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Hisar News: सावधान....लालच के लोभ में खाते न खाली कर दे साइबर ठग, 9 दिनों में 28 लोग बने ठगी का शिकार
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प्रतीकात्मक फोटो
हिसार। साइबर अपराध का जाल फैलता जा रहा है। पुलिस डाल-डाल है तो साइबर ठग पात-पात हैं। नित नए तरीके निकालकर न केवल भोले-भाले लोगों को बल्कि उच्च शिक्षितों, सेवानिवृत्त सैनिकों, बैंक अधिकारियों तक को झांसे में लेकर उनके खाते खाली कर रहे हैं। पिछले 9 दिनों में साइबर सेल थाने में आर्थिक धोखाधड़ी की 28 एफआईआर दर्ज हुईं हैं। हालांकि बीते दो माह में पुलिस ने तीन मामलों का खुलासा कर अपराधियों को पकड़ा भी है। पुलिस का कहना है कि ठगी का पता चलते ही तत्काल सूचना देने पर अपराधियों तक पहुंचने में पुलिस का काम काफी आसान हो जाता है। लेकिन लोग संकोचवश पुलिस तक नहीं आना चाहते।
साइबर ठगी के जो नए ट्रेंड सामने आए हैं, उनमें ट्रेडिंग में मोटा मुनाफा, दुष्कर्म का केस, विदेश में बेटे को पुलिस ने पकड़ा और जान-पहचान बता कर ठगी का शिकार बनाने प्रमुख हैं। साइबर ठगों के निशाने पर खासकर बुजुर्ग और महिलाएं होते हैं। किसी न किसी तरह का लालच या भय दिखाकर उन्हें आसानी से अपने जाल में फांस लेते हैं।
पुलिस का कहना है कि समय सूचना न मिलने के अलावा अपराधी को पकड़ने के लिए जाने पर दूसरे राज्यों की पुलिस का सहयोग न मिलना भी बड़ी समस्या है। इससे अपराधी पुलिस की गिरफ्त से दूर निकल जाते हैं। पुलिस ने दो माह में तीन वारदात को खुलासा किया है, जिनमें पकड़े गए सभी आरोपी राजस्थान के हैं।
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बैंक अकाउंट से ट्रैस होते हैं ठग
साइबर थाना पुलिस ठगी करने वाले आरोपियों को पकड़ने के लिए उनके द्वारा भेजे गए खाता नंबरों की जांच करती है। इसके बाद कड़ियों को जोड़ा जाता है। कई बार खाते भी फर्जी पाए जाते हैं। इसके अलावा आरोपियों ट्रैस करने के बाद उन्हें पकड़ने के लिए जाते हैं तो कई बार स्थानीय पुलिस का सहयोग नहीं मिलता। कई बार वहां के लोग भी आरोपियों को भगाने में उनकी मदद करते हैं। ज्यादातर मामलों में राजस्थान, मध्यप्रदेश आदि राज्यों के आरोपी पकड़े गए हैं।
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हेल्पलाइन नंबर 1930 पर करें फोन
साइबर ठगी का शिकार होने पर पुलिस हेल्पलाइन नंबर 1930 पर 24 घंटे के अंदर-अदर कॉल करें। इसके अलावा www.cybercrime.gov.in पर शिकायत की जा सकती है। ऐसा करने से जिन खातों में रुपये भेजे गए हैं, उनको तत्काल सीज करवाया जा सकता है। ताकि इनसे लेन-देन नहीं हो। देरी होने पर ठग रुपयों के आगे से आगे अन्य खातों में भेज देते हैं। इससे रिकवरी मुश्किल हो सकती है।
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ऐसे करते हैं ठगी
- साइबर अपराधी सोशल मीडिया पर लिंक भेज कर टेलीग्राम से जोड़ते है। इसके बाद ट्रेडिंग में मोटा मुनाफा देने की बात कह खातों में रुपये डलवाए जाते हैं। शुरुआत में साइबर अपराधी रुपये भेजते हैं। जब व्यक्ति उनके जाल में फंस जाता है तो ठगी करते हैं।
- साइबर अपराधी कॉल कर लोगों को विदेश में रहने वाले बेटे को पुलिस द्वारा पकड़ने का डर दिखाते हैं। इसके बाद रुपये ऐंठे जाते हैं।
- साइबर अपराधी पुलिस, सीआईए व सीबीआई के फर्जी अधिकारी बनकर दुष्कर्म का केस दर्ज होने की बात कह कर लोगों को डरा कर ठगी कर रहे हैं।
- पहले कॉल कर फिर जान-पहचान निकाल कर लोगों से ठगी की जा रही हैं।
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इस साल साइबर थाने में दर्ज केस
माह एफआईआर
जनवरी 3
फरवरी 9
मार्च 9
अप्रैल 10
मई 6
जून 7
जुलाई 8
अगस्त 11
सितंबर(अब तक) 25
.....................................
