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पहले दिन सरकारी एजेंसी ने एक दाना भी सरसों नहीं खरीदी
Updated Fri, 16 Mar 2018 12:56 AM IST
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अमर उजाला ब्यूरो
हिसार।
सरकार की ओर से आए निर्देश के अनुसार 15 मार्च से 4000 रुपये प्रति क्विंटल के न्यूनतम समर्थन मूल्य पर सरसों की सरकारी खरीद होनी थी। पहले दिन अनाज मंडी में सरकारी एजेंसियों ने एक भी दाना सरसों नहीं खरीदा। मंडी में सरसों लेकर पहुंचे किसानों को अपनी फसल 3400 से 3600 रुपये प्रति क्विंटल के हिसाब से बेचनी पड़ी।
सरसों का न्यूनतम समर्थन मूल्य तय होने के बावजूद किसानों को अपनी फसल सस्ते दाम पर बेचनी पड़ रही है। अमर उजाला की टीम ने वीरवार को अनाज मंडी में पहुंचकर सरसों खरीद की लाइव रिपोर्ट की। सबसे पहले अनाज मंडी गेट पर पूछा कि सरसों की सरकारी खरीद कहां होगी। गेट पर बैठे चौकीदार ने बताया कि हैफेड की 187 नंबर दुकान पर। वहां जाकर देखा तो सरसों का एक दाना भी नहीं था। सरसों की खरीद के लिए पूरा प्लेटफार्म खाली छोड़ा गया था। इसमें एक भी ढेरी नहीं लगी थी।
हैफेड खरीद केंद्र के मैनेजर राजेंद्र कुमार से खरीद के बारे में पूछा तो उन्होंने कहा कि अभी रोस्टर नहीं बना है। डीआरओ की मदद से सभी गांवों का रोस्टर बनाया जाएगा। उसके बाद गांव के लोग अपनी बारी के अनुुसार सरसों लाएंगे। इसमें दो से तीन दिन लग जाएंगे।
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यहां पहुंचे गांव मंगाली के किसान रामकुमार ने हैफेड खरीद केंद्र के कर्मचारियों से पूछा कि सरसों कब खरीदोगे। हम बेहद परेशान हैं। यह भी बताओ कि हमें क्या शर्तें पूरी करनी होंगी। पटवारी से गिरदावरी रिपोर्ट न मिले तो क्या करें।
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जुगलान निवासी महाबीर ने बताया कि 60 मण सरसों लेकर आए थे। सरकारी खरीद तो अभी शुरू भी नहीं हुई। क्या करें, मजबूरी में अपनी सरसों 3550 रुपये प्रति क्विंटल के हिसाब से बेचनी पड़ी है।
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किसान मेहर सिंह ने कहा सरकारी खरीद के भरोसे सरसों लाए थे। सरकार को पहले इंतजाम करने चाहिए थे, फिर खरीद की तारीख का एलान करते। हम किसानों को मंडी में सरकार ही लुटवा रही है। सरसों ले आए अब मजबूरी में 3621 रुपये में बेचनी पड़ी।
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गांव धिकताना के किसान खजान सिंह ने कहा कि सरकार ने इतनी औपचारिकता लगाएं दी कि सरसों प्राइवेट आढ़ती को ही बेचना हमारी मजबूरी हो गई है। पटवारी से गिरदावरी लाएं, गांव का नंबर कब आएगा, कितने दिन इंतजार करें। उसके बाद भी सरकार 25 क्विंटल खरीदेगी, बाकी सरसों कहां बचेंगे।
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किसान प्रदीप ने कहा कि सरकार खरीद के नाम पर ड्रामा कर रही है। इस तरह से केवल दिखावा हो रहा है। गेहूं की तरह से सरसों खरीदी जाए। अब जिस दिन हमारे गांव का नंबर आए, उस दिन किसान की कोई मजबूरी हो सकती है। ऐसे में हम सरकारी दाम पर बेच ही नहीं पाएंगे।
गांव के अनुसार रोस्टर बनाया गया है। रोस्टर को सभी अखबार के जरिये प्रचारित किया जाएगा। गांव के सरपंचों को भी जानकारी दी जाएगी। उसके अनुसार ही सरसों खरीद होगी। बास मंडी में भी सरसों की खरीद के आदेश आ गए हैं।
