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Hisar News: स्वच्छता परीक्षा में निकाय मंत्री का शहर फिसड्डी, स्वच्छता सर्वेक्षण में 45.94 प्रतिशत अंक के साथ हिसार नगर निगम राष्ट्रीय स्तर पर 194वें पायदान पर

Amar Ujala Bureau अमर उजाला ब्यूरो
Updated Fri, 12 Jan 2024 12:01 AM IST
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Civic Minister's city lags in cleanliness test, Hisar Municipal Corporation ranks 194th at national level with 45.94 percent marks in cleanliness survey.
कैंप चौक पुल के पास फैली गंदगी। 
हिसार। स्वच्छता परीक्षा 2023 में निकाय मंत्री डॉ. कमल गुप्ता का शहर फिसड्डी रहा। परीक्षा में नगर निगम हिसार को सिर्फ 45.94 प्रतिशत अंक मिले। सर्वेक्षण के परिणाम पर नजर डालें तो राष्ट्रीय स्तर की रैंकिंग में नगर निगम 79 पायदान नीचे खिसका तो राज्य में सिर्फ एक पायदान की छलांग लगाई। निगम इस बार राष्ट्रीय स्तर पर 194वें (एक लाख से ज्यादा की आबादी वाले वर्ग में) और राज्य स्तर पर 7वें (नगर निगम की कैटेगरी में) स्थान पर रहा। हालांकि निगम को इस बार वाटर प्लस का दर्जा मिला है, लेकिन उससे रैंकिंग में कोई सुधार नहीं हुआ।
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बता दें कि वर्ष 2023 के स्वच्छता सर्वेक्षण में अलग-अलग कैटेगरी के मिलाकर कुल 9500 अंक थे। इस बार सर्वेक्षण में रिसाइकिल, रिड्यूज व रियूज पर जोर दिया गया था। कुल अंक 9500 में सर्विस लेवल प्रोग्रेस के लिए 4830, सर्टिफिकेशन के लिए 2500 और सिटीजन वॉइस के लिए 2170 अंक निर्धारित किए गए थे।
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शहर को पहली बार मिला वाटर प्लस का दर्जा

इस बार एक सकारात्मक बात यह रही कि निगम को वाटर प्लस का दर्जा मिला। इससे पहले शहर ओडीएफ प्लस प्लस की श्रेणी में था। प्रदेश में हिसार के अलावा करनाल नगर निगम को ही इस बार वाटर प्लस घोषित किया गया है। पिछले साल निगम ने इसके लिए आवेदन किया था, लेकिन वह मानकों पर खरा नहीं उतरा।
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9500 में से सिर्फ 4365.14 अंक मिले

सर्वेक्षण में नगर निगम को 45.94 प्रतिशत अंक ही मिले। इस बार सर्वेक्षण में कुल 9500 अंक थे, जिनमें से निगम को 4365.14 अंक मिले। हालांकि पिछले वर्ष निगम को सर्वेक्षण में 7500 में से 4020.07 अंक मिले थे।

कैटेगरी-कुल अंक-अंक मिले

एसएलपी- 4830-2027.69

सिटीजन वॉयस-2170-1212.46

सर्टिफिकेशन-2500-1125.00

नगर निगम का रिपोर्ट कार्ड

घरों से कचरे का उठान : 82 प्रतिशत

मौके पर ही कचरे का वर्गीकरण : 6 प्रतिशत

कचरे का निष्पादन : 37 प्रतिशत

कचरा स्थलों का सुधार : 56 प्रतिशत

रिहायशी एरिया में सफाई : 80 प्रतिशत

बाजारों में सफाई : 80 प्रतिशत

जल स्रोत की सफाई : 60 प्रतिशत

सार्वजनिक शौचालयों की सफाई : 80 प्रतिशत

इन कारणों से पिछड़ा शहर

- इस बार स्वच्छता सर्वेक्षण में मुख्य फोकस पुनर्चक्रण, दोबारा से उपयोग व घटाने पर था, लेकिन निगम ऐसी कोई व्यवस्था लागू नहीं कर सका।

