{"_id":"59c561284f1c1bb4688b6086","slug":"91506107688-hisar-news","type":"story","status":"publish","title_hn":"निगम आयुक्त बोले, हिसार के बंदर इंटेलीजेंट, पिंजरे में फंसते ही नहीं","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
निगम आयुक्त बोले, हिसार के बंदर इंटेलीजेंट, पिंजरे में फंसते ही नहीं
Updated Sat, 23 Sep 2017 12:44 AM IST
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
अमर उजाला ब्यूरो
हिसार।
नगर निगम आयुक्त अशोक बंसल ने कहा कि हिसार के बंदर काफी इंटेलीजेंट हो गए हैं, पिंजरे में फंसते ही नहीं। निगम कार्यालय कि तरफ से कई बार बंदर पकड़ने के टेेंडर लगवाए जा चुके हैं। कोई ठेकेदार आता ही नहीं। बंदर पकड़ने को लेकर हमने हरियाणा से बाहर दिल्ली और उत्तर प्रदेश में भी ट्राई किया था। यह जवाब निगम आयुक्त अशोक बंसल ने बंदर पकड़ने की गुहार लेकर पहुंचे सेक्टर-13 और 16-17 के निवासियों को दिया।
बंदरों के काटने की घटना के बाद लोग शुक्रवार को निगम आयुक्त कार्यालय पहुंचे थे। इन लोगों ने कहा कि बंदरों के आतंक के घर से बाहर ही नहीं निकल पा रहे। सद्भावना संस्था का प्रतिनिधिमंडल अमित ग्रोवर की अध्यक्षता में पहुंचा था। सद्भावना संस्था की कार्यकर्ता इंदु बजाज ने कहा कि हमारे क्षेत्र में बंदर राज है। आप बंदरों को क्यों नहीं पकड़ रहे हैं। घरों में रहना खतरे से खाली नहीं है। सेक्टर की महिलाएं घरों में कैद होकर रह गई हैं। बंदरों को पिंजरे में होना चाहिए। यहां लोग उल्टे अपने घर को पिंजरा बनाने पर मजबूर हो रहे हैं। जल्द बंदरों को पकड़ो, वरना ये और भी इंटेलीजेंट हो जाएंगे। योग शिक्षिका कांता हुड्डा ने कहा कि साहब बंदर हमारे बच्चों को काट रहे हैं। 15-15 हजार रुपये खर्च करके घरों पर जाली लगवाई है। जाली को बंदरों ने हिलाकर तोड़ दिया है। बंदर हर रोज बच्चों और महिलाओं को अपना निशाना बना रहे हैं। सेक्टर-13 में तो सैकड़ों महिलाओं को बंदर काट चुके हैं। डॉ. प्रवीन खुराना, टिवंकल सैनी, तारावंती ग्रोवर, मनीषा चावला, रेजी अनिल, चंद्र छाबड़ा सहित अन्य लोगों ने बंदरों की समस्या बताई। महिलाओं ने कहा कि पिछले दो वर्षों से बंदरों को पकड़ने की गुहार लगा रहे हैं। हर बार टेंडर प्रक्रिया में अड़चन आने का हवाला देकर टरका दिया जाता है।
अनुमति दो, हम पकडे़ंगे बंदर
समिति ने पत्र लिखकर अपने स्तर पर बंदर पकड़ने की अनुमति मांगी थी। अब संस्था ने एक बार फिर से वन्य विभाग से अनुमति मांगी है। अगर निगम ने जल्द ही बंदर पकड़ने की कोशिश नहीं की तो संस्था सेक्टर वासियों के सहयोग से अपने स्तर पर बंदर पकड़वाने का काम शुरू करेगी।
विज्ञापन
एक दिन में चार बच्चों पर बोला था हमला
टिब्बा दानाशेर एरिया में वीरवार को बंदरों ने चार बच्चों को बुरी तरह से काट खाया। चार साल की मासूम ललिता को तो बंदरों से ऐसा काटा कि उसके हाथ का पूरा मांस बाहर आ गया। हाथ की हड्डी ही दिखने लगी। मासूम को 15 टांके आए हैं। ललिता के अलावा सत्यम और दो अन्य टिब्बा दानाशेर पर ही रहने वाले बच्चों को बंदर ने काट खाया। बच्चे को नागरिक अस्पताल से रेफर किया गया। इसके बाद परिजन उसे निजी अस्पताल लेकर पहुंचे।
सड़कों पर काम शुरू नहीं किया तो निगम का करेंगे घेरेंगे
