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Hisar News: हिसार में सिटी बस सेवा बंद, आरटीए ने परमिट बताया गैर कानूनी
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नगर निगम कार्यालय के सामने खड़ी सिटी बसें।
हिसार। शहर में संचालित सिटी बस सेवा बंद हो गई है। आरटीए ने सिटी बसों के परमिट को गैर कानूनी करार दिया है। साथ ही नवीनीकरण करने से मना कर दिया। उधर, सिटी बस सेवा शुरू कराने को लेकर नगर निगम प्रशासन ने भी अपने हाथ खींच लिए और बस मालिकों के साथ किया समझौता रद्द कर दिया है। हालांकि आरटीए का तर्क है कि नियमों को ताक पर रखकर बसों के रूट में बदलाव किया गया, जो पॉलिसी के खिलाफ है, जबकि निगम प्रशासन का कहना है कि परमिट की शर्त पर ही बस मालिकों के साथ समझौता किया गया था। चूंकि इनके पास परमिट नहीं है तो समझौते को रद्द कर दिया गया।
उधर, सिटी बस मालिकों ने अपनी बसों को नगर निगम कार्यालय के सामने खड़ा कर विरोध जताया। सिटी बस मालिकों की मानें तो 4 बसों का परमिट रिन्यू नहीं किया गया है, लेकिन आरटीए अधिकारियों का कहना है कि सिर्फ 2 बसों का परमिट रद्द किया है। वहीं निकाय मंत्री डॉ. कमल गुप्ता ने बस मालिकों को आश्वासन दिया कि उनकी बसों को चलवाया जाएगा। बता दें कि नगर निगम की तरफ से वर्ष 2019 में सिटी बस सेवा शुरू की गई थी। अभी आधार अस्पताल, कैंट, आजाद नगर, रायपुर रूट पर ये बसें चलाई जा रही थीं। इन बसों का किराया 5 व 10 रुपये है।
बस मालिक बोले-निगम के कहने पर लाखों खर्च कर तैयार करवाई थीं बसें
सिटी बस मालिक राजबीर, जयबीर, सावंत, सतबीर, सोहन ने बताया कि शुरुआत में निगम ने 4 साल के लिए टेंडर अलॉट किया था। इस टेंडर के लिए उन्होंने प्रत्येक बस पर 20 से 25 लाख रुपये खर्च कर लो फ्लोर बस तैयार करवाई थी। शुरुआत में उनसे निगम 11 रुपये से लेकर 500 रुपये प्रतिदिन के हिसाब से फीस ले रहा था। 4 साल पूरे होने के बाद अब निगम की तरफ से दोबारा से टेंडर लगाया गया। इस बार निगम ने फीस बढ़ाकर 500 से 3100 रुपये कर दी। इसके बाद उनके साथ एग्रीमेंट भी कर लिया। मगर जब वह आरटीओ में परमिट लेने गए तो उन्होंने परमिट देने से इन्कार कर दिया। आरटीओ का कहना है कि यह बसें स्कीम 2004 के तहत चलाई जा रही हैं, जिसमें हिसार शहर नहीं आता। इस कारण से इन बसों को परमिट नहीं दिया जा सकता।
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यूं हुआ गड़बड़झाला : योजना सिर्फ गुरुग्राम, फरीदाबाद के लिए थी
दरअसल सरकार ने सिटी बस सर्विस स्कीम 2004 लागू की थी, जो सिर्फ गुरुग्राम व फरीदाबाद के लिए थी। इस स्कीम को लागू करवाने की जिम्मेदारी भी परिवहन विभाग को दी गई थी। वर्ष 2019 में हिसार में ऑटो चालकों ने हड़ताल कर दी थी। इसी बीच नगर निगम ने सिटी बस सेवा शुरू करने के लिए मुख्यालय को पत्र लिखा। मुख्यालय ने इसकी अनुमति दे दी। इसके आधार पर नगर निगम ने नॉमिनेशन के आधार पर बस मालिकों के साथ चार साल का समझौता कर लिया।
उधर, आरटीए ने नगर निगम के इस समझौते (एलओआई) के आधार पर इन्हें परमिट जारी कर दिए। इसके बाद से बस संचालक परमिट को रिन्यू करवाते रहे। पिछले वर्ष समझौते के चार साल पूर हो गए। मगर इस बार निगम ने बसों के लिए बोली करवाई और ज्यादा बोली देने वालों के साथ समझौता कर लिया। इस प्रक्रिया में कुछ नए बस संचालक आए तो कुछ पुराने वाले ही रहे। इसके बाद बस संचालक परमिट रिन्यू करवाने व नया परमिट लेने गए तो आरटीए ने उन्हें मना कर दिया।
पुराने रूट पर पुराने परमिट को रिन्यू में नहीं कोई आपत्ति : आरटीए
