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आयुर्वेद अपनाने और संतुलित आहार खाने से मिलेगा बीमारियों से छुटकारा : प्रो. कांबोज
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आयुर्वेद दिवस के उपलक्ष्य पर आयोजित कार्यक्रम को संबोधित करते कुलपति प्रो. बीआर काम्बोज। स्रोत
हिसार। आयुर्वेद न केवल एक चिकित्सा पद्धति है बल्कि जीवन को सही ढंग से जीने का संपूर्ण ज्ञान है। स्वस्थ शरीर के बिना हम जीवन में कुछ नहीं कर सकते हैं। इसलिए बेहतर है कि हम अपने शरीर को स्वस्थ रखने के लिए दिनचर्या व खानपान में आवश्यक बदलाव करें। आयुर्वेद अपनाने और संतुलित आहार का सेवन करने से बीमारियों से छुटकारा मिलता है। यह बात हरियाणा कृषि विश्वविद्यालय (एचएयू) के कुलपति प्रो. बीआर कांबोज ने कही। वह विश्वविद्यालय के मौलिक विज्ञान एवं मानविकी महाविद्यालय में आयुर्वेद दिवस के उपलक्ष्य पर आयोजित कार्यक्रम में बतौर मुख्य अतिथि संबोधित कर रहे थे।
उन्होंने कहा कि आयुर्वेद हमें बीमारी होने की मूलभूत कारणों को बताने के साथ-साथ समग्र रूप से उसको जड़ से खत्म करता है। कुलपति ने कहा कि स्कूल, कॉलेज व विश्वविद्यालय स्तर पर पाठ्यक्रमों में आयुर्वेद विषय पर विस्तारपूर्वक अध्याय शामिल करने चाहिए ताकि वर्तमान व भविष्य की पीढि़यों को रोगमुक्त करने व उन्हें जिंदगी जीने की सही कला से अवगत कराने के लिए आयुर्वेद विषय के उद्देश्यों को तर्कपूर्ण तरीके से समझा जा सकें। मुख्य वक्ता डॉ. सुखबीर वर्मा ने कहा कि हमारी रसोईघर एक प्रकार की चिकित्सालय है, जहां सस्ते व आसानी से हमें उन सामग्रियों की प्राप्त हो जाती है, जो हमारे जीवन और स्वस्थ दोनों को प्रभावित करती है।
कैंपस स्कूल की छात्रा रिद्धि व राधिका ने औषधीय फसलों से वाले फायदों से सभी को रूबरू करवाया। कार्यक्रम में औषधीय पौधों को उगाने व इसके प्रचार-प्रसार में अहम भूमिका निभाने वाले प्रगतिशील किसान रघुबीर, बलदेव शर्मा व छोटूराम सहित विश्वविद्यालय के भू-दृश्य संरचना इकाई के कर्मचारी रामपाल, हर्बल वाटिका से द्वारका प्रसाद को सम्मानित किया। इस अवसर पर डॉ. राजेश आर्य, डॉ. पवन कुमार, डॉ. सुधीर शर्मा, होटा प्रधान डॉ. अशोक गोदारा व गैर-शिक्षक कर्मचारी यूनियन के प्रधान दिनेश राड़ आदि मौजूद रहे।
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उन्होंने कहा कि आयुर्वेद हमें बीमारी होने की मूलभूत कारणों को बताने के साथ-साथ समग्र रूप से उसको जड़ से खत्म करता है। कुलपति ने कहा कि स्कूल, कॉलेज व विश्वविद्यालय स्तर पर पाठ्यक्रमों में आयुर्वेद विषय पर विस्तारपूर्वक अध्याय शामिल करने चाहिए ताकि वर्तमान व भविष्य की पीढि़यों को रोगमुक्त करने व उन्हें जिंदगी जीने की सही कला से अवगत कराने के लिए आयुर्वेद विषय के उद्देश्यों को तर्कपूर्ण तरीके से समझा जा सकें। मुख्य वक्ता डॉ. सुखबीर वर्मा ने कहा कि हमारी रसोईघर एक प्रकार की चिकित्सालय है, जहां सस्ते व आसानी से हमें उन सामग्रियों की प्राप्त हो जाती है, जो हमारे जीवन और स्वस्थ दोनों को प्रभावित करती है।
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कैंपस स्कूल की छात्रा रिद्धि व राधिका ने औषधीय फसलों से वाले फायदों से सभी को रूबरू करवाया। कार्यक्रम में औषधीय पौधों को उगाने व इसके प्रचार-प्रसार में अहम भूमिका निभाने वाले प्रगतिशील किसान रघुबीर, बलदेव शर्मा व छोटूराम सहित विश्वविद्यालय के भू-दृश्य संरचना इकाई के कर्मचारी रामपाल, हर्बल वाटिका से द्वारका प्रसाद को सम्मानित किया। इस अवसर पर डॉ. राजेश आर्य, डॉ. पवन कुमार, डॉ. सुधीर शर्मा, होटा प्रधान डॉ. अशोक गोदारा व गैर-शिक्षक कर्मचारी यूनियन के प्रधान दिनेश राड़ आदि मौजूद रहे।
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