-राजेंद्र, हैफेड खरीद केंद्र मैनेजर, हिसार
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जिले में दूसरा खरीद केंद्र बास
हिसार में सरसों खरीद के लिए हिसार मेन अनाज मंडी को ही सरकारी खरीद केंद्र बनाया गया था। बुधवार देर शाम हैफेड को ई-मेल के जरिये ऑर्डर आया। इसमें बास अनाज मंडी में भी सरसों खरीद का केंद्र बनाया गया है। हांसी और नारनौंद एरिया के किसान बास में अपनी सरसों को बेच सकेंगे।
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आदमपुर में खरीद शुरू कराएं
आदमपुर विधायक कुलदीप बिश्नोई ने कहा कि आदमपुर हलका सरसों की फसल का गढ़ रहा है। पहले मंडी आदमपुर में हैफेड की ओर से सरसों की खरीद की जाती रही है। पिछले दो वर्षों से यहां पर हैफेड सरसों की खरीद नहीं कर रही। मंडी आदमपुर में सरसों की आवक भी शुरू हो गई है। एक बार भी फिर से आदमपुर मंडी को सरसों खरीद का केंद्र नहीं बनाया गया है। किसानों व व्यापारी वर्ग के हितों को देखते हुए यहां पर खरीद शुरू करवानी चाहिए।
बिना शर्त हो सरसों की खरीद
किसान सभा का प्रतिनिधिमंडल ने बगैर शर्त फसल की खरीद करने की मांग को लेकर जिला उपायुक्त से मिलकर मुख्यमंत्री के नाम ज्ञापन सौंपा। प्रांतीय वित्त सचिव प्रदीप सिंह, जिला सचिव सूबे सिंह बूरा, जिला वित्त सचिव धर्मबीर कंवारी, जिला वरिष्ठ उपप्रधान बारू राम मुकलान, नरेंद्र मलिक आदि शामिल थे। प्रतिनिधिमंडल ने डीसी से जिले की सभी मंडियों में सरसों की खरीद की मांग की। किसानों ने कहा एक किसान की एक दिन में केवल 25 क्विंटल की खरीद करने, नमी की मात्रा, फसल की फर्द साथ लाने, परिचय पत्र और बैंक खाता नंबर की शर्त को हटाया जाए।
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हिसार।
सरकार की ओर से आए निर्देश के अनुसार 15 मार्च से 4000 रुपये प्रति क्विंटल के न्यूनतम समर्थन मूल्य पर सरसों की सरकारी खरीद होनी थी। पहले दिन अनाज मंडी में सरकारी एजेंसियों ने एक भी दाना सरसों नहीं खरीदा। मंडी में सरसों लेकर पहुंचे किसानों को अपनी फसल 3400 से 3600 रुपये प्रति क्विंटल के हिसाब से बेचनी पड़ी।
सरसों का न्यूनतम समर्थन मूल्य तय होने के बावजूद किसानों को अपनी फसल सस्ते दाम पर बेचनी पड़ रही है। अमर उजाला की टीम ने वीरवार को अनाज मंडी में पहुंचकर सरसों खरीद की लाइव रिपोर्ट की। सबसे पहले अनाज मंडी गेट पर पूछा कि सरसों की सरकारी खरीद कहां होगी। गेट पर बैठे चौकीदार ने बताया कि हैफेड की 187 नंबर दुकान पर। वहां जाकर देखा तो सरसों का एक दाना भी नहीं था। सरसों की खरीद के लिए पूरा प्लेटफार्म खाली छोड़ा गया था। इसमें एक भी ढेरी नहीं लगी थी।
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हैफेड खरीद केंद्र के मैनेजर राजेंद्र कुमार से खरीद के बारे में पूछा तो उन्होंने कहा कि अभी रोस्टर नहीं बना है। डीआरओ की मदद से सभी गांवों का रोस्टर बनाया जाएगा। उसके बाद गांव के लोग अपनी बारी के अनुुसार सरसों लाएंगे। इसमें दो से तीन दिन लग जाएंगे।
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यहां पहुंचे गांव मंगाली के किसान रामकुमार ने हैफेड खरीद केंद्र के कर्मचारियों से पूछा कि सरसों कब खरीदोगे। हम बेहद परेशान हैं। यह भी बताओ कि हमें क्या शर्तें पूरी करनी होंगी। पटवारी से गिरदावरी रिपोर्ट न मिले तो क्या करें।