- कचरे का निष्पादन इस सर्वेक्षण का मुख्य बिंदु है और निगम आज तक ठोस कचरा निष्पादन प्लांट नहीं लगा सका है।

- घरों से गीले व सूखे कचरे का अलग-अलग एकत्रित करने पर काफी जोर दिया जा रहा है, लेकिन यह व्यवस्था बनाने में अभी तक नाकाम साबित हुआ है।

- शहर में कचरा स्थलों पर व्यवस्था भी नहीं बन सकी है। हालात यह है कि इन जगहों पर कचरा फैला रहता है।

- निगम पुराने कचरे का भी पूरी तरह से निष्पादन करने में असफल रहा है।

शहर की सफाई प्रति माह खर्च हो रहे पौने तीन करोड़ रुपये

शहर की सफाई व्यवस्था पर हर माह करीब पौने तीन करोड़ रुपये खर्च किए जा रहे हैं, जिसमें निगम के कर्मचारियों का वेतन भी शामिल है। बावजूद इसके शहर की सफाई व्यवस्था के यह हालात है।

कार्य और खर्च का ब्योरा

वार्ड 1 से 10 में घराें से कचरा उठान के टेंडर का खर्च : 50 लाख रुपये

निगम की गाड़ियों के तेल का खर्च : 13 लाख रुपये

मुख्यालय से मिली रोड स्वीपिंग मशीन का खर्च : 4.70 लाख रुपये

शुलभ शौचालयों की सफाई का खर्च : 3 लाख रुपये

सफाई कर्मचारियों के वेतन पर खर्च : 2 करोड़ रुपये



अब तक स्वच्छता सर्वेक्षण में मिली रैंकिंग

वर्ष-देश में रैंकिंग-प्रदेश में रैंकिंग

2023-194वीं-7वीं

2022-115वीं-8वीं

2021 -165वीं- 5वीं

2020 -105वीं -छठी

2019 -173वीं- 7वीं

2018 -146वीं- 5वीं

2017 -291वीं- छठी



जिस समय शहर में स्वच्छता सर्वेक्षण हुआ, उस समय शहर में कचरा निष्पादन नहीं किया जा रहा था। इसके बाद निगम ने कचरा निष्पादन प्लांट लगाया है। अब वार्ड 1 से 10 में घरों से कचरे का उठान हो रहा है। वार्ड 11 से 20 के लिए भी टेंडर लगा रखा है। जल्द ही इन वार्डों में भी यह कार्य शुरू हो जाएगा। वार्ड 1 से 10 में सड़कों की सफाई के लिए कर्मचारियों का टेंडर लगाने पर भी विचार-विमर्श किया जा रहा है। उम्मीद है कि जल्द ही निगम को ठोस कचरा निष्पादन प्लांट के लिए भी जगह मिल जाएगी। हमने सफाई के लिए कुछ गाड़ियां भी खरीदी हैं। अगले सर्वेक्षण में इन सभी का फायदा निगम को मिलेगा और निगम की रैंकिंग में काफी सुधार भी आएगा। - प्रदीप दहिया, निगमायुक्त


शहर की सफाई में पहले से सुधार हुआ है। हमने सफाई को लेकर काम भी किया है। हो सकता है कि अन्य निकायों ने हमसे ज्यादा काम किया हो। हमारी रैंकिंग में गिरावट क्यों आई, इसकी समीक्षा की जाएगी। - डॉ. कमल गुप्ता, शहरी स्थानीय निकाय मंत्री


जिले की अन्य निकायों का ये रहा परिणाम

निकाय का नाम-राष्ट्रीय स्तर पर-राज्य स्तर पर

हांसी-3297वीं-54वीं
बरवाला-3410वीं-57वीं

उकलाना-3264वीं-52वीं

नारनौंद-3665वीं-62वीं
सिवानी-3229वीं-51वीं

आदमपुर-3864वीं-69वीं
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