पुलिस ने सुलझाईं ये वारदात
केस 1
साइबर थाना पुलिस ने टेलीग्राम पर टास्क पूरा करने के नाम पर 11.33 लाख की ठगी के मामले में तीन आरोपियों रोहट, पाली राजस्थान निवासी अर्जुन, अमजीत और नीम का थाना राजस्थान निवासी संजय उर्फ कार्तिक को गिरफ्तार किया था। जाच में सामने आया था कि ये आरोपी कमीशन पर काम करते हैं। इनमें संजय उर्फ कार्तिक ठगी गई राशि के लिए बैंक अकाउंट उपलब्ध करवाता था और अर्जुन व अमजीत उस राशि को यूएसडीटी में कन्वर्ट कर आगे भेजते थे। इस संबंध में साइबर थाना हिसार में 30 जून को शिकायत आई थी।
केस 2
साइबर थाना पुलिस ने व्हाट्सएप और टेलीग्राम पर लिंक भेजकर टास्क पूरा करने के नाम पर पैसे कमाने का लालच देकर 9.62 लाख की ठगी मामले में दो आरोपियों श्याम नगर, जयपुर निवासी पिंटू जायसवाल और कायमपुरा झुंझुनूं निवासी आरिफ अली उर्फ आलिया को गिरफ्तार किया था। साइबर पोर्टल पर 3 मार्च को इनके संबंध में शिकायत मिली थी।
केस 3
साइबर थाना पुलिस ने शेयर ट्रेडिंग में बड़े मुनाफे का लालच देकर 80 लाख रुपए की ठगी के मामले में दो आरोपियों कोटा निवासी राजकुमार उर्फ आयुष और शोभित उर्फ आशु को गिरफ्तार किया था। जांच में पता चला था कि शेयर ट्रेडिंग में मुनाफे के नाम पर हड़पी धनराशि में से 17 लाख रुपये राजकुमार के बैंक अकाउंट में गए। राजकुमार ने वह बैंक अकाउंट शोभित उर्फ आशु को दिया था। शोभित ने वही अकाउंट किसी अन्य व्यक्ति को 3 लाख रुपये में बेचा था।
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लालच समस्या की सबसे बड़ी जड़
साइबर ठगी के मामले लगातार बढ़ रहे हैं। लालच समस्या की लालच सबसे बड़ी जड़ है। पुलिस लोगों को जागरूक करने के लिए अपनी तरफ से पूरी कोशिश कर रही है। लोगों से आग्रह है कि सोशल मीडिया पर आने वाले किसी भी अनजान लिंक को न खोलें। किसी के साथ ठगी होती है तो वह हेल्पलाइन नंबर 1930 पर बिना संकोच तत्काल कॉल करें। कोई अनजान व्यक्ति किसी भी प्रकार का भय दिखाता है तो धैर्य से काम लें। पहले तस्दीक करवा लें इसके बाद ही संबंधित से आगे कोई बात करें। मोबाइल या फेसबुक अकाउंट पर आए किसी भी तरह के लिंक को नहीं खोलें। साइबर ठगी की वारदात से घर में मोबाइल का इस्तेमाल करने वालों को सजग करते रहें।
- दीपक सहारन, पुलिस अधीक्षक, हिसार
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साइबर ठगी के जो नए ट्रेंड सामने आए हैं, उनमें ट्रेडिंग में मोटा मुनाफा, दुष्कर्म का केस, विदेश में बेटे को पुलिस ने पकड़ा और जान-पहचान बता कर ठगी का शिकार बनाने प्रमुख हैं। साइबर ठगों के निशाने पर खासकर बुजुर्ग और महिलाएं होते हैं। किसी न किसी तरह का लालच या भय दिखाकर उन्हें आसानी से अपने जाल में फांस लेते हैं।
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पुलिस का कहना है कि समय सूचना न मिलने के अलावा अपराधी को पकड़ने के लिए जाने पर दूसरे राज्यों की पुलिस का सहयोग न मिलना भी बड़ी समस्या है। इससे अपराधी पुलिस की गिरफ्त से दूर निकल जाते हैं। पुलिस ने दो माह में तीन वारदात को खुलासा किया है, जिनमें पकड़े गए सभी आरोपी राजस्थान के हैं।
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बैंक अकाउंट से ट्रैस होते हैं ठग
साइबर थाना पुलिस ठगी करने वाले आरोपियों को पकड़ने के लिए उनके द्वारा भेजे गए खाता नंबरों की जांच करती है। इसके बाद कड़ियों को जोड़ा जाता है। कई बार खाते भी फर्जी पाए जाते हैं। इसके अलावा आरोपियों ट्रैस करने के बाद उन्हें पकड़ने के लिए जाते हैं तो कई बार स्थानीय पुलिस का सहयोग नहीं मिलता। कई बार वहां के लोग भी आरोपियों को भगाने में उनकी मदद करते हैं। ज्यादातर मामलों में राजस्थान, मध्यप्रदेश आदि राज्यों के आरोपी पकड़े गए हैं।