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जुगलान निवासी महाबीर ने बताया कि 60 मण सरसों लेकर आए थे। सरकारी खरीद तो अभी शुरू भी नहीं हुई। क्या करें, मजबूरी में अपनी सरसों 3550 रुपये प्रति क्विंटल के हिसाब से बेचनी पड़ी है।
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किसान मेहर सिंह ने कहा सरकारी खरीद के भरोसे सरसों लाए थे। सरकार को पहले इंतजाम करने चाहिए थे, फिर खरीद की तारीख का एलान करते। हम किसानों को मंडी में सरकार ही लुटवा रही है। सरसों ले आए अब मजबूरी में 3621 रुपये में बेचनी पड़ी।
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गांव धिकताना के किसान खजान सिंह ने कहा कि सरकार ने इतनी औपचारिकता लगाएं दी कि सरसों प्राइवेट आढ़ती को ही बेचना हमारी मजबूरी हो गई है। पटवारी से गिरदावरी लाएं, गांव का नंबर कब आएगा, कितने दिन इंतजार करें। उसके बाद भी सरकार 25 क्विंटल खरीदेगी, बाकी सरसों कहां बचेंगे।
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किसान प्रदीप ने कहा कि सरकार खरीद के नाम पर ड्रामा कर रही है। इस तरह से केवल दिखावा हो रहा है। गेहूं की तरह से सरसों खरीदी जाए। अब जिस दिन हमारे गांव का नंबर आए, उस दिन किसान की कोई मजबूरी हो सकती है। ऐसे में हम सरकारी दाम पर बेच ही नहीं पाएंगे।
गांव के अनुसार रोस्टर बनाया गया है। रोस्टर को सभी अखबार के जरिये प्रचारित किया जाएगा। गांव के सरपंचों को भी जानकारी दी जाएगी। उसके अनुसार ही सरसों खरीद होगी। बास मंडी में भी सरसों की खरीद के आदेश आ गए हैं।
-राजेंद्र, हैफेड खरीद केंद्र मैनेजर, हिसार
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जिले में दूसरा खरीद केंद्र बास
हिसार में सरसों खरीद के लिए हिसार मेन अनाज मंडी को ही सरकारी खरीद केंद्र बनाया गया था। बुधवार देर शाम हैफेड को ई-मेल के जरिये ऑर्डर आया। इसमें बास अनाज मंडी में भी सरसों खरीद का केंद्र बनाया गया है। हांसी और नारनौंद एरिया के किसान बास में अपनी सरसों को बेच सकेंगे।
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आदमपुर में खरीद शुरू कराएं
आदमपुर विधायक कुलदीप बिश्नोई ने कहा कि आदमपुर हलका सरसों की फसल का गढ़ रहा है। पहले मंडी आदमपुर में हैफेड की ओर से सरसों की खरीद की जाती रही है। पिछले दो वर्षों से यहां पर हैफेड सरसों की खरीद नहीं कर रही। मंडी आदमपुर में सरसों की आवक भी शुरू हो गई है। एक बार भी फिर से आदमपुर मंडी को सरसों खरीद का केंद्र नहीं बनाया गया है। किसानों व व्यापारी वर्ग के हितों को देखते हुए यहां पर खरीद शुरू करवानी चाहिए।
बिना शर्त हो सरसों की खरीद
किसान सभा का प्रतिनिधिमंडल ने बगैर शर्त फसल की खरीद करने की मांग को लेकर जिला उपायुक्त से मिलकर मुख्यमंत्री के नाम ज्ञापन सौंपा। प्रांतीय वित्त सचिव प्रदीप सिंह, जिला सचिव सूबे सिंह बूरा, जिला वित्त सचिव धर्मबीर कंवारी, जिला वरिष्ठ उपप्रधान बारू राम मुकलान, नरेंद्र मलिक आदि शामिल थे। प्रतिनिधिमंडल ने डीसी से जिले की सभी मंडियों में सरसों की खरीद की मांग की। किसानों ने कहा एक किसान की एक दिन में केवल 25 क्विंटल की खरीद करने, नमी की मात्रा, फसल की फर्द साथ लाने, परिचय पत्र और बैंक खाता नंबर की शर्त को हटाया जाए।