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60 एकड़ पार्क के रखरखाव के अनुभव की लगाई शर्त, प्रदेश में ऐसा कोई पार्क ही नहीं
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हिसार। हरियाणा शहरी विकास प्राधिकरण (एचएसवीपी) की एक शर्त टाउन पार्क के रखरखाव के टेंडर में बाधा बन गई है। टेंडर की शर्तों के निर्धारण को लेकर गठित कमेटी ने 60 एकड़ के पार्क के रखरखाव के अनुभव की शर्त लगा दी। वहीं अधिकारियों की मानें तो प्रदेश में 60 एकड़ में कोई पार्क ही नहीं है। नया टेंडर न लगने के कारण अधिकारियों ने पुराने टेंडर को ही आगे बढ़ा दिया है।
बता दें कि विभाग की तरफ से शहर के टाउन पार्क के रखरखाव को लेकर अधिकारियों ने टेंडर लगाया था। टेंडर लगाने को लेकर शर्तें एसई की तरफ से निर्धारित की गईं थीं। इस दौरान तीन एजेंसियों ने आवेदन किया था। मगर टेक्निकल बिड में तीन में दो एजेंसियों की बिड को शर्तें पूरी न करने के कारण रद्द कर दिया गया। फाइनेंशियल बिड में एक ही एजेंसी के रहने के कारण टेंडर को ही रद्द करना पड़ा था। इसके बाद अधिकारियों ने दोबारा से टेंडर लगाया था। यह टेंडर 25 जनवरी को खोला जाना था, लेकिन उसी दिन चीफ इंजीनियर ने पत्र जारी कर टेंडर खोलने पर रोक लगा दी थी। चीफ इंजीनियर ने टेंडर की शर्तें निर्धारित करने को एक कमेटी का गठन किया था। इस कमेटी में सर्कल रोहतक, गुरुग्राम व पंचकूला से एक-एक एक्सईएन को शामिल किया था। इस कमेटी को टेंडर की शर्तें तय कर अपनी रिपोर्ट चीफ इंजीनियर को देनी थी। इन शर्तों के आधार पर ही नया टेंडर लगाया जाना था।
इन कार्यों के किए थे टेंडर
कार्य लागत
हिसार के टाउन पार्क में होर्टिकल्चर कार्यों की देखरेख 9.93 लाख रुपये
सेक्टर-13 स्थित एचएसीवी कार्यालय के लिए ट्री गार्ड 36 हजार रुपये
भिवानी के बंसीलाल पार्क में होर्टिकल्चर कार्यों की देखरेख 4.32 लाख रुपये
सिरसा के सेक्टर 19पी-1 में होर्ट्रिकल्चर कार्यों की देखरेख 2 लाख रुपये
चौकीदारों के पुराने टेंडर को ही आगे बढ़ाया
पार्क की रखवाली के लिए तैनात चौकीदार के भी पुराने टेंडर को ही आगे कुछ समय के लिए बढ़ा दिया गया है। बता दें कि चौकीदार के टेंडर की समय सीमा पूरा हो चुकी थी और नया टेंडर भी नहीं हो पा रहा था, जिस कारण टाउन पार्क पर कोई चौकीदार तैनात नहीं था।
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वर्ष 2001 में बना था पार्क
एचएसवीपी ने यह पार्क वर्ष 2001 में बनाया था। इसे तैयार करने में करीब तीन साल का समय लगा था। यह पार्क 11 एकड़ जमीन पर बना हुआ है। सुबह-शाम इस पार्क में सैंकड़ों की संख्या में लोग सैर के लिए आते हैं।
कमेटी ने टेंडर की शर्तों में एक ऐसी शर्त जोड़ दी है, जो कोई एजेंसी पूरी ही नहीं कर सकती। कमेटी ने 60 एकड़ में बने पार्क के रखरखाव के अनुभव की शर्त लगाई है, जबकि प्रदेश में ऐसा कोई पार्क ही नहीं है। - भूपेंद्र सिंह, एक्सईएन, एचएसवीपी
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बता दें कि विभाग की तरफ से शहर के टाउन पार्क के रखरखाव को लेकर अधिकारियों ने टेंडर लगाया था। टेंडर लगाने को लेकर शर्तें एसई की तरफ से निर्धारित की गईं थीं। इस दौरान तीन एजेंसियों ने आवेदन किया था। मगर टेक्निकल बिड में तीन में दो एजेंसियों की बिड को शर्तें पूरी न करने के कारण रद्द कर दिया गया। फाइनेंशियल बिड में एक ही एजेंसी के रहने के कारण टेंडर को ही रद्द करना पड़ा था। इसके बाद अधिकारियों ने दोबारा से टेंडर लगाया था। यह टेंडर 25 जनवरी को खोला जाना था, लेकिन उसी दिन चीफ इंजीनियर ने पत्र जारी कर टेंडर खोलने पर रोक लगा दी थी। चीफ इंजीनियर ने टेंडर की शर्तें निर्धारित करने को एक कमेटी का गठन किया था। इस कमेटी में सर्कल रोहतक, गुरुग्राम व पंचकूला से एक-एक एक्सईएन को शामिल किया था। इस कमेटी को टेंडर की शर्तें तय कर अपनी रिपोर्ट चीफ इंजीनियर को देनी थी। इन शर्तों के आधार पर ही नया टेंडर लगाया जाना था।
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इन कार्यों के किए थे टेंडर
कार्य लागत
हिसार के टाउन पार्क में होर्टिकल्चर कार्यों की देखरेख 9.93 लाख रुपये
सेक्टर-13 स्थित एचएसीवी कार्यालय के लिए ट्री गार्ड 36 हजार रुपये
भिवानी के बंसीलाल पार्क में होर्टिकल्चर कार्यों की देखरेख 4.32 लाख रुपये
सिरसा के सेक्टर 19पी-1 में होर्ट्रिकल्चर कार्यों की देखरेख 2 लाख रुपये
चौकीदारों के पुराने टेंडर को ही आगे बढ़ाया
पार्क की रखवाली के लिए तैनात चौकीदार के भी पुराने टेंडर को ही आगे कुछ समय के लिए बढ़ा दिया गया है। बता दें कि चौकीदार के टेंडर की समय सीमा पूरा हो चुकी थी और नया टेंडर भी नहीं हो पा रहा था, जिस कारण टाउन पार्क पर कोई चौकीदार तैनात नहीं था।
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वर्ष 2001 में बना था पार्क
एचएसवीपी ने यह पार्क वर्ष 2001 में बनाया था। इसे तैयार करने में करीब तीन साल का समय लगा था। यह पार्क 11 एकड़ जमीन पर बना हुआ है। सुबह-शाम इस पार्क में सैंकड़ों की संख्या में लोग सैर के लिए आते हैं।
कमेटी ने टेंडर की शर्तों में एक ऐसी शर्त जोड़ दी है, जो कोई एजेंसी पूरी ही नहीं कर सकती। कमेटी ने 60 एकड़ में बने पार्क के रखरखाव के अनुभव की शर्त लगाई है, जबकि प्रदेश में ऐसा कोई पार्क ही नहीं है। - भूपेंद्र सिंह, एक्सईएन, एचएसवीपी