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नाबालिग से रेप करने वाले केयर टेकर के भाई को 14 साल की कैद

Sun, 30 Jul 2017 12:47 AM IST
Updated Sun, 30 Jul 2017 12:47 AM IST
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नाबालिग से रेप करने वाले केयर टेकर के भाई को 14 साल की कैद
अमर उजाला ब्यूरो
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हिसार।
एडीजे डॉ. पंकज की अदालत ने जिले के एक आश्रम में चर्चित यौन शोषण प्रकरण के आरोपी गोपाल दास को 14 साल कैद की सजा सुनाई है। कोर्ट ने दोषी गोपाल को 10 हजार रुपये का जुर्माना भी लगाया है। जुर्माना न देने पर उसे दो महीने की अतिरिक्त सजा काटनी होगी। कोर्ट ने आरोपी को वीरवार को दोषी करार दिया था। इसके अलावा केयर टेकर और एक अन्य आरोपी को कोर्ट ने बरी कर दिया है।
सदर थाना पुलिस ने दो अक्तूबर 2015 को छेड़छाड़, मारपीट करने, अश्लील शब्द बोलने, रेप, पॉक्सो एवं जुवेनाइल जस्टिस एक्ट के तहत केस दर्ज किया था। तत्कालीन डीसी चंद्रशेखर खरे ने केस दर्ज होने से तीन दिन पहले एसपी को शिकायत दी थी। आश्रम में दो किशोरियों के यौन शोषण की बात सामने आई थी। मामला महिला एवं बाल विकास विभाग और पुलिस के पास पहुंच गया था। महिला थाना पुलिस ने दोनों किशोरियों की सिविल अस्पताल में मेडिकल जांच कराई थी। पुलिस ने गोपाल, उसकी केयर टेकर बहन और एक अन्य युवक के खिलाफ विभिन्न धाराओं के तहत केस दर्ज किया था। पुलिस ने बाद में गोपाल दास, विनोद और आश्रम से जुड़ी एक युवती को गिरफ्तार किया था।
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अमर उजाला ने खोली थी परतें, पुलिस की कार्रवाई थी संदिग्ध
इस मामले में अमर उजाला ने परतें खोली थीं। किशोरी को न्याय दिलवाने के लिए अमर उजाला आवाज बना था। पुलिस ने इस मामले में संदिग्ध कार्रवाई की थी। पुलिस ने किशोरी को गुमराह करने की खूब कोशिश की। राजनीतिक दबाव में आकर किशोरी को मेडिकल करवाने से इनकार करवाया गया। मामला एनसीपीसीआर के पास पहुंचाया गया। वहां से टीम ने आश्रम का दौरा किया। इस टीम ने बच्ची का मेडिकल करवाने के निर्देश दिए। इसके बाद दोबारा कार्रवाई शुरू हुई। अमर उजाला खबर में छपी खबर के आधार पर ही टीम हिसार पहुंची थी और मामले में हस्तक्षेप कर केस दर्ज करवाया था।
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नियम अनुसार नहीं मिला था बच्चों के रहने का स्थान
प्रशासनिक और महिला एवं बाल विभाग के अधिकारियों ने आश्रम का दौरा किया था। टीम ने पाया था कि आश्रम में बच्चों के रहने वाली जगह जुवेनाइल जस्टिस एक्ट के अनुसार नहीं है। उस समय आश्रम में रहने वाले 18 साल तक के लड़के-लड़कियों की संख्या लगभग 51 थी। प्रशासन ने महिला एवं बाल विकास विभाग दिल्ली को रिपोर्ट भेजी थी। आश्रम रजिस्टर्ड नहीं मिला था। यह मामला तब खूब चर्चित रहा था।
यूं खुले थे राज
आश्रम में वर्ष आठ मई वर्ष 2015 को स्टेट इंस्पेक्शन कमेटी की टीम आई थी। इस दौरान टीम ने एक किशोरी को उदास बैठे देखा था। टीम के एक सदस्य ने किशोरी से पूछा कि क्या बात है बेटा, सब ठीक तो है। इस पर किशोरी ने केवल इतना कहा कि यहां कुछ ठीक नहीं। इससे ज्यादा उसने कोई बात नहीं की। आश्रम प्रबंधन से भी किशोरी के बारे में पूछा तो उन्होंने कहा कि कुछ नहीं, ये किशोरी पागल है। इसके बाद टीम चली गई और जाते हुए उन्होंने बाल संरक्षण अधिकारी को नाबालिग की काउंसिलिंग करवाकर जांच के आदेश दिए। अधिकारी ने सीपीओ मेंबर को जांच के लिए भेजा। इस दौरान किशोरी की काउंसिलिंग करवाई गई। उसका मानसिक स्तर जांचा तोेे ठीक पाया गया। उसने मामले का खुलासा किया कि उसके साथ मानसिक और शारीरिक शोषण हो रहा है। ऐसा मेरे साथ ही नहीं कई किशोरी के साथ हो रहा है। यहां किसी से शिकायत की जाती है तो उसे ही प्रताड़ित किया जाता है।

ये बताया था किशोरी ने
किशोरी ने बताया था कि आश्रम की केयर टेकर का भाई गोपाल यहां आता-जाता था। वह अपनी बहन के पास मिलने के बहाने आता था। वह उसे गोशाला में किसी काम के बहाने ले गया। उसने उसके साथ जबरदस्ती की। विरोध किया तो मारपीट की और रेप किया। गोपाल पेशे से ऑटो चालक था। जब उसने केयर टेकर को यह बताया तो उसने केवल यह आश्वासन दिया कि उसे समझा देंगे। बात अधिक बढ़ी तो उसे प्रताड़ित भी किया गया।

- कोर्ट ने लगाया 10 हजार का जुर्माना, जुर्माना न देने पर काटनी होगी दो महीने की अतिरिक्त सजा
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