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Hisar News: किताबी ज्ञान के साथ बच्चों को पढ़ाया जा रहा एआई का पाठ
Wed, 05 Aug 2026 01:11 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, हिसार
संवाद न्यूज एजेंसी, हिसार
Updated Wed, 05 Aug 2026 01:11 AM IST
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हांसी। जिले के सरकारी विद्यालयों के विद्यार्थियों को कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) का प्रशिक्षण दिया जा रहा है। डीसी राहुल नरवाल की पहल पर पांचवीं से आठवीं कक्षा तक के छात्रों को यह व्यावहारिक ज्ञान दिया जा रहा है। इसका उद्देश्य उन्हें भविष्य की तकनीक से परिचित कराना और डिजिटल युग के लिए तैयार करना है।
प्रशिक्षण के दौरान अध्यापक छात्रों को एआई आधारित तकनीकों का सरल ज्ञान दे रहे हैं। विद्यार्थी डिजिटल चित्र बना रहे हैं और रचनात्मक लेखन सीख रहे हैं। वह आधुनिक तकनीक का सुरक्षित और जिम्मेदारीपूर्ण उपयोग भी समझ रहे हैं।
डीसी राहुल नरवाल ने कहा कि एआई जैसी तकनीकें भविष्य की आवश्यकता हैं। उन्होंने कहा कि प्रारंभिक कक्षाओं से ही आधुनिक तकनीकों का ज्ञान बच्चों को किसी भी क्षेत्र में पीछे नहीं रहने देगा। जिला प्रशासन का लक्ष्य सरकारी विद्यालयों के छात्रों को भी समान अवसर उपलब्ध कराना है।
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डीसी ने बताया कि कृत्रिम बुद्धिमत्ता शिक्षा, स्वास्थ्य, कृषि और उद्योग सहित कई क्षेत्रों में बदलाव का आधार बन रही है इसलिए छात्रों को इसकी सही जानकारी देना आवश्यक है।
यह प्रशिक्षण केवल तकनीक सिखाने तक सीमित नहीं है। इससे छात्रों में तार्किक सोच, नवाचार और समस्या समाधान जैसे गुणों का विकास हो रहा है। यह पहल नई शिक्षा नीति के उद्देश्यों को भी मजबूत कर रही है।
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प्रशिक्षण के दौरान अध्यापक छात्रों को एआई आधारित तकनीकों का सरल ज्ञान दे रहे हैं। विद्यार्थी डिजिटल चित्र बना रहे हैं और रचनात्मक लेखन सीख रहे हैं। वह आधुनिक तकनीक का सुरक्षित और जिम्मेदारीपूर्ण उपयोग भी समझ रहे हैं।
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डीसी राहुल नरवाल ने कहा कि एआई जैसी तकनीकें भविष्य की आवश्यकता हैं। उन्होंने कहा कि प्रारंभिक कक्षाओं से ही आधुनिक तकनीकों का ज्ञान बच्चों को किसी भी क्षेत्र में पीछे नहीं रहने देगा। जिला प्रशासन का लक्ष्य सरकारी विद्यालयों के छात्रों को भी समान अवसर उपलब्ध कराना है।
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डीसी ने बताया कि कृत्रिम बुद्धिमत्ता शिक्षा, स्वास्थ्य, कृषि और उद्योग सहित कई क्षेत्रों में बदलाव का आधार बन रही है इसलिए छात्रों को इसकी सही जानकारी देना आवश्यक है।
यह प्रशिक्षण केवल तकनीक सिखाने तक सीमित नहीं है। इससे छात्रों में तार्किक सोच, नवाचार और समस्या समाधान जैसे गुणों का विकास हो रहा है। यह पहल नई शिक्षा नीति के उद्देश्यों को भी मजबूत कर रही है।