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सैलरी वीक में मंगलवार को भी नहीं मिला कैश
अमर उजाला ब्यूरो/हिसार
Updated Wed, 07 Dec 2016 12:43 AM IST
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एटीएम के बाहर लाइन
- फोटो : अमर उजाला ब्यूरो
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लोगों को मंगलवार को भी कैश नहीं दिला सका। 95 प्रतिशत से अधिक एटीएम कैश न होने के कारण सूने रहे। बैंकों की मुख्य शाखाओं में ही नकदी थी। यह भी कैश दोपहर तक खत्म हो गया। लाइनों में लगे खाली हाथ ही वापस लौटते दिखे।
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नकदी का संकट खत्म नहीं हो पा रहा। सैलरी का वीक होने के कारण ज्यादा दिक्कतें आ रही हैं। लोगों को बैंकों की ओर से राहत नहीं मिल पा रही। डिमांड के बदले महज 20 प्रतिशत ही कैश बैंकों को मिल रहा है। इस कारण बैंक नकदी नहीं दे पा रहे। मंगलवार को भी हजारों लोग लाइनों में लगे। लाइनों में खडे़ लोगों को दोपहर के समय कहा गया कि कैश खत्म हो गया है। जाट कॉलेज के सामने स्थित स्टेट बैंक की मेन ब्रांच में सुबह 8 बजे से ही लोग लाइनों में लग गए थे। दोपहर तक लोगों को सीमित मात्रा में कैश बांटा गया। बैंक के साथ लगाई गई तीनों एटीएम पूरी तरह से खाली रही। किसी भी एटीएम में पैसा नहीं था। पंजाब नेशनल बैंक की बस अड्डे के पास स्थित मेन ब्रांच में भी लोग सुबह से ही अपने पहचान पत्र लेकर लाइनों में खडे़ दिखे। दोपहर बाद यहां भी कैश खत्म हो गया। लोगों ने 24 हजार मांगे तो किसी को 4 तो किसी को दो हजार ही मिले।
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ऐसे कैसे होगा कैशलेस
जिले में सबसे अधिक नकदी पेट्रोल पंपों पर एकत्र होती है। जिले में 165 पेट्रोल पंप हैं। जिनमें केवल 18 पर ही स्वाइप मशीन काम कर रही हैं। ऐसे में हजारों लोग जो कार्ड से पेमेंट करना चाहें तो भी नहीं कर सकेंगे। पेट्रोल पंपों पर रोजाना करोड़ों रुपये की नकदी आती है।
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गैस एजेंसियों पर नहीं स्वाइप मशीन
जिले में 26 गैस एजेंसियां हैं। रोजाना 5 हजार गैस सिलेंडर की खपत होती है। गैस एजेंसियों पर स्वाइप मशीन नहीं हैं। ऐसे में उपभोक्ताओं के सामने कैश देना ही मजबूरी है। गैस एजेंसियों के जरिए भी उपभोक्ता रोजाना कई लाख रुपये चुकाते हैं।
हैंडमेड उत्पादों पर नोटबंदी से संकट
हिसार। छोटे हस्तशिल्पी एवं दस्तकारों को भी नोटबंदी की नजर लग गई है। कच्चा माल नहीं खरीद पाने के कारण छोटे शिल्पीयों को काम लगभग आधा हो गया है। अकसर सड़कों किनारे हाथों से विभिन्न कलाकृतियां एवं अन्य उत्पाद बनाते नजर आने वाले छोटे शिल्पकारों पर नोटबंदी भारी पड़ रही है। फैशन टेक्नोलॉजी पर शोध कर रही कोमलदीप ने बताया कि छोटे शिल्पकार अपने हाथों से बेहतरीन कलाकृतियां एवं अन्य उत्पाद बेहद करीने से बनाते हैं। काठ से बनी हैंडमेड चीजों का विदेशों में खासा आकर्षण रहता है, लेकिन नोटबंदी के बाद दस्तकारों को कच्चा माल मिलने में परेशानी आ रही है।