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इनकम-सर्विस टैक्स रिटर्न में मिला 50 लाख का अंतर, जीएसटी ने 15 व्यापारियों को भेजे नोटिस
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हिसार। इनकम टैक्स रिटर्न व सर्विस टैक्स रिटर्न में करीब 50 लाख रुपये का अंतर मिलने पर जीएसटी कार्यालय की तरफ से 15 व्यापारियों को नोटिस भेजे गए हैं। इन व्यापारियों को एक माह में नोटिस का जवाब देना होगा। इस दौरान व्यापारी संतोषजनक जवाब नहीं दे पाते हैं तो उन्हें तीन व्यक्तिगत सुनवाई का भी मौका दिया जाएगा। अगर इन सुनवाई में व्यापारी सही ढंग से अपना पक्ष नहीं रख पाते हैं तो इन पर लेनदारी तय हो जाएगी। सहायक उपायुक्त कार्यालय को 50 लाख रुपये तक के मामलों में नोटिस भेजने का अधिकार है। अगर इससे ज्यादा की राशि के मामले हैं तो उपायुक्त कार्यालय की तरफ से नोटिस भेजे जाते हैं।
विभाग की तरफ व्यापारियों को भेजे गए नोटिस वित्त वर्ष 2016-17 के हैं। इसके बाद सर्विस टैक्स खत्म कर जीएसटी सिस्टम लागू कर दिया गया था। नियमानुसार वित्त वर्ष के पांच साल के अंदर विभाग ऐसे मामलों में नोटिस भेज सकता है। अधिकारियों की मानें तो वर्ष 2016-17 तक व्यापारियों की तरफ से इनकम टैक्स रिटर्न व सर्विस टैक्स रिटर्न भरी जाती थी। इन दोनों में अगर किसी तरह का अंतर आता था तो विभाग की तरफ से उन्हें सूचित कर दिया जाता था। साथ ही इन पार्टियों कारण बताओ नोटिस करने को कहा जाता है। हालांकि यह जरूरी नहीं है कि अगर दोनों रिटर्न में अंतर है तो किसी तरह की टैक्स चोरी हो सकती है, क्योंकि कई सर्विस टैक्स के दायरे में नहीं आती थी तो इस कारण से भी यह अंतर आ जाता था।
अपील करने का भी मिलता है अधिकार
विभाग की तरफ से पार्टियों की लेनदारी तय होने के बाद भी उन्हें अपील करने का अधिकार दिया जाता है। इसके पहले कमिश्नर अपील पंचकूला व फिर चंडीगढ़ ट्रिब्यूनल और इसके बाद हाई कोर्ट व सुप्रीम कोर्ट में अपील करने का विकल्प होता है।
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विभाग की तरफ व्यापारियों को भेजे गए नोटिस वित्त वर्ष 2016-17 के हैं। इसके बाद सर्विस टैक्स खत्म कर जीएसटी सिस्टम लागू कर दिया गया था। नियमानुसार वित्त वर्ष के पांच साल के अंदर विभाग ऐसे मामलों में नोटिस भेज सकता है। अधिकारियों की मानें तो वर्ष 2016-17 तक व्यापारियों की तरफ से इनकम टैक्स रिटर्न व सर्विस टैक्स रिटर्न भरी जाती थी। इन दोनों में अगर किसी तरह का अंतर आता था तो विभाग की तरफ से उन्हें सूचित कर दिया जाता था। साथ ही इन पार्टियों कारण बताओ नोटिस करने को कहा जाता है। हालांकि यह जरूरी नहीं है कि अगर दोनों रिटर्न में अंतर है तो किसी तरह की टैक्स चोरी हो सकती है, क्योंकि कई सर्विस टैक्स के दायरे में नहीं आती थी तो इस कारण से भी यह अंतर आ जाता था।
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अपील करने का भी मिलता है अधिकार
विभाग की तरफ से पार्टियों की लेनदारी तय होने के बाद भी उन्हें अपील करने का अधिकार दिया जाता है। इसके पहले कमिश्नर अपील पंचकूला व फिर चंडीगढ़ ट्रिब्यूनल और इसके बाद हाई कोर्ट व सुप्रीम कोर्ट में अपील करने का विकल्प होता है।
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