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कॉटन व्यवसाय में टैक्स चोरी करने वाली फर्मों पर शिकंजा कसेंगे तीन विभाग
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अमर उजाला ब्यूरो
हिसार। जिले की पांच कॉटन फर्मों के खिलाफ टैक्स चोरी का केस दर्ज कराने के बाद अब इस दिशा में टैक्स चोरों पर शिकंजा कसने के लिए नई नीति तैयार की गई है। इसके लिए आबकारी विभाग के साथ कृषि विभाग और मार्केटिंग विभाग मिलकर कार्रवाई करेगा। आबकारी विभाग के अधिकारियों, डिप्टी डायरेक्टर कृषि विभाग और डिस्ट्रिक्ट मार्केटिंग एनफोर्समेंट ऑफिसर के नेतृत्व में टीम का गठन किया गया है।
एक्साइज एंड टैक्सेशन कमीश्नर पंचकूला द्वारा हिसार, सिरसा, फतेहाबाद, भिवानी, जींद, रोहतक और पलवल के उप आबकारी एवं कराधान आयुक्तों को लिखे गए पत्र में कहा गया है कि मार्केट फीस और जीएसटी न देने वाली कॉटन मिलों की चेकिंग के लिए जिला स्तर पर एक ज्वाइंट टीम गठित कर चेकिंग की जाए। इसमें आबकारी विभाग के अलावा कृषि विभाग और मार्केटिंग बोर्ड के अधिकारियों को शामिल किया जाए। टीमों का गठन करके चेकिंग करें और मुख्यालय को रिपोर्ट करें। आबकारी विभाग की ओर से एईटीओ अशोक गौतम को को-ऑर्डिनेटर नियुक्त किया गया है, जबकि कृषि विभाग में डिप्टी डायरेक्टर और मार्केटिंग बोर्ड से डीएमईओ को-ऑर्डिनेशन करेंगे।
ऐसे काम करेंगी तीनों विभागों की टीमें
उप-आबकारी एवं कराधान विभाग कृषि उप निदेशक विभाग से जिले में कॉटन का क्षेत्रफल मांगेगा, जिसमें कॉटन की बिजाई की गई होगी। कॉटन का कितना उत्पादन हुआ, इसकी जानकारी भी कृषि विभाग देगा। इसके बाद मार्केटिंग बोर्ड यह डाटा उपलब्ध कराएगा कि जिले की मंडियों में कितनी कॉटन आई और मार्केटिंग फीस के तौर पर कितना रेवेन्यु जनरेट हुआ। इसके बाद सारा काम आबकारी विभाग का रहेगा। इसमें वह चेक करेगा कि कॉटन से कितना टैक्स आया। पूरे डाटा को टेली करने के बाद अंतर देखा जाएगा, जिससे यह पता चल सकेगा कि कॉटन फर्मों द्वारा कितना टैक्स जमा कराया गया और कितने टैक्स की चोरी की गई।
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दूसरी मंडियों में जाने वाले ऐसे आएंगे पकड़ में
विभाग द्वारा इस तरह की नीति तैयार करते समय यह सवाल भी खड़ा हुआ कि कुछ किसान अपने जिले की मंडियों की बजाय दूसरी मंडियों में जाकर अपनी कपास बेच देते हैं। ऐसे में डाटा टेली करना मुश्किल होगा। इसके लिए विभाग ने सभी जिलों में ऐसी टीमें गठित कर डाटा मुख्यालय में मंगवाया है। इससे यह होगा कि एक-दूसरे जिले में जाने वाली कपास की पूरी डिटेल विभाग के पास होगी और प्रदेश में कॉटन की बिजाई व उत्पादन का आंकड़ा भी होगा। ऐसे में कॉटन में टैक्स की घालमेल करने वालों का साफ पता चल सकेगा।
इज ऑफ डूइंग का नियम गले की फांस
आबकारी विभाग के लिए इज ऑफ डूइंग का नियम गले की फांस बना हुआ है। हालांकि सरकार ने इसे छोटे उद्यमियों के लिए आसानी से व्यापार करने के लिए लागू किया, लेकिन इसका फायदा टैक्स में हेराफेरी करने वाले लोग उठा रहे हैं। इसी तरह की पांच कॉटन फर्मों के खिलाफ विभाग ने केस दर्ज कराया है, जिन्होंने फर्म खोली ही नहीं और करोड़ों रुपये की हेरफेर की। इस नियम के तहत फर्म ऑनलाइन रजिस्टर्ड होती है, जिसमें केवल तीन दिन में रजिस्ट्रेशन हो जाता है। इसमें विभाग को फर्म रजिस्ट्रेशन प्रक्रिया की चेकिंग के लिए समय नहीं मिल पाता।
कृषि विभाग और मार्केटिंग बोर्ड के साथ मिलकर कॉटन का डाटा इकट्ठा किया जाएगा, जिसके आधार पर कॉटन बारे सही आकलन किया जा सकेगा। इससे टैक्स जमा कितना हुआ और कितना चोरी हुई, इस बारे में आसानी से पता लगाया जा सकेगा।