महिलाओं ने बंदरों की समस्या के अलावा सेक्टरों में आवारा कुत्तों और सड़कों की समस्या को भी उठाया। सेक्टरों की सड़कों के लिए पिछले एक साल से आश्वासन दिए जा रहे हैं। आज तक सड़कों पर काम शुरू नहीं हुआ है। सेक्टर-16-17 का टेंडर ठेकेदार ने वापस सरेंडर कर दिया है। इससे यह मामला एक बार फिर अधर में लटक गया है। एक सप्ताह में काम शुरू नहीं किया तो एक अक्तूबर को महिलाएं नगर निगम ऑफिस का घेराव करेंगी।
विज्ञापन
हिसार।
नगर निगम आयुक्त अशोक बंसल ने कहा कि हिसार के बंदर काफी इंटेलीजेंट हो गए हैं, पिंजरे में फंसते ही नहीं। निगम कार्यालय कि तरफ से कई बार बंदर पकड़ने के टेेंडर लगवाए जा चुके हैं। कोई ठेकेदार आता ही नहीं। बंदर पकड़ने को लेकर हमने हरियाणा से बाहर दिल्ली और उत्तर प्रदेश में भी ट्राई किया था। यह जवाब निगम आयुक्त अशोक बंसल ने बंदर पकड़ने की गुहार लेकर पहुंचे सेक्टर-13 और 16-17 के निवासियों को दिया।
बंदरों के काटने की घटना के बाद लोग शुक्रवार को निगम आयुक्त कार्यालय पहुंचे थे। इन लोगों ने कहा कि बंदरों के आतंक के घर से बाहर ही नहीं निकल पा रहे। सद्भावना संस्था का प्रतिनिधिमंडल अमित ग्रोवर की अध्यक्षता में पहुंचा था। सद्भावना संस्था की कार्यकर्ता इंदु बजाज ने कहा कि हमारे क्षेत्र में बंदर राज है। आप बंदरों को क्यों नहीं पकड़ रहे हैं। घरों में रहना खतरे से खाली नहीं है। सेक्टर की महिलाएं घरों में कैद होकर रह गई हैं। बंदरों को पिंजरे में होना चाहिए। यहां लोग उल्टे अपने घर को पिंजरा बनाने पर मजबूर हो रहे हैं। जल्द बंदरों को पकड़ो, वरना ये और भी इंटेलीजेंट हो जाएंगे। योग शिक्षिका कांता हुड्डा ने कहा कि साहब बंदर हमारे बच्चों को काट रहे हैं। 15-15 हजार रुपये खर्च करके घरों पर जाली लगवाई है। जाली को बंदरों ने हिलाकर तोड़ दिया है। बंदर हर रोज बच्चों और महिलाओं को अपना निशाना बना रहे हैं। सेक्टर-13 में तो सैकड़ों महिलाओं को बंदर काट चुके हैं। डॉ. प्रवीन खुराना, टिवंकल सैनी, तारावंती ग्रोवर, मनीषा चावला, रेजी अनिल, चंद्र छाबड़ा सहित अन्य लोगों ने बंदरों की समस्या बताई। महिलाओं ने कहा कि पिछले दो वर्षों से बंदरों को पकड़ने की गुहार लगा रहे हैं। हर बार टेंडर प्रक्रिया में अड़चन आने का हवाला देकर टरका दिया जाता है।
विज्ञापन
अनुमति दो, हम पकडे़ंगे बंदर
समिति ने पत्र लिखकर अपने स्तर पर बंदर पकड़ने की अनुमति मांगी थी। अब संस्था ने एक बार फिर से वन्य विभाग से अनुमति मांगी है। अगर निगम ने जल्द ही बंदर पकड़ने की कोशिश नहीं की तो संस्था सेक्टर वासियों के सहयोग से अपने स्तर पर बंदर पकड़वाने का काम शुरू करेगी।
विज्ञापन
एक दिन में चार बच्चों पर बोला था हमला
टिब्बा दानाशेर एरिया में वीरवार को बंदरों ने चार बच्चों को बुरी तरह से काट खाया। चार साल की मासूम ललिता को तो बंदरों से ऐसा काटा कि उसके हाथ का पूरा मांस बाहर आ गया। हाथ की हड्डी ही दिखने लगी। मासूम को 15 टांके आए हैं। ललिता के अलावा सत्यम और दो अन्य टिब्बा दानाशेर पर ही रहने वाले बच्चों को बंदर ने काट खाया। बच्चे को नागरिक अस्पताल से रेफर किया गया। इसके बाद परिजन उसे निजी अस्पताल लेकर पहुंचे।
सड़कों पर काम शुरू नहीं किया तो निगम का करेंगे घेरेंगे
महिलाओं ने बंदरों की समस्या के अलावा सेक्टरों में आवारा कुत्तों और सड़कों की समस्या को भी उठाया। सेक्टरों की सड़कों के लिए पिछले एक साल से आश्वासन दिए जा रहे हैं। आज तक सड़कों पर काम शुरू नहीं हुआ है। सेक्टर-16-17 का टेंडर ठेकेदार ने वापस सरेंडर कर दिया है। इससे यह मामला एक बार फिर अधर में लटक गया है। एक सप्ताह में काम शुरू नहीं किया तो एक अक्तूबर को महिलाएं नगर निगम ऑफिस का घेराव करेंगी।