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पिता की विरासत और मोदी के नाम का ही सहारा होगा बृजेंद्र सिंह के पास
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हिसार। भारतीय जनता पार्टी की ओर से हिसार लोकसभा सीट पर प्रत्याशी बनाए गए आईएएस बृजेंद्र सिंह के पास पिता की विरासत और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नाम का ही सहारा होगा। अफसर लॉबी से होने के कारण हिसार में उनका ज्यादा सामाजिक ताना-बाना नहीं रहा। मगर उनके पिता हरियाणा की सियासत का बड़ा नाम है। उनके पिता भी हिसार लोकसभा सीट से कांग्रेस की टिकट पर 1984 में चुनाव लड़ चुके हैं। उन्होंने तब ताऊ देवीलाल के बेटे ओमप्रकाश चौटाला को 51 हजार 206 वोटों से करारी शिकस्त दी थी।
दूसरी बार में हार गए थे बीरेंद्र सिंह
हालांकि साल 1989 में फिर से उन्होंने कांग्रेस के टिकट पर ही हिसार लोकसभा का चुनाव लड़ा। मगर जनता दल की लहर के आगे वह नहीं टिक सके। उनको जनता दल के प्रत्याशी जयप्रकाश ने 44 हजार 679 वोटों से हरा दिया था। इसके बाद दोबारा बीरेंद्र सिंह ने हिसार से लोकसभा का चुनाव नहीं लड़ा। हालांकि बीरेंद्र सिंह हिसार जिले में पूरी तरह सक्रिय रहे हैं। साल 2014 में भाजपा में शामिल होने और केंद्रीय मंत्री बनने के बाद भी लगातार उनका हिसार आना-जाना लगा रहा है। हिसार के मतदाताओं का एक वर्ग ऐसा है, जिन पर बीरेंद्र सिंह की अच्छी पकड़ है।
जाट और गैर जाट वोट बैंक का भी रहेगा प्रभाव
दरअसल, हिसार लोकसभा सीट पर कुल मतदाताओं की संख्या 14 लाख से अधिक है। इनमें साढ़े पांच लाख मतदाता जाट समुदाय से हैं। कांग्रेस पार्टी की ओर से कुलदीप बिश्नोई या उनके बेटे भव्य बिश्नोई के चुनाव मैदान में आने के आसार हैं, जबकि जननायक जनता पार्टी से मौजूदा सांसद दुष्यंत चौटाला ही दूसरी बार चुनाव लड़ने का संकेत दे चुके हैं। ऐसे में दुष्यंत और बृजेंद्र सिंह के बीच जाट वोट बैंक बंटेगा, जबकि गैर जाटों वोट बैंक को कुलदीप बिश्नोई अपनी ओर खींचने का प्रयास करेंगे।
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दुष्यंत को उचाना हलका ने दी थी लीड, वहां बीरेंद्र का प्रभाव
हालांकि साल 2014 के लोकसभा चुनाव में सबसे अधिक लीड दुष्यंत चौटाला को उचाना हलके से मिली थी। इस बार बृजेंद्र सिंह के चुनाव लड़ने से उस लीड में सेंध लग सकती है, क्योंकि वहां बीरेंद्र सिंह का अच्छा खासा प्रभाव है। वहीं अगर दुष्यंत के जजपा से और कुलदीप बिश्नोई के परिवार के सदस्य के कांग्रेस से चुनाव लड़ने की बात फाइनल हो जाती है तो हिसार लोकसभा सीट पर मुकाबला दिलचस्प होगा।
हिसार लोकसभा सीट पर परिवारवाद रहेगा हावी
हालांकि हिसार लोकसभा सीट पर बृजेंद्र सिंह को भाजपा प्रत्याशी बनाने के साथ ही परिवारवाद का मुद्दा हावी हो गया है। खास बात यह है कि अगर कुलदीप या भव्य बिश्नोई कांग्रेस से और जजपा से दुष्यंत आते हैं तो तीन राजनीति के दिग्गज परिवारों के बीच मुकाबला होगा।
कई नेताओं का चल रहा था दौड़ में नाम
भाजपा प्रत्याशी बनने की दौड़ में कई नेताओं का नाम चल रहा था। इसमें हाल ही में इनेलो छोड़कर भाजपा में आए पूर्व विधायक रणबीर सिंह गंगवा, पूर्व मंत्री प्रो. छत्रपाल सिंह, उद्योगपति अशोक गोयल मंगालीवाला, भाजपा जिलाध्यक्ष सुरेंद्र पूनियां और मेयर गौतम सरदाना तक के नाम शामिल थे। मगर आखिरी क्षण में बृजेंद्र सिंह को टिकट मिल गया है।
भाजपा की ओर से बृजेंद्र सिंह जैसे युवा और आईएएस अधिकारी को प्रत्याशी बनाया गया है। पार्टी का फैसला हर कार्यकर्ता को मंजूर है। पूरा जोर लगाकर उनको भारी मतों से विजयी बनाएंगे। मैंने कोई दावेदारी नहीं जताई थी। वैसे ही कयास लगाए जा रहे थे।
-रणबीर सिंह गंगवा, पूर्व विधायक, नलवा
