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दो साल बाद खेदड़ थर्मल प्लांट की दूसरी यूनिट से निकला करंट,100 मेगावाट उत्पादन

Amar Ujala Bureau अमर उजाला ब्यूरो
Updated Sun, 12 Jun 2022 11:06 PM IST
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After two years, the current from the second unit of Khedar thermal plant, 100 MW generation
दूसरी यूनिट शुरू होने के बाद खेदल थर्मल प्लांट की चिमनी से निकलती आग। - फोटो : Hisar
हिसार। पौने दो साल बाद रविवार को खेदड़ थर्मल प्लांट की दूसरी यूनिट से बिजली उत्पादन शुरू हो गया। रविवार को सुबह के समय दूसरी यूनिट से करीब 100 मेगावाट बिजली तैयार की गई। कुछ तकनीकी कारणों के चलते यूनिट को पूरी क्षमता तक नहीं ले जाया जा सका। सोमवार से यूनिट को पूरी क्षमता से चलाए जाने की तैयारी है।
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वर्ष 2020 में रोटर खराब हो जाने के कारण राजीव गांधी थर्मल पावर प्लांट की दूसरी 600 मेगावाट की यूनिट को बंद कर दिया गया था। इसके बाद प्लांट से केवल 600 मेगावाट यूनिट का उत्पादन ही हो रहा था। मार्च 2020-2021 में कोरोना व लॉकडाउन के असर के चलते इंटरनेशनल हवाई उड़ानों पर प्रतिबंध के कारण चीन से रोटर नहीं आया। इस साल हालात सुधरने पर रोटर मंगाया गया। करीब 14 करोड़ रुपये की लागत का सेकंड हेंड रोटर भेजा गया है, नए रोटर के लिए ऑर्डर दिया गया है।
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ग्रामीण एरिया को फिर से 16 घंटे आपूर्ति
दक्षिण हरियाणा बिजली वितरण निगम व उत्तर हरियाणा बिजली निगम ने 11 जून को पत्र जारी कर ग्रामीण फीडरों पर 16 घंटे बिजली आपूर्ति देने के आदेश जारी किए हैं। जिसमें रात के समय इन फीडरों पर बिजली आपूर्ति निर्बाध रहेगी। दिन के समय 4 घंटे बिजली दी जाएगी।
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चीन से वीडियो कॉल से निर्देश लेकर किया काम
यह प्लांट चीन की मदद से लगाया गया था। इसमें कंपनी ने अपने तकनीकी अधिकार अपने पास रखे थे। जिस कारण भारतीय इंजीनियर इसे दुरुस्त नहीं कर पाए। इस प्लांट की मशीनरी को भी चीन ने ही डिजाइन किया हुआ है। इसे मेंटेन करने का अधिकारी चीन से जुड़ी कंपनी के पास है। इस कारण इस प्लांट के उपकरणों को सही करने के लिए चीन पर निर्भर रहना पड़ता है। मुंबई से आई इंजीनियरों की टीम ने चीन के अधिकारियों से ऑनलाइन निर्देश लेते हुए काम को पूरा किया।

ऐसे पूरा किया काम
इस काम में करीब 150 लोगों को लगाया गया। पहले चरण में टरबाइन को स्लो स्पीड में घुमाया गया। इसके बाद ऑक्सीजन, कार्बन डाईआक्साइड व फिर हाइड्रोजन भरी। यह प्रक्रिया पूरी होने के बाद इसे लाइट अप किया। 600 मेगावाट की यूनिट को चलाने के लिए हर एक घंटे में 400 टन कोयले की खपत होती है। यूनिट को शुरू करने में 8 से 12 घंटे लगते हैं। उत्पादन को पूरी क्षमता तक पहुंचाने के लिए 24 घंटे से 36 तक का समय लग जाता है।
राजीव गांधी थर्मल पावर प्लांट आधारशिला वर्ष 2007
- पहली यूनिट से उत्पादन मार्च 2010
- दूसरी यूनिट से उत्पादन अक्टूबर 2010
- कुल क्षमता 600 गुना 2 : 1200 मेगावाट
- कुल खर्च : 4297 करोड़ रुपये
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