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एक बस ड्राइवर के ताने ने बना दिया आईएएस
ब्यूरो/अमर उजाला हिसार
Updated Sun, 26 Jul 2015 01:18 AM IST
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पहल्यां तूं अपनी भैंसें देख ले, पढ़कै कै डीसी बणैगा। बस ड्राइवर के इसी एक ताने ने करनाल के गांव कुलवेड़ी निवासी संदीप प्रजापति को आईएएस बना दिया।
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हाल ही में आए यूपीएससी के नतीजों में संदीप ने 172वां रैंक हासिल किया है। संदीप ने बताया कि एक दिन वो अपनी भैंसों को पानी पिलाने लेकर गए हुए थे, साथ में ही किताबें लेकर पढ़ भी रहे थे।
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तभी भैंसें सड़क पर एक बस के सामने आ गईं। बस ड्राइवर ने नीचे उतरकर भैंसों को हटाया और उन पर ताना मारा कि पहले अपनी भैंसों को तो देख ले, पढ़कर क्या डीसी बनेगा।
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इसी ताने ने उनके मन में आईएएस बनने की चिंगारी सुलगा दी। घर आकर पिता से डीसी बनने की प्रक्रिया पूछी और फिर जुट गए तैयारी में। इस बार आखिरी चांस में जी जान लगा दी और 172वां रैंक हासिल किया।
ग्रामीण विकास के लिए काम करना चाहता हूं : संदीप
अपने अनुभव साझा करते हुए संदीप ने कहा कि उन्होंने एनसीईआरटी की किताबें पढ़ी है। इन्हीं किताबों से यूपीएससी का एग्जाम तैयार होता है।
आखिरी दो-तीन महीने में 13-14 घंटे तक पढ़ाई की। हर रोज समाचार-पत्र पढ़ने की आदत डाली। राइटिंग पर ध्यान दिया। उन्होंने नए बच्चों को संदेश देते हुए कहा कि हमेशा बड़े सपने देखें। कुछ बड़ा बनने का लक्ष्य बनाकर उसके लिए पूरी जी-जान से लग जाएं।
संदीप ने बताया कि उनके पिता एनडीआरआई से टेक्निकल ऑफिसर रिटायर्ड हैं, जबकि मां गृहिणी है। वहीं पत्नी स्कूल कैडर में लेक्चरर है। वो गांव के विकास के लिए बहुत कुछ करना चाहते हैं।
विजय ने हाईटेक तो राजेंद्र ने की रेगुलर पढ़ाई
हिसार। आजाद नगर में महाराजा गुरु दक्ष समाज शिक्षा समिति की ओर से अभिनंदन समारोह में शामिल होने आए यूपीएससी का एग्जाम पास करने वाले राजेंद्र पेंसिया और 794वां रैंक लेने वाले विजय किरोड़ीवाल ने भी अपने अनुभव साझा किए। विजय ने जहां तैयारी में हाईटेक तरीका अपनाया वहीं राजेंद्र पेंसिया ने रेगुलर पढ़ाई पर फोकस किया।
चार बार पास किया नेट-जेआरएफ
राजेंद्र पेंसिया ने चार बार नेट-जेआरएफ पास किया है। सबसे पहले टीचर बने। उसके बाद आरएएस में आठवां रैंक हासिल किया। डब्ल्यूटीओ की ओर से सम्मानित किए जा चुके हैं।
वाइल्ड लाइफ फोटोग्राफी के लिए उन्हें विशेष अवॉर्ड मिला हुआ है। राजेंद्र बताते हैं कि जल्द ही आपणो नाम से वेबपोर्टल शुरू किया जाएगा, जिससे तैयारी कर रहे विद्यार्थियों को खासा लाभ मिलेगा।
ढाणी में ही बना दी दिल्ली
हनुमानगढ़ के गांव मेहरवाला की ढाणी मियां वाली में रहने वाले विजय किरोड़ीवाल कहते हैं कि उन्होंने यूपीएससी की तैयारी के लिए कहीं कोचिंग नहीं ली बल्कि ढाणी को ही दिल्ली बना दिया।
इसके लिए उन्होंने लैपटॉप पर ही हाईटेक तरीका अपनाया। वेबपोर्टल, फेसबुक व अन्य वेबसाइटों से स्टडी मैटेरियल उठाकर तैयारी की। यू-ट्यूब पर ऑडियो-वीडियो लेक्चर डाउनलोड कर वहां से तैयारी की।
विजय ने बताया कि दिलचस्प बात यह है कि जिन वेबपोर्टल से उन्होंने तैयारी की, उसका एडमिन एग्जाम पास नहीं कर पाया, जबकि उन्होंने पास कर दिया। विजय बताते हैं कि उनका लक्ष्य है कि अगले पांच साल में वो करीब 300 बच्चों को आईएएस की तैयारी करवाएं।