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हौड़, दौड़ व मरोड़ में कभी नहीं होती भक्ति : डॉ. स्वामी उमानंद
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जवाहर नगर हनुमान मंदिर में हनुमान कथा करते स्वामी उमानंद, कथा श्रवण करते श्रद्धालु।
हिसार। जवाहर नगर गली नंबर दो स्थित रामभक्त हनुमान मंदिर समिति के 30वें वार्षिक महोत्सव के संगीतमय हनुमान कथा के तीसरे दिन कथा व्यास डॉ. स्वामी उमानंद मानसमणि ने कहा कि हौड़, दौड़ और मरोड़ में कभी भक्ति नहीं होती है। उन्होंने कहा कि यदि आप भजन में साथी, दुखिया दिल से सेवा, किसी से निंदा, ईर्ष्या नहीं कर रहे तो आपको हनुमानजी के कृपा मिल रही है।
आज तक कभी ऐसा नहीं हुआ कि चालाकी से किसी ने भगवान के दर्शन किए हों। भगवान को तो हमेशा सरल हृदय ही पसंद है। जो बीज आपने बोया ही नहीं, वह फसल कैसे काट लोगे। ऐसे ही अगर जीवन में दुख, तकलीफ और कष्ट हैं तो समझ लेना, कहीं ना कहीं उसके बीज बोए गए थे। आपने नजरिया ऐसा बना लिया है कि अपनी समस्याओं के लिए आप दूसरों को जिम्मेदार ठहराते हैं।
अपने नाम के जप से नहीं, हनुमानजी श्रीराम नाम जप से प्रसन्न होते हैं। इसका अर्थ यह है कि जब आप अपनी खुशियां दूसरों की खुशियों में ढूंढना शुरू कर दोगे तो आप खुद प्रसन्नता से भर जाओगे। कथा में टोटके नहीं होते और जहां टोटके होते हैं, वहां कथा नहीं होती है। कथा तो आपको जीवन जीने के सूत्र बताती है। अगर कुछ चढ़ाना ही है तो अपने आप को समर्पित करो।
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मंदिर समिति के प्रधान इंद्रचंद राठी ने बताया कि 11 अप्रैल को प्रात: 6:30 बजे अखंड हनुमान चालीसा पाठ प्रारंभ किए जाएंगे, जिनका समापन 12 अप्रैल को किया जाएगा। इसके बाद सत्यनारायण कथा की जाएगी। प्रात: 8:30 बजे हवन किया जाएगा। प्रात: 10 बजे से स्वामी सत्यानंद महाराज व अन्य भजन, सत्संग व प्रवचन देंगे। दोपहर एक बजे भंडारा चलाया जाएगा। इसी दिन सायं 7:30 बजे सामूहिक सुंदरकांड का पाठ किया जाएगा।
इस अवसर पर मंदिर समिति के प्रधान इंद्रचंद राठी, केके सेहरा, एचके शर्मा, रामप्रताप लेगा, भगतचंद मेहता, प्रीतम छाबड़ा, हरबंस ग्रोवर, नारायण दास तनेजा, ओ.पी.सुखीजा, किशोरीलाल वधवा, देवराज ललित, रमेश गांधी, वजीर चंद वधवा, देसराज, ओमप्रकाश चुटानी, रामकुमार गोदारा, अमीरचंद वधवा, ललित राठी, अर्जुन ललित, संजीव पंवार एडवोकेट, विनोद बिश्नोई, सूरज प्रकाश, राजेन्द्र गर्ग, नवनीत आदि भी उपस्थित रहे।
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आज तक कभी ऐसा नहीं हुआ कि चालाकी से किसी ने भगवान के दर्शन किए हों। भगवान को तो हमेशा सरल हृदय ही पसंद है। जो बीज आपने बोया ही नहीं, वह फसल कैसे काट लोगे। ऐसे ही अगर जीवन में दुख, तकलीफ और कष्ट हैं तो समझ लेना, कहीं ना कहीं उसके बीज बोए गए थे। आपने नजरिया ऐसा बना लिया है कि अपनी समस्याओं के लिए आप दूसरों को जिम्मेदार ठहराते हैं।
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अपने नाम के जप से नहीं, हनुमानजी श्रीराम नाम जप से प्रसन्न होते हैं। इसका अर्थ यह है कि जब आप अपनी खुशियां दूसरों की खुशियों में ढूंढना शुरू कर दोगे तो आप खुद प्रसन्नता से भर जाओगे। कथा में टोटके नहीं होते और जहां टोटके होते हैं, वहां कथा नहीं होती है। कथा तो आपको जीवन जीने के सूत्र बताती है। अगर कुछ चढ़ाना ही है तो अपने आप को समर्पित करो।
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मंदिर समिति के प्रधान इंद्रचंद राठी ने बताया कि 11 अप्रैल को प्रात: 6:30 बजे अखंड हनुमान चालीसा पाठ प्रारंभ किए जाएंगे, जिनका समापन 12 अप्रैल को किया जाएगा। इसके बाद सत्यनारायण कथा की जाएगी। प्रात: 8:30 बजे हवन किया जाएगा। प्रात: 10 बजे से स्वामी सत्यानंद महाराज व अन्य भजन, सत्संग व प्रवचन देंगे। दोपहर एक बजे भंडारा चलाया जाएगा। इसी दिन सायं 7:30 बजे सामूहिक सुंदरकांड का पाठ किया जाएगा।
इस अवसर पर मंदिर समिति के प्रधान इंद्रचंद राठी, केके सेहरा, एचके शर्मा, रामप्रताप लेगा, भगतचंद मेहता, प्रीतम छाबड़ा, हरबंस ग्रोवर, नारायण दास तनेजा, ओ.पी.सुखीजा, किशोरीलाल वधवा, देवराज ललित, रमेश गांधी, वजीर चंद वधवा, देसराज, ओमप्रकाश चुटानी, रामकुमार गोदारा, अमीरचंद वधवा, ललित राठी, अर्जुन ललित, संजीव पंवार एडवोकेट, विनोद बिश्नोई, सूरज प्रकाश, राजेन्द्र गर्ग, नवनीत आदि भी उपस्थित रहे।