गई है। डीएफओ रोहताश बिरथल ने बताया कि यह कानून निजी जमीन, कृषि भूमि और अन्य गैर वन क्षेत्रों में खड़े हरे पेड़ों पर लागू होगा। इन पेड़ों को काटने के लिए वन विभाग के ट्री ऑफिसर से अनुमति लेनी अनिवार्य होगी। सरकार का लक्ष्य पेड़ों के संरक्षण और राज्य में हरित क्षेत्र को बढ़ाना है। प्रदेश के मुख्य सचिव अनुराग रस्तोगी ने इस आशय का हलफनामा राष्ट्रीय हरित अधिकरण (एनजीटी) में भी दिया है।
हरियाणा वृक्ष संरक्षण अधिनियम-2026 के मसौदे के अनुसार यह कानून प्रदेश के सभी गैर वन क्षेत्रों में लागू होगा। इसमें पंजाब भूमि संरक्षण अधिनियम-1990 की धारा चार के तहत अधिसूचित क्षेत्र भी शामिल होंगे। हालांकि, वन और वन्यजीव क्षेत्रों को इसके दायरे से बाहर रखा गया है। सुझाव आने के बाद मसौदे में और परिवर्तन किए जाएंगे। उसके बाद यह प्रस्ताव कैबिनेट में पारित होने पर ही कानून बन सकेगा।
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अनुमति प्रक्रिया और समय सीमा
पेड़ काटने की अनुमति के लिए वन एवं वन्यजीव विभाग के ऑनलाइन पोर्टल और हरियाणा ई-सेवा पोर्टल पर आवेदन करना होगा। ट्री ऑफिसर को आवेदन मिलने के 30 दिन के भीतर फैसला देना होगा। गिरे हुए हरे पेड़ को हटाने के आवेदन पर तीन दिन में निर्णय करना होगा। यदि निर्धारित समय में फैसला नहीं होता है तो आवेदन स्वत अपीलीय प्राधिकरण के पास भेज दिया जाएगा। अधिकारी के फैसले से असंतुष्ट व्यक्ति 30 दिन के भीतर अपील कर सकेगा। मसौदे में ट्री ऑफिसर को पेड़ काटने में इस्तेमाल किए गए औजार, वाहन और अन्य सामान जब्त करने का अधिकार भी दिया गया है।
पेड़ काटने पर अनिवार्य पौधरोपण
रेंजर सूर्य सिंह ने बताया कि प्रस्तावित कानून के तहत हरा पेड़ काटने की अनुमति मिलने पर प्रत्येक पेड़ के बदले 10 पौधे लगाने होंगे। यह प्रावधान हरित क्षेत्र बढ़ाने और पर्यावरण संतुलन बनाए रखने के लिए किया गया है। इसके लिए पांच साल तक पौधरोपण और रखरखाव की निर्धारित लागत प्रतिपूरक पौधरोपण निधि में जमा करानी होगी। यथासंभव पौधे उसी जिले में लगाए जाएंगे जहां से पेड़ काटने की अनुमति ली गई है। शाखाओं की निर्धारित छंटाई पर यह शर्त लागू नहीं होगी।
किन परिस्थितियों में अनुमति की जरूरत नहीं
मसौदे के अनुसार सूखे और मृत पेड़ हटाने के लिए अनुमति की जरूरत नहीं होगी। बाग में लगे ऐसे फलदार पेड़, जो फल देना बंद कर चुके हैं उन्हें भी बिना अनुमति काटा जा सकेगा। कृषि भूमि में पेड़ों की छंटाई के लिए भी अनुमति जरूरी नहीं होगी। बाढ़, तूफान और अन्य आपात परिस्थितियों में जनजीवन या संपत्ति की सुरक्षा के लिए पेड़ हटाने पर भी अनुमति की छूट रहेगी। ग्रामीण क्षेत्रों में ईंधन, चारा, कृषि उपकरण और घरेलू उपयोग के लिए लकड़ी प्राप्त करने के लिए पेड़ काटने की अनुमति का भी प्रावधान है।
