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Hisar News: आशा कार्यकर्ताओं ने लघु सचिवालय से मंत्री गंगवा के आवास तक किया पैदल मार्च, 26 हजार रुपये न्यूनतम वेतन की मांग

Amar Ujala Bureau अमर उजाला ब्यूरो
Updated Tue, 09 Dec 2025 01:08 AM IST
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ASHA workers marched on foot from the small secretariat to Minister Gangwa's residence, demanding a minimum wage of 26,000 rupees
पैदल मार्च निकालतीं आशा वर्कर्स।  
हिसार। आशा कार्यकर्ताओं ने सोमवार को 26 हजार रुपये न्यूनतम वेतन लागू करने और चारों लेबर कोड को रद्द करने की मांग की। इन मांगों के समर्थन में आशा कार्यकर्ताओं ने लघु सचिवालय से प्रदेश के पीडब्लूडी मंत्री रणबीर गंगवा के आवास तक पैदल मार्च निकाला। सिरसा और फतेहाबाद से भी बड़ी संख्या में आशा कार्यकर्ता प्रदर्शन में शामिल हुईं।
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प्रदर्शनकारी आशा कार्यकर्ताओं ने मंत्री के प्रतिनिधि को ज्ञापन सौंपा। सीटू प्रदेश महासचिव जय भगवान, सचिव मनोज कुमार, उप प्रधान सतवीर सिंह, जिला प्रधान सुरेश ने कहा कि आशा कार्यकर्ता 20 वर्षों से वालिंटियर के रूप में कार्य कर रही हैं और स्वास्थ्य व्यवस्था को मजबूत करने में उनकी भूमिका बेहद महत्वपूर्ण रही है।
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कोरोना महामारी के दौरान उनके उत्कृष्ट कार्य के लिए डब्ल्यूएचओ द्वारा ‘ग्लोबल हेल्थ लीडर’ पुरस्कार भी दिया गया। इसके बावजूद सरकार उनके मानदेय और सुविधाओं में सुधार नहीं कर रही है। पिछले 12 वर्षों से केंद्र सरकार ने इंसेंटिव आधारित कार्यों में कोई बढ़ोतरी नहीं की है। वहीं, बिना संसाधन उपलब्ध कराए आशाओं पर विभिन्न ऑनलाइन एप्स में काम का अत्याधिक दबाव डाला जा रहा है। इस मौके पर अनीता, शीला, पिंकी, दर्शाना, सविता, मीरा, कृष्णा, राजबाला, रानी आदि मौजूद रहीं। वहीं, प्रदर्शनकारी दर्शाना, शीला और सीमा की अगुवाई में आशाओं ने मंत्री आवास पर सांकेतिक धरना दिया।
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ये हैं प्रमुख मांगें
वर्ष 2023 की 73 दिनों की हड़ताल का बकाया मानदेय तुरंत जारी किया जाए।
आशा वर्कर्स को पक्का कर्मचारी बनाया जाए, तब तक उन्हें 26 हजार रुपये न्यूनतम वेतन दिया जाए।
चारों श्रम संहिताओं (लेबर कोड्स) को रद्द किया जाए।
आशा वर्कर्स के रिटायरमेंट लाभ बढ़ाए जाएं, सरकारी बैंकों से लोन सुविधा उपलब्ध कराई जाए।
सरकारी स्वास्थ्य ढांचे को मजबूत कर एनएचएम को स्थायी किया जाए।
सभी ऑनलाइन एप पर किए जा रहे कार्यों के लिए अलग से मानदेय और संसाधन प्रदान किए जाएं।
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