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Hisar News: निशीथ काल में जन्मेंगे कान्हा, अष्टमी-रोहिणी का संयोग खास
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हिसार। भगवान श्रीकृष्ण के जन्मोत्सव को लेकर श्रद्धालुओं में खास उत्साह है। 4 सितंबर को मनाई जाने वाली जन्माष्टमी पर करीब 15 साल बाद अष्टमी तिथि, रोहिणी नक्षत्र और मध्यरात्रि का निशीथ काल एक साथ रहेगा।
ज्योतिषीय गणना के अनुसार 4 सितंबर की रात 11:57 बजे से 12:43 बजे तक करीब 45 मिनट का निशीथ काल रहेगा। इसी अवधि में भगवान श्रीकृष्ण का जन्मोत्सव मनाया जाएगा।
देवी भवन के पंडित राजेश ने बताया कि पंचांग के अनुसार अष्टमी तिथि और रोहिणी नक्षत्र का संयोग इस बार जन्माष्टमी को विशेष बना रहा है। रात करीब 12 बजे रोहिणी नक्षत्र शुरू होगा। इसी दौरान मंदिरों और घरों में बाल गोपाल के जन्म की तैयारियां पूरी की जाएंगी।
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मध्यरात्रि में भगवान श्रीकृष्ण के जन्म के बाद पूजा-अर्चना, आरती और प्रसाद वितरण होगा। शंखनाद और घंटियों के बीच भगवान के बाल स्वरूप का पूजन किया जाएगा। श्रद्धालु व्रत खोलकर भगवान का आशीर्वाद लेंगे। इस बार गृहस्थ और वैष्णव संप्रदाय के श्रद्धालु एक ही दिन जन्माष्टमी का व्रत रखेंगे। घरों में भी कान्हा की झांकियां सजाकर जन्मोत्सव मनाने की तैयारी है।
व्रत के बाद होगा अभिषेक और प्रसाद वितरण
जन्माष्टमी पर श्रद्धालु दिनभर व्रत रखकर मध्यरात्रि में भगवान श्रीकृष्ण के जन्म के बाद पूजा करेंगे। पंचामृत से अभिषेक, शृंगार, आरती और प्रसाद वितरण किया जाएगा। धार्मिक मान्यता के अनुसार श्रद्धा और सामर्थ्य के अनुसार व्रत रखने से विशेष फल की प्राप्ति होती है। कई परिवार परंपरागत विधि के बजाय अपनी सुविधा के अनुसार फलाहार भी करते हैं।
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ज्योतिषीय गणना के अनुसार 4 सितंबर की रात 11:57 बजे से 12:43 बजे तक करीब 45 मिनट का निशीथ काल रहेगा। इसी अवधि में भगवान श्रीकृष्ण का जन्मोत्सव मनाया जाएगा।
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देवी भवन के पंडित राजेश ने बताया कि पंचांग के अनुसार अष्टमी तिथि और रोहिणी नक्षत्र का संयोग इस बार जन्माष्टमी को विशेष बना रहा है। रात करीब 12 बजे रोहिणी नक्षत्र शुरू होगा। इसी दौरान मंदिरों और घरों में बाल गोपाल के जन्म की तैयारियां पूरी की जाएंगी।
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मध्यरात्रि में भगवान श्रीकृष्ण के जन्म के बाद पूजा-अर्चना, आरती और प्रसाद वितरण होगा। शंखनाद और घंटियों के बीच भगवान के बाल स्वरूप का पूजन किया जाएगा। श्रद्धालु व्रत खोलकर भगवान का आशीर्वाद लेंगे। इस बार गृहस्थ और वैष्णव संप्रदाय के श्रद्धालु एक ही दिन जन्माष्टमी का व्रत रखेंगे। घरों में भी कान्हा की झांकियां सजाकर जन्मोत्सव मनाने की तैयारी है।
व्रत के बाद होगा अभिषेक और प्रसाद वितरण
जन्माष्टमी पर श्रद्धालु दिनभर व्रत रखकर मध्यरात्रि में भगवान श्रीकृष्ण के जन्म के बाद पूजा करेंगे। पंचामृत से अभिषेक, शृंगार, आरती और प्रसाद वितरण किया जाएगा। धार्मिक मान्यता के अनुसार श्रद्धा और सामर्थ्य के अनुसार व्रत रखने से विशेष फल की प्राप्ति होती है। कई परिवार परंपरागत विधि के बजाय अपनी सुविधा के अनुसार फलाहार भी करते हैं।