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छह महीने बाद भी डेयरी प्लाजा के स्टैंडर्ड डिजाइन को नहीं मिली मंजूरी
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अमित भारद्वाज
हिसार। मुख्यमंत्री की डेयरी शिफ्टिंग की घोषणा को धरातल पर मूर्त रूप देने में नगर निगम विफल रहा है। नगर निगम की तरफ से डेयरियों के स्टैंडर्ड डिजाइन के लिए इस वर्ष फरवरी में फाइल मुख्यालय भेजी थी, मगर छह माह बाद भी डिजाइन को मंजूरी नहीं मिली है। अधिकारियों की मानें तो मुख्यालय की तरफ से इस डिजाइन पर दो बार आपत्ति लगाई जा चुकी है।
हालांकि उनकी तरफ से जल्द ही उसे ठीक कर फाइल दोबारा से मुख्यालय भेजी जा चुकी है। अधिकारियों के मुताबिक इस मुद्दे को लेकर वीरवार को मुख्यालय में बैठक बुलाई गई है। वहीं, चहारदीवारी निर्माण कार्य की रफ्तार कछुआ चाल है। वहीं अभी तक सुविधाओं के अभाव में प्लॉट की बोली भी अधूर में अटकी पड़ी है।
याद रहे कि इनेलो सरकार में वर्ष 2000 में पहली बार डेयरी प्लाजा की घोषणा हुई थी। निगम ने इसके लिए धान्सू रोड पर जमीन ली थी, मगर प्रोजेक्ट सिरे नहीं चढ़ पाया। इसके बाद 2004-05 में डेयरी शिफ्टिंग का मुद्दा दोबारा से उठा तो अफसरों को जमीन तलाशने की जिम्मेदारी सौंपी गई। वर्ष 2005 में प्रशासन ने 24 एकड़ सरकारी जमीन चिह्नित की। साल 2010 में डेयरी शिफ्टिंग के लिए सर्वे हुआ, जिसमें शहर में 292 डेयरियां मिलीं थीं।
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निगम अधिकारियों ने अगस्त 2013 में बगला रोड पर 137 एकड़ सात कनाल 14 मरले भूमि चिह्नित कर सरकार के पास प्रस्ताव भेजा। 29 दिसंबर 2014 को मुख्यमंत्री मनोहर लाल ने डेयरी शिफ्टिंग प्रोजेक्ट को लेकर फिर घोषणा की। शहर के चारों तरफ 25-25 एकड़ जमीन पर डेयरियां शिफ्ट करने की घोषणा की गई है,मगर अलग-अलग जमीन नहीं मिली। आखिरकार साउथ बाईपास (बगला रोड) पर 50 एकड़ जमीन फाइनल हुई। जमीन फाइनल होने के बाद वर्ष 2020 में निगम ने दोबारा से डेयरियों को लेकर सर्वे कराया, जिसमें शहर में 410 दूध डेयरियां मिलीं।
अक्टूबर में चहारदीवारी का निर्माण कार्य करना था पूरा, डेढ़ महीने पहले ही हुई शुरुआत
डेयरी प्लाजा की चहारदीवारी का निर्माण कार्य काफी धीमी गति से चल रहा है। ठेकेदार को जनवरी में इस कार्य का वर्क ऑर्डर जारी कर दिया गया था। अक्टूबर तक उसे इस कार्य को पूरा करना है, मगर स्थिति यह है कि एक-डेढ़ माह पहले ही उसका कार्य शुरू किया है। ठेकेदार को 5500 फुट की चहारदीवारी का निर्माण करना है, जिस पर करीब साढ़े तीन करोड़ की लागत आनी है। चहारदीवारी करीब साढ़े मीटर लंबी होगी और पूरी सीसी की होगी। पिछले सप्ताह लगातार तीन दिन हुई बारिश के कारण साइट पर पानी भर गया, जिस कारण से ठेकेदार को काम रोकना पड़ा।
अभी 387 डेयरी प्लॉट की बोली लटकी
डेयरी प्लाजा में 410 प्लॉट में से 23 प्लॉट की ही बोली हुई है। डेयरी प्लॉट की बोली को लेकर डेयरी मालिकों व निगम प्रशासन में तनातनी चल रही थी। हालांकि बाद में दोनों पक्षों के बीच में बोली को लेकर समझौता हो गया था। इस वर्ष जनवरी में आखिरी बार प्लॉट की बोली हुई थी। इसके बाद से डेयरी संचालक बोली का इंतजार कर रहे हैं। अभी 387 प्लॉट की बोली बाकी है।
यह सुविधाएं होंगी : डेयरी प्लाजा में पशुओं के लिए तालाब, चारा मंडी, गोबर गैस प्लांट, सामुदायिक केंद्र, कैटल हॉस्टल, चिलिंग प्लांट, ऑटोमेटिक मिल्किंग प्लांट, मिल्क कलेक्शन सेंटर, शॉपिंग सेंटर, कैफेटेरिया, वेटरनरी अस्पताल व एसटीपी प्लांट।
यह होगा फायदा : दूध डेयरियों के कारण गोबर से सीवर जाम की समस्या से मुक्ति मिलेगी। पशुओं के गोबर से होने वाली गंदगी से छुटकारा मिलेगा। पशुओं के मल-मूत्र से होने वाले मच्छर-मक्खियों की भरमार से निजात मिलेगी।
डेयरी प्लॉट की बोली काफी समय से लटकी पड़ी है। हम काफी बार मेयर से इस बारे में मुलाकात कर चुके हैं। हमारी मांग है कि जल्द से जल्द बाकी बचे प्लॉट की भी बोली करवाई जाए। - नंदलाल पाहवा, प्रधान, पशु डेयरी एसोसिएशन