- महावीर सिंह, ईटीओ, कार्यालय उप-आबकारी एवं कराधान आयुक्त, हिसार।
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हिसार। जिले की पांच कॉटन फर्मों के खिलाफ टैक्स चोरी का केस दर्ज कराने के बाद अब इस दिशा में टैक्स चोरों पर शिकंजा कसने के लिए नई नीति तैयार की गई है। इसके लिए आबकारी विभाग के साथ कृषि विभाग और मार्केटिंग विभाग मिलकर कार्रवाई करेगा। आबकारी विभाग के अधिकारियों, डिप्टी डायरेक्टर कृषि विभाग और डिस्ट्रिक्ट मार्केटिंग एनफोर्समेंट ऑफिसर के नेतृत्व में टीम का गठन किया गया है।
एक्साइज एंड टैक्सेशन कमीश्नर पंचकूला द्वारा हिसार, सिरसा, फतेहाबाद, भिवानी, जींद, रोहतक और पलवल के उप आबकारी एवं कराधान आयुक्तों को लिखे गए पत्र में कहा गया है कि मार्केट फीस और जीएसटी न देने वाली कॉटन मिलों की चेकिंग के लिए जिला स्तर पर एक ज्वाइंट टीम गठित कर चेकिंग की जाए। इसमें आबकारी विभाग के अलावा कृषि विभाग और मार्केटिंग बोर्ड के अधिकारियों को शामिल किया जाए। टीमों का गठन करके चेकिंग करें और मुख्यालय को रिपोर्ट करें। आबकारी विभाग की ओर से एईटीओ अशोक गौतम को को-ऑर्डिनेटर नियुक्त किया गया है, जबकि कृषि विभाग में डिप्टी डायरेक्टर और मार्केटिंग बोर्ड से डीएमईओ को-ऑर्डिनेशन करेंगे।
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ऐसे काम करेंगी तीनों विभागों की टीमें
उप-आबकारी एवं कराधान विभाग कृषि उप निदेशक विभाग से जिले में कॉटन का क्षेत्रफल मांगेगा, जिसमें कॉटन की बिजाई की गई होगी। कॉटन का कितना उत्पादन हुआ, इसकी जानकारी भी कृषि विभाग देगा। इसके बाद मार्केटिंग बोर्ड यह डाटा उपलब्ध कराएगा कि जिले की मंडियों में कितनी कॉटन आई और मार्केटिंग फीस के तौर पर कितना रेवेन्यु जनरेट हुआ। इसके बाद सारा काम आबकारी विभाग का रहेगा। इसमें वह चेक करेगा कि कॉटन से कितना टैक्स आया। पूरे डाटा को टेली करने के बाद अंतर देखा जाएगा, जिससे यह पता चल सकेगा कि कॉटन फर्मों द्वारा कितना टैक्स जमा कराया गया और कितने टैक्स की चोरी की गई।
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दूसरी मंडियों में जाने वाले ऐसे आएंगे पकड़ में
विभाग द्वारा इस तरह की नीति तैयार करते समय यह सवाल भी खड़ा हुआ कि कुछ किसान अपने जिले की मंडियों की बजाय दूसरी मंडियों में जाकर अपनी कपास बेच देते हैं। ऐसे में डाटा टेली करना मुश्किल होगा। इसके लिए विभाग ने सभी जिलों में ऐसी टीमें गठित कर डाटा मुख्यालय में मंगवाया है। इससे यह होगा कि एक-दूसरे जिले में जाने वाली कपास की पूरी डिटेल विभाग के पास होगी और प्रदेश में कॉटन की बिजाई व उत्पादन का आंकड़ा भी होगा। ऐसे में कॉटन में टैक्स की घालमेल करने वालों का साफ पता चल सकेगा।
इज ऑफ डूइंग का नियम गले की फांस
आबकारी विभाग के लिए इज ऑफ डूइंग का नियम गले की फांस बना हुआ है। हालांकि सरकार ने इसे छोटे उद्यमियों के लिए आसानी से व्यापार करने के लिए लागू किया, लेकिन इसका फायदा टैक्स में हेराफेरी करने वाले लोग उठा रहे हैं। इसी तरह की पांच कॉटन फर्मों के खिलाफ विभाग ने केस दर्ज कराया है, जिन्होंने फर्म खोली ही नहीं और करोड़ों रुपये की हेरफेर की। इस नियम के तहत फर्म ऑनलाइन रजिस्टर्ड होती है, जिसमें केवल तीन दिन में रजिस्ट्रेशन हो जाता है। इसमें विभाग को फर्म रजिस्ट्रेशन प्रक्रिया की चेकिंग के लिए समय नहीं मिल पाता।
कृषि विभाग और मार्केटिंग बोर्ड के साथ मिलकर कॉटन का डाटा इकट्ठा किया जाएगा, जिसके आधार पर कॉटन बारे सही आकलन किया जा सकेगा। इससे टैक्स जमा कितना हुआ और कितना चोरी हुई, इस बारे में आसानी से पता लगाया जा सकेगा।
- महावीर सिंह, ईटीओ, कार्यालय उप-आबकारी एवं कराधान आयुक्त, हिसार।