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भाटोल जाटान व नारनौंद के किसानों ने खड़ी फसल पर चलाया ट्रैक्टर
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गेहूं की खड़ी फसल को जोतते किसान व उनको रोकते ग्रामीण। संवाद
- फोटो : Hisar
कृषि कानूनों के विरोध में शनिवार को बास क्षेत्र के गांव भाटोल जाटान व नारनौंद में किसानों ने खेतों में लहलहाती गेहूं की फसल पर ट्रैक्टर चलाकर नष्ट कर दिया। ग्रामीणों ने खेतों में जाकर किसानों को फसल जोतने से रोका। किसानों ने कहा कि जब तक सरकार उनकी मांगे नहीं मान लेती वो पीछे नहीं हटेंगे।
भाटोल जाटान के किसान परमजीत ने अपनी ढाई एकड़ में गेहूं की पूरी फसल को जोतकर नष्ट कर दिया, जब ग्रामीणों को इसकी सूचना मिली तो वे मौके पर पहुंचे, लेकिन तब तक किसान अपनी पूरी फसल को नष्ट कर चुका था। वहीं किसान ने इसके इलावा 7 एकड़ जमीन को ठेके पर लाया हुआ है। उसके बाद वह उनको भी जोतने के लिए चल पड़ा, लेकिन उस समय तक ग्रामीणों ने उसे समझाया तो काफी देर बाद किसान उनकी बातों पर सहमत हुआ और अपनी सात एकड़ गेहूं की फसल को और जोतने से रोका।
वहीं नारनौंद निवासी किसान पवन के पास पांच एकड़ जमीन है और वह इसी जमीन से अपने घर का गुजर बसर करता है। शनिवार को किसान ने कृषि कानूनों को वापस नहीं लेने से आहत होकर अपनी खड़ी गेंहू की एक एकड़ फसल को जोतकर नष्ट कर दिया और दूसरे एकड़ को भी जोतना शुरू कर दिया। सूचना मिलते ही सतरोल खाप के प्रधान व अन्य सदस्यों को पता लगा तो उन्होंने मौके पर पहुंचकर किसान को रोका। किसान ने कहा कि वह अपनी फसलों को न तो ऑनलाइन करवाएंगे और न ही अनाजमंडी में बेचने जाएंगे। गौरतलब है कि 24 फरवरी को भी पूर्व वित्तमंत्री कैप्टन अभिमन्यु के गांव के किसान ने अपनी एक एकड़ जमीन पर ट्रैक्टर चलाकर गेहूं की फसल को नष्ट कर दिया था। उसको भी ग्रामीणों ने पहुंचकर बड़ी मुश्किल से रोका था।
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सतरोल खाप के प्रधान रामनिवास लोहान ने बताया कि किसानों में कृषि कानूनों को लेकर रोष बढ़ता जा रहा है। सरकार को किसानों की बातों को सुनना चाहिए। मैं किसानों से अपील करता हूं कि वे खेत मे ट्रैक्टर से फसलों को नष्ट न करें, बल्कि इन फसलों को गरीबों में बांट दें और कुछ फसल आंदोलन में दे ताकि आंदोलन भी सही ढंग से चल सके।
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भाटोल जाटान के किसान परमजीत ने अपनी ढाई एकड़ में गेहूं की पूरी फसल को जोतकर नष्ट कर दिया, जब ग्रामीणों को इसकी सूचना मिली तो वे मौके पर पहुंचे, लेकिन तब तक किसान अपनी पूरी फसल को नष्ट कर चुका था। वहीं किसान ने इसके इलावा 7 एकड़ जमीन को ठेके पर लाया हुआ है। उसके बाद वह उनको भी जोतने के लिए चल पड़ा, लेकिन उस समय तक ग्रामीणों ने उसे समझाया तो काफी देर बाद किसान उनकी बातों पर सहमत हुआ और अपनी सात एकड़ गेहूं की फसल को और जोतने से रोका।
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वहीं नारनौंद निवासी किसान पवन के पास पांच एकड़ जमीन है और वह इसी जमीन से अपने घर का गुजर बसर करता है। शनिवार को किसान ने कृषि कानूनों को वापस नहीं लेने से आहत होकर अपनी खड़ी गेंहू की एक एकड़ फसल को जोतकर नष्ट कर दिया और दूसरे एकड़ को भी जोतना शुरू कर दिया। सूचना मिलते ही सतरोल खाप के प्रधान व अन्य सदस्यों को पता लगा तो उन्होंने मौके पर पहुंचकर किसान को रोका। किसान ने कहा कि वह अपनी फसलों को न तो ऑनलाइन करवाएंगे और न ही अनाजमंडी में बेचने जाएंगे। गौरतलब है कि 24 फरवरी को भी पूर्व वित्तमंत्री कैप्टन अभिमन्यु के गांव के किसान ने अपनी एक एकड़ जमीन पर ट्रैक्टर चलाकर गेहूं की फसल को नष्ट कर दिया था। उसको भी ग्रामीणों ने पहुंचकर बड़ी मुश्किल से रोका था।
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सतरोल खाप के प्रधान रामनिवास लोहान ने बताया कि किसानों में कृषि कानूनों को लेकर रोष बढ़ता जा रहा है। सरकार को किसानों की बातों को सुनना चाहिए। मैं किसानों से अपील करता हूं कि वे खेत मे ट्रैक्टर से फसलों को नष्ट न करें, बल्कि इन फसलों को गरीबों में बांट दें और कुछ फसल आंदोलन में दे ताकि आंदोलन भी सही ढंग से चल सके।