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वाया नेपाल के रास्ते आरबीआई तक पहुंचानी थी पुरानी करेंसी
Updated Sat, 15 Sep 2018 12:48 AM IST
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हिसार। नोटबंदी के 22 माह 6 दिन बाद हिसार जैसे शहर से एक करोड़ 43 लाख की पुरानी करेंसी पकड़े जाना देश में किसी बड़े गोलमाल की ओर इशारा करता है। हालांकि पुलिस इस मामले में खुलकर नहीं बोल रही है, लेकिन सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार पुराने नोटों के सौदागरों द्वारा इस करेंसी को नेपाल के रास्ते आरबीआई (रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया) तक पहुंचाकर मोटा मुनाफा कमाना था। केवल हिसार में इस तरह बंद हो चुके नोट पकड़े जाना इस बात की ओर भी इशारा करता है कि इस तरह का खेल देशभर के अन्य इलाकों में भी खेला जा रहा होगा।
8 नवंबर 2016 नोटबंदी के बाद से ही पुराने नोटों को बदलने का खुफिया कारोबार शुरू हो गया और इस गोरखधंधे को अंजाम देने वाले नोटों के सौदागर नए तरीके से नोटों को ठिकाने लगाने के तरीके खोजने लगे। इस बीच नेपाल द्वारा बंद हो चुके 500-1000 के भारतीय नोट नई करेंसी में बदलवाने के प्रयास शुरू हो गए, जिससे करेंसी सौदागरों को नया रास्ता मिल गया। हिसार में पकड़ी गई करीब डेढ़ करोड़ की करेंसी मात्र साढ़े 7 लाख रुपये में खरीदी गई, जिससे साबित होता है कि नोटों के सौदागर देश की अर्थव्यवस्था को चूना लगाते हुए मोटा मुनाफा कमाने की जुगत में हैं। नोटबंदी के बाद देशभर में अनेक स्थानों पर पुराने 500-1000 के नोट पकड़े जाने के अनेक मामले सामने आ चुके हैं। ऐसे में पुरानी करेंसी का यह खेल अरबों-खरबों में हो सकता है।
नेपाल के प्रधानमंत्री लगा चुके नोट बदलने की गुहार
नेपाल के रास्ते 500-1000 के नोटों को आरबीआई तक पहुंचाने का दावा इसलिए पुख्ता होता है, क्योंकि नवंबर 2016 में नोटबंदी के बाद से ही नेपाल के तत्कालीन प्रधानमंत्री पुष्प कमल दहल प्रचंड कई बार प्रधानमंत्री मोदी से पुराने नोटों को नई भारतीय मुद्रा में बदलने में मदद के प्रबंध का आग्रह कर चुके थे। उसके बाद वर्तमान प्रधानमंत्री केपी शर्मा ओली इसी वर्ष अप्रैल माह में अपनी पत्नी के साथ तीन दिवसीय भारतीय दौरे पर आए तो उन्होंने भी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से नोट बदलने का आग्रह किया था।
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आरबीआई कर चुकी 99.30 प्रतिशत नोट वापसी का दावा
आरबीआई ने 30 अगस्त 2018 को मीडिया को जानकारी दी थी कि नोटबंदी के बाद से अब तक 500-1000 के बंद किए 99.30 प्रतिशत नोट वापस आ चुके हैं। आरबीआई के अनुसार नोटबंदी के कुल नोटों में से 10 हजार 720 करोड़ रुपये के नोट ही जमा होने रह गए हैं।
नोटों के सौदागरों को क्यों है नेपाल से उम्मीद
बंद हो चुकी भारतीय करेंसी के 500-1000 के नोटों के सौदागरों को नेपाल के द्वारा अपने नोट बदलकर मोटा मुनाफा कमाने की उम्मीद है। इसका कारण यह है कि भारत के अलावा भारतीय करेंसी का सबसे अधिक प्रयोग करने वाला देश नेपाल ही है। नेपाल के प्रधानमंत्रियों द्वारा 9.5 अरब के 500-1000 के नोट नेपाल में प्रचलन में होने की बात स्वीकारी गई है। देश के सीमावर्ती तराई क्षेत्र में भारत के साथ व्यापार और अन्य वाणिज्यिक लेन-देन में नेपाली रुपये की तुलना में भारतीय मुद्रा का कहीं अधिक प्रयोग होता है। नेपाल के महाकाली जोन में चंदानी और दोधारा वीडीसी में लोग लगभग 95 प्रतिशत वित्तीय लेन-देन भारतीय मुद्रा में करते हैं। नेपाल में कुल मौद्रिक लेन-देन का 5वां हिस्सा भारतीय मुद्रा में होता है।
