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खतरनाक स्तर पर पहुंचा शहर का प्रदूषण, मास्क लगाकर बाहर निकले सांस रोगी

Tue, 29 Oct 2019 12:24 AM IST
Rohtak Bureau रोहतक ब्यूरो
Updated Tue, 29 Oct 2019 12:24 AM IST
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शहर में प्रदूषण खतरनाक स्तर पर पहुंच गया है। दिवाली पर हुई आतिशबाजी ने शहर की आबोहवा को और ज्यादा खराब कर दिया है। स्थिति यह है कि दिवाली की रात वायु गुणवत्ता सूचकांक (एक्यूआई) 390 पर पहुंच गया था। सोमवार सुबह इसमें मामूली गिरावट आई और यह 380 पर पहुंच गया। वहीं शहर पर धुएं की चादर छाई हुई है, जो सुबह व शाम के वक्त और ज्यादा गहरी हो जाती है। धुएं की इस सफेद चादर से सिर्फ तेज हवा या बारिश से छुटकारा दिला सकते हैं, जबकि मौसम वैज्ञानिकों का कहना है कि अभी बारिश के कोई आसार नहीं है। बता दें कि इन दिनों किसान पराली जला रहे हैं, जिससे काफी मात्रा में हानिकारक गैसें पैदा होती हैं। इसके अलावा वाहनों, फैक्ट्रियों व कूड़ा जलाने से भी हानिकारक गैसों का उत्सर्जन होता है। इन दिनों में वातावरण में नमी मौजूद है और तापमान भी कम है। इस वजह से यह गैसें व धूल के कण वातावरण में ऊपर नहीं जा पाते और नीचे ही रह जाते हैं, जिससे वातावरण में धुएं की चादर बन जाती है।
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आतिशबाजी ने किया हवा को दूषित
दिवाली पर शहरवासियों ने जमकर आतिशबाजी की। हालांकि आतिशबाजी को लेकर प्रशासन की तरफ से धारा-144 भी लागू की गई थी। इसके तहत हाईकोर्ट के आदेशानुसार ही आतिशबाजी की जा सकती है। हाईकोर्ट के आदेश के अनुसार रात 10 बजे के आतिशबाजी नहीं की जा सकती, जबकि शहर में देर रात तक लोग पटाखे बजाते रहे।
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दिन भर छाई रही धुएं की चादर
पिछले चार दिनों से शहर पर धुएं की छाई रहती है। सुबह व शाम के समय इस धुएं की चादर को साफ तौर पर देखा जा सकता है। तेज हवा व बारिश ही धुएं की इस चादर से राहत दिला सकती है। तेज हवा इस धूल व धुएं के कणों को अपने साथ उड़ाकर ले जाएगी और बारिश इसे जमीन पर गिरा देगी।
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एक्यूआई में लगातार हो रही बढ़ोतरी
तिथि- वायु गुणवत्ता सूचकांक
25 अक्तूबर-333
26 अक्तूबर-328
27 अक्तूबर-390
28 अक्तूबर-380
वायु गुणवत्ता सूचकांक
0-50-अच्छा
51-100-संतोषजनक
101-200-सामान्य
201-300-खराब
301-400-बहुत खराब
401-500-खतरनाक
अस्थमा के मरीज कम से कम निकले बाहर
नागरिक अस्पताल के चिकित्सक डॉ. सुरेंद्र बिश्नोई के मुताबिक क्रॉनिक रेस्पायरेटरी डिसीज के लिए वायु प्रदूषण बड़ी वजह है। एलर्जी के कारण जुकाम, खांसी, अस्थमा, फेफड़ों का कैंसर जैसी बीमारियों के लिए पीएम-10 जिम्मेदार होते हैं। सिरदर्द और थकावट महसूस होना, कार्य क्षमता में कमी महसूस होना, बालों का झड़ना प्रदूषित वायु वाले वातावरण का ही असर होता है। डॉ. बिश्नोई के अनुसार इस तरह के वातावरण में अस्थमा के मरीजों को कम से कम बाहर निकलना चाहिए और बाहर निकलने के दौरान मास्क का इस्तेमाल करना चाहिए।
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