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हरियाणा के वन बल प्रमुख (हॉफ) केसी मीणा के हस्ताक्षर से दो नवंबर को इस प्रस्ताव के अनुमोदन के लिए सार्वजनिक सूचना जारी की गई है। डीएफओ रोहताश बिरथल ने बताया कि यह कानून निजी जमीन, कृषि भूमि और अन्य गैर वन क्षेत्रों में खड़े हरे पेड़ों पर लागू होगा। इन पेड़ों को काटने के लिए वन विभाग के ट्री ऑफिसर से अनुमति लेनी अनिवार्य होगी। सरकार का लक्ष्य पेड़ों के संरक्षण और राज्य में हरित क्षेत्र को बढ़ाना है। प्रदेश के मुख्य सचिव अनुराग रस्तोगी ने इस आशय का हलफनामा राष्ट्रीय हरित अधिकरण (एनजीटी) में भी दिया है।
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हरियाणा वृक्ष संरक्षण अधिनियम-2026 के मसौदे के अनुसार यह कानून प्रदेश के सभी गैर वन क्षेत्रों में लागू होगा। इसमें पंजाब भूमि संरक्षण अधिनियम-1990 की धारा चार के तहत अधिसूचित क्षेत्र भी शामिल होंगे। हालांकि, वन और वन्यजीव क्षेत्रों को इसके दायरे से बाहर रखा गया है। सुझाव आने के बाद मसौदे में और परिवर्तन किए जाएंगे। उसके बाद यह प्रस्ताव कैबिनेट में पारित होने पर ही कानून बन सकेगा।
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अनुमति प्रक्रिया और समय सीमा
पेड़ काटने की अनुमति के लिए वन एवं वन्यजीव विभाग के ऑनलाइन पोर्टल और हरियाणा ई-सेवा पोर्टल पर आवेदन करना होगा। ट्री ऑफिसर को आवेदन मिलने के 30 दिन के भीतर फैसला देना होगा। गिरे हुए हरे पेड़ को हटाने के आवेदन पर तीन दिन में निर्णय करना होगा। यदि निर्धारित समय में फैसला नहीं होता है तो आवेदन स्वत अपीलीय प्राधिकरण के पास भेज दिया जाएगा। अधिकारी के फैसले से असंतुष्ट व्यक्ति 30 दिन के भीतर अपील कर सकेगा। मसौदे में ट्री ऑफिसर को पेड़ काटने में इस्तेमाल किए गए औजार, वाहन और अन्य सामान जब्त करने का अधिकार भी दिया गया है।
पेड़ काटने पर अनिवार्य पौधरोपण
रेंजर सूर्य सिंह ने बताया कि प्रस्तावित कानून के तहत हरा पेड़ काटने की अनुमति मिलने पर प्रत्येक पेड़ के बदले 10 पौधे लगाने होंगे। यह प्रावधान हरित क्षेत्र बढ़ाने और पर्यावरण संतुलन बनाए रखने के लिए किया गया है। इसके लिए पांच साल तक पौधरोपण और रखरखाव की निर्धारित लागत प्रतिपूरक पौधरोपण निधि में जमा करानी होगी। यथासंभव पौधे उसी जिले में लगाए जाएंगे जहां से पेड़ काटने की अनुमति ली गई है। शाखाओं की निर्धारित छंटाई पर यह शर्त लागू नहीं होगी।
किन परिस्थितियों में अनुमति की जरूरत नहीं
मसौदे के अनुसार सूखे और मृत पेड़ हटाने के लिए अनुमति की जरूरत नहीं होगी। बाग में लगे ऐसे फलदार पेड़, जो फल देना बंद कर चुके हैं उन्हें भी बिना अनुमति काटा जा सकेगा। कृषि भूमि में पेड़ों की छंटाई के लिए भी अनुमति जरूरी नहीं होगी। बाढ़, तूफान और अन्य आपात परिस्थितियों में जनजीवन या संपत्ति की सुरक्षा के लिए पेड़ हटाने पर भी अनुमति की छूट रहेगी। ग्रामीण क्षेत्रों में ईंधन, चारा, कृषि उपकरण और घरेलू उपयोग के लिए लकड़ी प्राप्त करने के लिए पेड़ काटने की अनुमति का भी प्रावधान है।