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8 नवंबर 2016 नोटबंदी के बाद से ही पुराने नोटों को बदलने का खुफिया कारोबार शुरू हो गया और इस गोरखधंधे को अंजाम देने वाले नोटों के सौदागर नए तरीके से नोटों को ठिकाने लगाने के तरीके खोजने लगे। इस बीच नेपाल द्वारा बंद हो चुके 500-1000 के भारतीय नोट नई करेंसी में बदलवाने के प्रयास शुरू हो गए, जिससे करेंसी सौदागरों को नया रास्ता मिल गया। हिसार में पकड़ी गई करीब डेढ़ करोड़ की करेंसी मात्र साढ़े 7 लाख रुपये में खरीदी गई, जिससे साबित होता है कि नोटों के सौदागर देश की अर्थव्यवस्था को चूना लगाते हुए मोटा मुनाफा कमाने की जुगत में हैं। नोटबंदी के बाद देशभर में अनेक स्थानों पर पुराने 500-1000 के नोट पकड़े जाने के अनेक मामले सामने आ चुके हैं। ऐसे में पुरानी करेंसी का यह खेल अरबों-खरबों में हो सकता है।
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नेपाल के प्रधानमंत्री लगा चुके नोट बदलने की गुहार
नेपाल के रास्ते 500-1000 के नोटों को आरबीआई तक पहुंचाने का दावा इसलिए पुख्ता होता है, क्योंकि नवंबर 2016 में नोटबंदी के बाद से ही नेपाल के तत्कालीन प्रधानमंत्री पुष्प कमल दहल प्रचंड कई बार प्रधानमंत्री मोदी से पुराने नोटों को नई भारतीय मुद्रा में बदलने में मदद के प्रबंध का आग्रह कर चुके थे। उसके बाद वर्तमान प्रधानमंत्री केपी शर्मा ओली इसी वर्ष अप्रैल माह में अपनी पत्नी के साथ तीन दिवसीय भारतीय दौरे पर आए तो उन्होंने भी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से नोट बदलने का आग्रह किया था।
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आरबीआई कर चुकी 99.30 प्रतिशत नोट वापसी का दावा
आरबीआई ने 30 अगस्त 2018 को मीडिया को जानकारी दी थी कि नोटबंदी के बाद से अब तक 500-1000 के बंद किए 99.30 प्रतिशत नोट वापस आ चुके हैं। आरबीआई के अनुसार नोटबंदी के कुल नोटों में से 10 हजार 720 करोड़ रुपये के नोट ही जमा होने रह गए हैं।
नोटों के सौदागरों को क्यों है नेपाल से उम्मीद
बंद हो चुकी भारतीय करेंसी के 500-1000 के नोटों के सौदागरों को नेपाल के द्वारा अपने नोट बदलकर मोटा मुनाफा कमाने की उम्मीद है। इसका कारण यह है कि भारत के अलावा भारतीय करेंसी का सबसे अधिक प्रयोग करने वाला देश नेपाल ही है। नेपाल के प्रधानमंत्रियों द्वारा 9.5 अरब के 500-1000 के नोट नेपाल में प्रचलन में होने की बात स्वीकारी गई है। देश के सीमावर्ती तराई क्षेत्र में भारत के साथ व्यापार और अन्य वाणिज्यिक लेन-देन में नेपाली रुपये की तुलना में भारतीय मुद्रा का कहीं अधिक प्रयोग होता है। नेपाल के महाकाली जोन में चंदानी और दोधारा वीडीसी में लोग लगभग 95 प्रतिशत वित्तीय लेन-देन भारतीय मुद्रा में करते हैं। नेपाल में कुल मौद्रिक लेन-देन का 5वां हिस्सा भारतीय मुद्रा में होता है।