हेल्पलाइन नंबर 1930 पर करें फोन
साइबर ठगी का शिकार होने पर पुलिस हेल्पलाइन नंबर 1930 पर 24 घंटे के अंदर-अदर कॉल करें। इसके अलावा www.cybercrime.gov.in पर शिकायत की जा सकती है। ऐसा करने से जिन खातों में रुपये भेजे गए हैं, उनको तत्काल सीज करवाया जा सकता है। ताकि इनसे लेन-देन नहीं हो। देरी होने पर ठग रुपयों के आगे से आगे अन्य खातों में भेज देते हैं। इससे रिकवरी मुश्किल हो सकती है।
ऐसे करते हैं ठगी
- साइबर अपराधी सोशल मीडिया पर लिंक भेज कर टेलीग्राम से जोड़ते है। इसके बाद ट्रेडिंग में मोटा मुनाफा देने की बात कह खातों में रुपये डलवाए जाते हैं। शुरुआत में साइबर अपराधी रुपये भेजते हैं। जब व्यक्ति उनके जाल में फंस जाता है तो ठगी करते हैं।
- साइबर अपराधी कॉल कर लोगों को विदेश में रहने वाले बेटे को पुलिस द्वारा पकड़ने का डर दिखाते हैं। इसके बाद रुपये ऐंठे जाते हैं।
- साइबर अपराधी पुलिस, सीआईए व सीबीआई के फर्जी अधिकारी बनकर दुष्कर्म का केस दर्ज होने की बात कह कर लोगों को डरा कर ठगी कर रहे हैं।
- पहले कॉल कर फिर जान-पहचान निकाल कर लोगों से ठगी की जा रही हैं।
इस साल साइबर थाने में दर्ज केस
माह एफआईआर
जनवरी 3
फरवरी 9
मार्च 9
अप्रैल 10
मई 6
जून 7
जुलाई 8
अगस्त 11
सितंबर(अब तक) 25
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पुलिस ने सुलझाईं ये वारदात
केस 1
साइबर थाना पुलिस ने टेलीग्राम पर टास्क पूरा करने के नाम पर 11.33 लाख की ठगी के मामले में तीन आरोपियों रोहट, पाली राजस्थान निवासी अर्जुन, अमजीत और नीम का थाना राजस्थान निवासी संजय उर्फ कार्तिक को गिरफ्तार किया था। जाच में सामने आया था कि ये आरोपी कमीशन पर काम करते हैं। इनमें संजय उर्फ कार्तिक ठगी गई राशि के लिए बैंक अकाउंट उपलब्ध करवाता था और अर्जुन व अमजीत उस राशि को यूएसडीटी में कन्वर्ट कर आगे भेजते थे। इस संबंध में साइबर थाना हिसार में 30 जून को शिकायत आई थी।
केस 2
साइबर थाना पुलिस ने व्हाट्सएप और टेलीग्राम पर लिंक भेजकर टास्क पूरा करने के नाम पर पैसे कमाने का लालच देकर 9.62 लाख की ठगी मामले में दो आरोपियों श्याम नगर, जयपुर निवासी पिंटू जायसवाल और कायमपुरा झुंझुनूं निवासी आरिफ अली उर्फ आलिया को गिरफ्तार किया था। साइबर पोर्टल पर 3 मार्च को इनके संबंध में शिकायत मिली थी।
केस 3
साइबर थाना पुलिस ने शेयर ट्रेडिंग में बड़े मुनाफे का लालच देकर 80 लाख रुपए की ठगी के मामले में दो आरोपियों कोटा निवासी राजकुमार उर्फ आयुष और शोभित उर्फ आशु को गिरफ्तार किया था। जांच में पता चला था कि शेयर ट्रेडिंग में मुनाफे के नाम पर हड़पी धनराशि में से 17 लाख रुपये राजकुमार के बैंक अकाउंट में गए। राजकुमार ने वह बैंक अकाउंट शोभित उर्फ आशु को दिया था। शोभित ने वही अकाउंट किसी अन्य व्यक्ति को 3 लाख रुपये में बेचा था।
लालच समस्या की सबसे बड़ी जड़
साइबर ठगी के मामले लगातार बढ़ रहे हैं। लालच समस्या की लालच सबसे बड़ी जड़ है। पुलिस लोगों को जागरूक करने के लिए अपनी तरफ से पूरी कोशिश कर रही है। लोगों से आग्रह है कि सोशल मीडिया पर आने वाले किसी भी अनजान लिंक को न खोलें। किसी के साथ ठगी होती है तो वह हेल्पलाइन नंबर 1930 पर बिना संकोच तत्काल कॉल करें। कोई अनजान व्यक्ति किसी भी प्रकार का भय दिखाता है तो धैर्य से काम लें। पहले तस्दीक करवा लें इसके बाद ही संबंधित से आगे कोई बात करें। मोबाइल या फेसबुक अकाउंट पर आए किसी भी तरह के लिंक को नहीं खोलें। साइबर ठगी की वारदात से घर में मोबाइल का इस्तेमाल करने वालों को सजग करते रहें।
- दीपक सहारन, पुलिस अधीक्षक, हिसार