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Hisar: शहर में 4 साल से चल रही सिटी बस सेवा हुई बंद, बसों को लेकर नगर निगम कार्यालय पहुंचे मालिक

Wed, 21 Jun 2023 01:10 PM IST
नवीन दलाल माई सिटी रिपोर्टर, हिसार (हरियाणा)
माई सिटी रिपोर्टर, हिसार (हरियाणा) Published by: नवीन दलाल Updated Wed, 21 Jun 2023 01:10 PM IST
सार

हिसार में शुरुआत में निगम ने चार साल के लिए टेंडर प्लॉट किया था इसके लिए शर्त यह थी कि बस एजेंसी की होगी और निगम उसे परमिट दिलवाएगा। तब बस मालिक कौन है एक बस पर 20 से 2500000 रुपए खर्च कर लो फ्लोर बस से तैयार करवाई थी।

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City bus service running in Hisar stopped for 4 years, owners reached Municipal Corporation office with buses
सिटी बस - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

हिसार में चार साल से चल रही सिटी बस सेवा बंद हो गई है। बुधवार को सिटी बस मालिक अपनी बसों को लेकर नगर निगम कार्यालय पहुंचे और कार्यालय के सामने बसों को खड़ा कर दिया। सिटी बस मालिकों की माने तो आरटीओ ने बसों को लेकर परमिट देने से मना कर दिया जिस कारण यह बस सेवा बंद हो गई है। 

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2019 में सिटी बस सेवा शुरू की गई थी
सिटी बस मालिक राजबीर, जयबीर, सावंत, सतबीर, सोहन आदि ने बताया कि वर्ष 2019 में सिटी बस सेवा शुरू की गई थी। शुरुआत में 4:00 बजे चलाई गई थी जो अब बढ़कर आठ हो चुकी थी। शुरुआत में निगम ने चार साल के लिए टेंडर प्लॉट किया था इसके लिए शर्त यह थी कि बस एजेंसी की होगी और निगम उसे परमिट दिलवाएगा। तब बस मालिक कौन है एक बस पर 20 से 2500000 रुपए खर्च कर लो फ्लोर बस से तैयार करवाई थी।
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परमिट देने से इनकार कर दिया
शुरुआत में बस मालिक निगम को 11 से लेकर 500 रुपये प्रतिदिन के हिसाब से भुगतान कर रहे थे। चार साल पूरे होने के बाद अब निगम की तरफ से दोबारा से टेंडर लगाया गया जो रेट पहले 11 से 500 रुपये तक के थे,  निगम ने उस फीस को बढ़ाकर 500 से 3100 रुपये तक कर दिया। इसके बाद निगम ने टेंडर भी अलॉट कर दिया और एग्रीमेंट भी कर लिया। मगर जब बस मालिक आरटीओ में परमिट लेने गए तो उन्होंने परमिट देने से इनकार कर दिया।
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25 से ज्यादा लोगों को रोजगार मिला हुआ था
उनका कहना है कि यह बसें स्कीम 2004 के तहत चलाई जा रही है जिसमें हिसार शहर नहीं आता। इस कारण से इन बसों को परमिट नहीं दिया जा सकता। बस मालिकों का कहना है कि इन बसों से करीब 25 से ज्यादा लोगों को रोजगार मिला हुआ था जो अब बेरोजगार हो गए हैं। इसके अलावा उन्होंने बसों के ऊपर जो इतना इन्वेस्टमेंट किया था वह भी बेकार हो गया। उस समय तत्कालीन उपायुक्त और नगर निगम आयुक्त ने उन्हें आश्वासन दिया था कि जब तक इन बसों की लाइफ है तब तक इन्हें परमिट दिलवाया जाएगा। इन बसों का किराया 5 और 10 रुपये तय है जबकि ऑटो में किराया 20 निर्धारित किया हुआ है।

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