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रेलू राम पुनिया हत्याकांड: उम्रकैद की सजा काट रही बेटी और दामाद होंगे रिहा; 8 लोगों की हत्या का मामला

Tue, 09 Dec 2025 08:20 PM IST
शाहिल शर्मा अमर उजाला ब्यूरो, चंडीगढ़
अमर उजाला ब्यूरो, चंडीगढ़ Published by: शाहिल शर्मा Updated Tue, 09 Dec 2025 08:20 PM IST
सार

2004 में हिसार की अदालत ने संजीव और सोनिया को फांसी की सजा सुनाई, जिसे 2007 में सुप्रीम कोर्ट ने बरकरार रखा। बाद में 2014 में दया याचिका में देरी का हवाला देते हुए सुप्रीम कोर्ट ने सजा को आजीवन कारावास में बदल दिया था। 

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Convicts in Relu Ram Punia murder case to be released
पंजाब हरियाणा हाईकोर्ट - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

प्रदेश के चर्चित रेलू राम पुनिया हत्याकांड में उम्रकैद की सजा काट रहे पूर्व विधायक रेलू राम पूनिया की बेटी सोनिया और दामाद संजीव कुमार की समय पूर्व रिहाई की मांग पंजाब-हरियाणा हाई कोर्ट ने स्वीकार कर ली है। अगस्त 2001 में लितानी गांव के पास स्थित फार्म हाउस में पूर्व विधायक रेलू राम पूनिया (50), उनकी पत्नी कृष्णा देवी (41), बच्ची प्रियंका (14), सुनील (23), बहू शकुंतला (20), पोता लोकेश (4) और दो पोतियों शिवानी (2) तथा 45 दिन की प्रीति की हत्या कर दी गई थी।

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2004 में हिसार की अदालत ने संजीव और सोनिया को फांसी की सजा सुनाई, जिसे 2007 में सुप्रीम कोर्ट ने बरकरार रखा। बाद में 2014 में दया याचिका में देरी का हवाला देते हुए सुप्रीम कोर्ट ने सजा को आजीवन कारावास में बदल दिया। संजीव की ओर से दलील दी कि संजीव 20 साल से अधिक वास्तविक सज़ा काट चुका है, जबकि छूट आदि जोड़ने पर यह अवधि 25 वर्ष 9 माह से अधिक हो जाती है। सोनिया भी 28 वर्ष से अधिक सजा भुगत चुकी है। याचिका में कहा गया कि दोषी करार दिए जाने के समय लागू हरियाणा समय पूर्व नीति 2002 के तहत वे रिहाई के पात्र हैं।
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 सुप्रीम कोर्ट के कई व संविधान पीठ के फैसले का हवाला देते हुए कहा गया कि आखिरी सांस तक जेल जैसी सजा केवल संवैधानिक अदालत ही दे सकती है, कोई कार्यकारी कमेटी नहीं। याचिकाकर्ताओं ने 6 अगस्त 2024 के उस आदेश को चुनौती दी, जिसमें कहा गया था कि संजीव आख़िरी सांस तक जेल में रहेगा। दलील में कहा गया कि स्टेट लेवल कमेटी ने उनकी जेल आचरण रिपोर्ट, शिक्षा, सुधारात्मक गतिविधियों और पुनर्वास कार्यक्रमों पर विचार ही नहीं किया।

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