आरटीए इंस्पेक्टर मंदीप ने बताया कि सिटी बस सर्विस के परमिट को रिन्यू करने में कोई आपत्ति नहीं है। पहले भी दो बसों के परमिट रिन्यू किए जा चुके हैं। मगर सिटी बस सर्विस 2004 के तहत रूट को बदला नहीं जा सकता। इस बार नियमों को ताक पर रखकर रूट को बदला गया है और इन रूटों पर नए परमिट मांगे जा रहे हैं। इस बार निगम ने बोली करवाकर रूट में बदलाव कर दिया है, जो नियमों के अनुसार गलत है। उन्हें पुराने परमिट को पुराने रूट पर रिन्यू करने में कोई आपत्ति नहीं है।
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उधर, सिटी बस मालिकों ने अपनी बसों को नगर निगम कार्यालय के सामने खड़ा कर विरोध जताया। सिटी बस मालिकों की मानें तो 4 बसों का परमिट रिन्यू नहीं किया गया है, लेकिन आरटीए अधिकारियों का कहना है कि सिर्फ 2 बसों का परमिट रद्द किया है। वहीं निकाय मंत्री डॉ. कमल गुप्ता ने बस मालिकों को आश्वासन दिया कि उनकी बसों को चलवाया जाएगा। बता दें कि नगर निगम की तरफ से वर्ष 2019 में सिटी बस सेवा शुरू की गई थी। अभी आधार अस्पताल, कैंट, आजाद नगर, रायपुर रूट पर ये बसें चलाई जा रही थीं। इन बसों का किराया 5 व 10 रुपये है।
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बस मालिक बोले-निगम के कहने पर लाखों खर्च कर तैयार करवाई थीं बसें
सिटी बस मालिक राजबीर, जयबीर, सावंत, सतबीर, सोहन ने बताया कि शुरुआत में निगम ने 4 साल के लिए टेंडर अलॉट किया था। इस टेंडर के लिए उन्होंने प्रत्येक बस पर 20 से 25 लाख रुपये खर्च कर लो फ्लोर बस तैयार करवाई थी। शुरुआत में उनसे निगम 11 रुपये से लेकर 500 रुपये प्रतिदिन के हिसाब से फीस ले रहा था। 4 साल पूरे होने के बाद अब निगम की तरफ से दोबारा से टेंडर लगाया गया। इस बार निगम ने फीस बढ़ाकर 500 से 3100 रुपये कर दी। इसके बाद उनके साथ एग्रीमेंट भी कर लिया। मगर जब वह आरटीओ में परमिट लेने गए तो उन्होंने परमिट देने से इन्कार कर दिया। आरटीओ का कहना है कि यह बसें स्कीम 2004 के तहत चलाई जा रही हैं, जिसमें हिसार शहर नहीं आता। इस कारण से इन बसों को परमिट नहीं दिया जा सकता।
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यूं हुआ गड़बड़झाला : योजना सिर्फ गुरुग्राम, फरीदाबाद के लिए थी
दरअसल सरकार ने सिटी बस सर्विस स्कीम 2004 लागू की थी, जो सिर्फ गुरुग्राम व फरीदाबाद के लिए थी। इस स्कीम को लागू करवाने की जिम्मेदारी भी परिवहन विभाग को दी गई थी। वर्ष 2019 में हिसार में ऑटो चालकों ने हड़ताल कर दी थी। इसी बीच नगर निगम ने सिटी बस सेवा शुरू करने के लिए मुख्यालय को पत्र लिखा। मुख्यालय ने इसकी अनुमति दे दी। इसके आधार पर नगर निगम ने नॉमिनेशन के आधार पर बस मालिकों के साथ चार साल का समझौता कर लिया।
उधर, आरटीए ने नगर निगम के इस समझौते (एलओआई) के आधार पर इन्हें परमिट जारी कर दिए। इसके बाद से बस संचालक परमिट को रिन्यू करवाते रहे। पिछले वर्ष समझौते के चार साल पूर हो गए। मगर इस बार निगम ने बसों के लिए बोली करवाई और ज्यादा बोली देने वालों के साथ समझौता कर लिया। इस प्रक्रिया में कुछ नए बस संचालक आए तो कुछ पुराने वाले ही रहे। इसके बाद बस संचालक परमिट रिन्यू करवाने व नया परमिट लेने गए तो आरटीए ने उन्हें मना कर दिया।
पुराने रूट पर पुराने परमिट को रिन्यू में नहीं कोई आपत्ति : आरटीए
आरटीए इंस्पेक्टर मंदीप ने बताया कि सिटी बस सर्विस के परमिट को रिन्यू करने में कोई आपत्ति नहीं है। पहले भी दो बसों के परमिट रिन्यू किए जा चुके हैं। मगर सिटी बस सर्विस 2004 के तहत रूट को बदला नहीं जा सकता। इस बार नियमों को ताक पर रखकर रूट को बदला गया है और इन रूटों पर नए परमिट मांगे जा रहे हैं। इस बार निगम ने बोली करवाकर रूट में बदलाव कर दिया है, जो नियमों के अनुसार गलत है। उन्हें पुराने परमिट को पुराने रूट पर रिन्यू करने में कोई आपत्ति नहीं है।