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Haryana: पहले कोथली में आते थे गुलगुले-सुहाली, अब घेवर-फिरनी तक सिमटा त्योहार
Fri, 07 Jul 2023 03:34 PM IST
नवीन दलाल
दीपिका लोहचब, हिसार (हरियाणा)
दीपिका लोहचब, हिसार (हरियाणा)
Published by: नवीन दलाल
Updated Fri, 07 Jul 2023 03:34 PM IST
सार
हरियाणा में सावन के महीने में तीज के त्याहोर के पास कोथली देने का चलन शुरू से ही चलता आ रहा है। इस दौरान भाई बहन के घर पर शुगन के तौर पर मिठाई और कपड़े लेकर जाता है। लेकिन समय के साथ इस चलन में बदलाव आया है।
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दुकान पर सजे घेवर-फिरनी
- फोटो : अमर उजाला
विस्तार
मीठी तो कर दे री मां कोथली, सामण आया गूंजता। कुछ समय पहले तक सावन का महीना शुरू होते ही इस हरियाणवी गीत को महिलाएं गुनगुनाती सुनाई देती थीं। सावन आते ही मां अपनी बेटी की कोथली की तैयारियों में जुट जाती थीं। हर घर से गुलगुले और सुहाली की खुशबू महकती थी, लेकिन बदलते दौर में कोथली में अब गुलगुले, सुहाली की जगह घेवर, फिरनी और मिठाइयों ने ले ली।
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सावन का महीना आते ही बहनों को भाई के घर से कोथली का रहता है इंतजार
कोथली के सामान को सबसे पहले घर की बुजुर्ग महिला को सौंपा जाता है। कोथली जब भाई अपनी बहन के ससुराल देने जाता है तो वाकई वो लम्हा बेहद भावुक होता है। हमारी दादी-नानी बताती हैं कि सावन महीने की शुरुआत होते ही उनको कोथली का इंतजार रहता था और मन में इच्छा रहती थी की ईबकी बार मां किसे रंग की चुंदड़ी भेजेगी, अर खाण ताई कितने गुलगुले-सुहाली देवेंगी।
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पेटीएम से भेजी जा रही कोथली
आधुनिकता के इस दौर में बहन के पास कोथली देने के रिवाज में भी बदलाव आया है। आज भाई के पास बहन के घर जाकर कोथली देने का समय तक नहीं है। जिस सावन के महीने के आते ही बच्चों को मामा के आने का इंतजार होता था। आज वह चाव कम हो गया है। अब भाई -बहन का प्यार भी डिजिटल हाे गया है। भाई अब घर बैठे बहन के खाते में पैसे ट्रांसफर कर देता है। बाद में बहन उन रुपयों से कोथली का सामान खरीदती है।
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घेवर और फिरनी के भाव में भी अंतर
सावन माह में मिठाइयों की दुकान पर फिरनी और घेवर सजने लगे हैं। घेवर के दाम 140 रुपये से 350 रुपये तक है। फिरनी के दामों में भी अंतर है। फिरनी के रेशों में रिश्तों की मिठास गूंथी जाती है। मैदा, घी और चीनी के मिश्रण से तैयार होने वाली इस लाजवाब मिठाई के हर वर्ग के लोग कायल हैं।