मेरे बीरेंद्र सिंह के साथ सामाजिक रिश्ते हैं, लेकिन राजनीतिक तौर पर अलग सिस्टम है। मुझे मीडिया ने कभी दौड़ में माना ही नहीं। अब मैं जो कुछ करूंगा, वह अपने लोगों से चर्चा के बाद कर दूंगा। मगर मीडिया को पहले नहीं बताऊंगा।
-प्रो. छत्रपाल सिंह, पूर्व मंत्री एवं भाजपा नेता
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दूसरी बार में हार गए थे बीरेंद्र सिंह
हालांकि साल 1989 में फिर से उन्होंने कांग्रेस के टिकट पर ही हिसार लोकसभा का चुनाव लड़ा। मगर जनता दल की लहर के आगे वह नहीं टिक सके। उनको जनता दल के प्रत्याशी जयप्रकाश ने 44 हजार 679 वोटों से हरा दिया था। इसके बाद दोबारा बीरेंद्र सिंह ने हिसार से लोकसभा का चुनाव नहीं लड़ा। हालांकि बीरेंद्र सिंह हिसार जिले में पूरी तरह सक्रिय रहे हैं। साल 2014 में भाजपा में शामिल होने और केंद्रीय मंत्री बनने के बाद भी लगातार उनका हिसार आना-जाना लगा रहा है। हिसार के मतदाताओं का एक वर्ग ऐसा है, जिन पर बीरेंद्र सिंह की अच्छी पकड़ है।
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जाट और गैर जाट वोट बैंक का भी रहेगा प्रभाव
दरअसल, हिसार लोकसभा सीट पर कुल मतदाताओं की संख्या 14 लाख से अधिक है। इनमें साढ़े पांच लाख मतदाता जाट समुदाय से हैं। कांग्रेस पार्टी की ओर से कुलदीप बिश्नोई या उनके बेटे भव्य बिश्नोई के चुनाव मैदान में आने के आसार हैं, जबकि जननायक जनता पार्टी से मौजूदा सांसद दुष्यंत चौटाला ही दूसरी बार चुनाव लड़ने का संकेत दे चुके हैं। ऐसे में दुष्यंत और बृजेंद्र सिंह के बीच जाट वोट बैंक बंटेगा, जबकि गैर जाटों वोट बैंक को कुलदीप बिश्नोई अपनी ओर खींचने का प्रयास करेंगे।
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दुष्यंत को उचाना हलका ने दी थी लीड, वहां बीरेंद्र का प्रभाव
हालांकि साल 2014 के लोकसभा चुनाव में सबसे अधिक लीड दुष्यंत चौटाला को उचाना हलके से मिली थी। इस बार बृजेंद्र सिंह के चुनाव लड़ने से उस लीड में सेंध लग सकती है, क्योंकि वहां बीरेंद्र सिंह का अच्छा खासा प्रभाव है। वहीं अगर दुष्यंत के जजपा से और कुलदीप बिश्नोई के परिवार के सदस्य के कांग्रेस से चुनाव लड़ने की बात फाइनल हो जाती है तो हिसार लोकसभा सीट पर मुकाबला दिलचस्प होगा।
हिसार लोकसभा सीट पर परिवारवाद रहेगा हावी
हालांकि हिसार लोकसभा सीट पर बृजेंद्र सिंह को भाजपा प्रत्याशी बनाने के साथ ही परिवारवाद का मुद्दा हावी हो गया है। खास बात यह है कि अगर कुलदीप या भव्य बिश्नोई कांग्रेस से और जजपा से दुष्यंत आते हैं तो तीन राजनीति के दिग्गज परिवारों के बीच मुकाबला होगा।
कई नेताओं का चल रहा था दौड़ में नाम
भाजपा प्रत्याशी बनने की दौड़ में कई नेताओं का नाम चल रहा था। इसमें हाल ही में इनेलो छोड़कर भाजपा में आए पूर्व विधायक रणबीर सिंह गंगवा, पूर्व मंत्री प्रो. छत्रपाल सिंह, उद्योगपति अशोक गोयल मंगालीवाला, भाजपा जिलाध्यक्ष सुरेंद्र पूनियां और मेयर गौतम सरदाना तक के नाम शामिल थे। मगर आखिरी क्षण में बृजेंद्र सिंह को टिकट मिल गया है।
भाजपा की ओर से बृजेंद्र सिंह जैसे युवा और आईएएस अधिकारी को प्रत्याशी बनाया गया है। पार्टी का फैसला हर कार्यकर्ता को मंजूर है। पूरा जोर लगाकर उनको भारी मतों से विजयी बनाएंगे। मैंने कोई दावेदारी नहीं जताई थी। वैसे ही कयास लगाए जा रहे थे।
-रणबीर सिंह गंगवा, पूर्व विधायक, नलवा
मेरे बीरेंद्र सिंह के साथ सामाजिक रिश्ते हैं, लेकिन राजनीतिक तौर पर अलग सिस्टम है। मुझे मीडिया ने कभी दौड़ में माना ही नहीं। अब मैं जो कुछ करूंगा, वह अपने लोगों से चर्चा के बाद कर दूंगा। मगर मीडिया को पहले नहीं बताऊंगा।
-प्रो. छत्रपाल सिंह, पूर्व मंत्री एवं भाजपा नेता