निगम का वर्जन ::::
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हिसार। मुख्यमंत्री की डेयरी शिफ्टिंग की घोषणा को धरातल पर मूर्त रूप देने में नगर निगम विफल रहा है। नगर निगम की तरफ से डेयरियों के स्टैंडर्ड डिजाइन के लिए इस वर्ष फरवरी में फाइल मुख्यालय भेजी थी, मगर छह माह बाद भी डिजाइन को मंजूरी नहीं मिली है। अधिकारियों की मानें तो मुख्यालय की तरफ से इस डिजाइन पर दो बार आपत्ति लगाई जा चुकी है।
हालांकि उनकी तरफ से जल्द ही उसे ठीक कर फाइल दोबारा से मुख्यालय भेजी जा चुकी है। अधिकारियों के मुताबिक इस मुद्दे को लेकर वीरवार को मुख्यालय में बैठक बुलाई गई है। वहीं, चहारदीवारी निर्माण कार्य की रफ्तार कछुआ चाल है। वहीं अभी तक सुविधाओं के अभाव में प्लॉट की बोली भी अधूर में अटकी पड़ी है।
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याद रहे कि इनेलो सरकार में वर्ष 2000 में पहली बार डेयरी प्लाजा की घोषणा हुई थी। निगम ने इसके लिए धान्सू रोड पर जमीन ली थी, मगर प्रोजेक्ट सिरे नहीं चढ़ पाया। इसके बाद 2004-05 में डेयरी शिफ्टिंग का मुद्दा दोबारा से उठा तो अफसरों को जमीन तलाशने की जिम्मेदारी सौंपी गई। वर्ष 2005 में प्रशासन ने 24 एकड़ सरकारी जमीन चिह्नित की। साल 2010 में डेयरी शिफ्टिंग के लिए सर्वे हुआ, जिसमें शहर में 292 डेयरियां मिलीं थीं।
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निगम अधिकारियों ने अगस्त 2013 में बगला रोड पर 137 एकड़ सात कनाल 14 मरले भूमि चिह्नित कर सरकार के पास प्रस्ताव भेजा। 29 दिसंबर 2014 को मुख्यमंत्री मनोहर लाल ने डेयरी शिफ्टिंग प्रोजेक्ट को लेकर फिर घोषणा की। शहर के चारों तरफ 25-25 एकड़ जमीन पर डेयरियां शिफ्ट करने की घोषणा की गई है,मगर अलग-अलग जमीन नहीं मिली। आखिरकार साउथ बाईपास (बगला रोड) पर 50 एकड़ जमीन फाइनल हुई। जमीन फाइनल होने के बाद वर्ष 2020 में निगम ने दोबारा से डेयरियों को लेकर सर्वे कराया, जिसमें शहर में 410 दूध डेयरियां मिलीं।
अक्टूबर में चहारदीवारी का निर्माण कार्य करना था पूरा, डेढ़ महीने पहले ही हुई शुरुआत
डेयरी प्लाजा की चहारदीवारी का निर्माण कार्य काफी धीमी गति से चल रहा है। ठेकेदार को जनवरी में इस कार्य का वर्क ऑर्डर जारी कर दिया गया था। अक्टूबर तक उसे इस कार्य को पूरा करना है, मगर स्थिति यह है कि एक-डेढ़ माह पहले ही उसका कार्य शुरू किया है। ठेकेदार को 5500 फुट की चहारदीवारी का निर्माण करना है, जिस पर करीब साढ़े तीन करोड़ की लागत आनी है। चहारदीवारी करीब साढ़े मीटर लंबी होगी और पूरी सीसी की होगी। पिछले सप्ताह लगातार तीन दिन हुई बारिश के कारण साइट पर पानी भर गया, जिस कारण से ठेकेदार को काम रोकना पड़ा।
अभी 387 डेयरी प्लॉट की बोली लटकी
डेयरी प्लाजा में 410 प्लॉट में से 23 प्लॉट की ही बोली हुई है। डेयरी प्लॉट की बोली को लेकर डेयरी मालिकों व निगम प्रशासन में तनातनी चल रही थी। हालांकि बाद में दोनों पक्षों के बीच में बोली को लेकर समझौता हो गया था। इस वर्ष जनवरी में आखिरी बार प्लॉट की बोली हुई थी। इसके बाद से डेयरी संचालक बोली का इंतजार कर रहे हैं। अभी 387 प्लॉट की बोली बाकी है।
यह सुविधाएं होंगी : डेयरी प्लाजा में पशुओं के लिए तालाब, चारा मंडी, गोबर गैस प्लांट, सामुदायिक केंद्र, कैटल हॉस्टल, चिलिंग प्लांट, ऑटोमेटिक मिल्किंग प्लांट, मिल्क कलेक्शन सेंटर, शॉपिंग सेंटर, कैफेटेरिया, वेटरनरी अस्पताल व एसटीपी प्लांट।
यह होगा फायदा : दूध डेयरियों के कारण गोबर से सीवर जाम की समस्या से मुक्ति मिलेगी। पशुओं के गोबर से होने वाली गंदगी से छुटकारा मिलेगा। पशुओं के मल-मूत्र से होने वाले मच्छर-मक्खियों की भरमार से निजात मिलेगी।
डेयरी प्लॉट की बोली काफी समय से लटकी पड़ी है। हम काफी बार मेयर से इस बारे में मुलाकात कर चुके हैं। हमारी मांग है कि जल्द से जल्द बाकी बचे प्लॉट की भी बोली करवाई जाए। - नंदलाल पाहवा, प्रधान, पशु डेयरी एसोसिएशन
निगम का वर्जन ::::