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अमर उजाला पड़ताल : स्वच्छ मैप ऐप पर निगम कर्मचारियों का खेल, डर्टी पैलेस के स्थान पर सफाई करते हुए फर्जी फोटो की अपलोड
Updated Mon, 08 Jan 2018 01:01 AM IST
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स्वच्छ मैप एप पर नगर निगम स्टाफ का झूठ का खेल चल रहा है। स्वच्छता सर्वेक्षण में अच्छी रैंकिंग लाने के लिए लोगों को जागरूक करने का ढोंग करने वाले अधिकारियों और कर्मचारियों की असलियत सामने आई है। अमर उजाला ने इस मामले की खुद पड़ताल की है। अमर उजाला टीम ने तीन अलग-अलग जगहों की गंदगी की फोटो स्वच्छ मैप एप पर अपलोड की। एक स्थान पर तो निगम स्टाफ ने उस लोकेशन पर जाकर गंदगी के ईद-गिर्द ऐसे स्थान की फोटो डाल दी, जो साफ है और उसे मैप पर अपलोड कर शिकायत हल हुई दिखा दी। दो अन्य लोकेशन पर कर्मचारी पहुंचे ही नहीं।
यूं हुआ खुलासा
अमर उजाला टीम ने वीरवार शाम को अर्बन इस्टेट छाबड़ा मेडिकल के पीछे पड़ी गंदगी की फोटो स्वच्छ मैप एप पर अपलोड की। गंदी जगह की फोटो अपलोड होने के दो दिन बाद शनिवार को निगम के एक कर्मचारी का फोन आया और लोकेशन के बारे में पूछा। कुछ देर बाद स्वच्छ मैप पर वहां की लोकेशन ने रेड के स्थान पर ग्रीन दिखा दिया और शिकायत हट गई। मौके पर जाकर देखा तो कूड़े के ढेर ज्यों के त्यों मिले।
शिकायत की तो एसई हैरान, फोटो भेजी तब माने
निगम के एसई एवं स्वच्छता टीम के नोडल ऑफिसर रामजीलाल के पास कॉल की। उन्हें इसके बारे में बताया गया। उस एरिया की गंदगी की फोटो शनिवार रात को ही उनके पास भेजी। हालांकि इससे पहले एसई रामजीलाल ने अपने स्टाफ को लाइन पर लेकर बात करवाई। उन्होंने कहा कि वे उस स्थान को साफ कर चुके हैं। एसई भी नहीं माने कि उनके पास सफाई करते हुए तक की फोटो है, ये संभव नहीं। जीपीआरएस से लोकेशन समेत फोटो आ रही है, लेकिन जब उनके पास रात को उसी स्थान की फोटो भेजी गई, तब वे मान गए और कहा कि जरूर कर्मचारी ने उस लोकेशन पर जाकर झूठी रिपोर्ट कर दी। इर्द-गिर्द की फोटो अपलोड कर डाली। उन्होंने रविवार को छुट्टी के दिन कर्मचारी भेजकर फिर मौके से सफाई करवाई।
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डाबड़ा चौक सागर प्रॉपर्टीज के पास और सेंट कबीर स्कूल के सामने से नहीं उठा कचरा
अमर उजाला टीम ने शुक्रवार और शनिवार को भी दो अलग-अलग स्थानों की गंदगी की फोटो डाबड़ा चौक पर सागर प्रॉपर्टीज के पास की डाली थी। दूसरी फोटो सेंट कबीर स्कूल के सामने तोशाम रोड की डाली गई थी। दोनों स्थानों पर रविवार को भी गंदगी ज्यों की त्यों है, लेकिन मैप पर लोकेेशन क्लीयर दिखा रहा है। बिना सफाई किए लोकेशन क्लीयर कैसे हो गई, यह मामला निगम अधिकारियों और कर्मचारियों की पोल खोल रहा है।
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स्वच्छ मैप एप पर नगर निगम स्टाफ का झूठ का खेल चल रहा है। स्वच्छता सर्वेक्षण में अच्छी रैंकिंग लाने के लिए लोगों को जागरूक करने का ढोंग करने वाले अधिकारियों और कर्मचारियों की असलियत सामने आई है। अमर उजाला ने इस मामले की खुद पड़ताल की है। अमर उजाला टीम ने तीन अलग-अलग जगहों की गंदगी की फोटो स्वच्छ मैप एप पर अपलोड की। एक स्थान पर तो निगम स्टाफ ने उस लोकेशन पर जाकर गंदगी के ईद-गिर्द ऐसे स्थान की फोटो डाल दी, जो साफ है और उसे मैप पर अपलोड कर शिकायत हल हुई दिखा दी। दो अन्य लोकेशन पर कर्मचारी पहुंचे ही नहीं।
यूं हुआ खुलासा
अमर उजाला टीम ने वीरवार शाम को अर्बन इस्टेट छाबड़ा मेडिकल के पीछे पड़ी गंदगी की फोटो स्वच्छ मैप एप पर अपलोड की। गंदी जगह की फोटो अपलोड होने के दो दिन बाद शनिवार को निगम के एक कर्मचारी का फोन आया और लोकेशन के बारे में पूछा। कुछ देर बाद स्वच्छ मैप पर वहां की लोकेशन ने रेड के स्थान पर ग्रीन दिखा दिया और शिकायत हट गई। मौके पर जाकर देखा तो कूड़े के ढेर ज्यों के त्यों मिले।
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शिकायत की तो एसई हैरान, फोटो भेजी तब माने
निगम के एसई एवं स्वच्छता टीम के नोडल ऑफिसर रामजीलाल के पास कॉल की। उन्हें इसके बारे में बताया गया। उस एरिया की गंदगी की फोटो शनिवार रात को ही उनके पास भेजी। हालांकि इससे पहले एसई रामजीलाल ने अपने स्टाफ को लाइन पर लेकर बात करवाई। उन्होंने कहा कि वे उस स्थान को साफ कर चुके हैं। एसई भी नहीं माने कि उनके पास सफाई करते हुए तक की फोटो है, ये संभव नहीं। जीपीआरएस से लोकेशन समेत फोटो आ रही है, लेकिन जब उनके पास रात को उसी स्थान की फोटो भेजी गई, तब वे मान गए और कहा कि जरूर कर्मचारी ने उस लोकेशन पर जाकर झूठी रिपोर्ट कर दी। इर्द-गिर्द की फोटो अपलोड कर डाली। उन्होंने रविवार को छुट्टी के दिन कर्मचारी भेजकर फिर मौके से सफाई करवाई।
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डाबड़ा चौक सागर प्रॉपर्टीज के पास और सेंट कबीर स्कूल के सामने से नहीं उठा कचरा
अमर उजाला टीम ने शुक्रवार और शनिवार को भी दो अलग-अलग स्थानों की गंदगी की फोटो डाबड़ा चौक पर सागर प्रॉपर्टीज के पास की डाली थी। दूसरी फोटो सेंट कबीर स्कूल के सामने तोशाम रोड की डाली गई थी। दोनों स्थानों पर रविवार को भी गंदगी ज्यों की त्यों है, लेकिन मैप पर लोकेेशन क्लीयर दिखा रहा है। बिना सफाई किए लोकेशन क्लीयर कैसे हो गई, यह मामला निगम अधिकारियों और कर्मचारियों की पोल खोल रहा है।