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हरियाणा में पहली बार हुआ पंडित मांगेराम की जीवनी पर नाट्य मंचन--
Updated Tue, 23 Jan 2018 01:30 AM IST
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अमर उजाला ब्यूरो
हिसार।
अभिनय रंग मंच द्वारा आयोजित नाट्य उत्सव के दूसरे दिन नाटक मांगे प्रेम का मंचन हुआ। अभिनय रंगमंच द्वारा हरियाणा में मांगेराम जी की जीवनी पर नाट्य मंचन किया गया। मांगे प्रेम नाटक हरियाणा के सुप्रसिद्ध कवि पंडित मांगेराम जी की जीवनी पर आधारित है। नाटक में मांगेराम के जन्म से लेकर उनकी मृत्यु तक उनके जीवन के बारे में बताया गया। नाटक में यह बताया गया कि पंडित मांगेराम एक जमींदार के घर में जन्मे और उनके नाना ने उन्हें बचपन से ही गोद ले लिया और वो सुसाणा गांव में जन्म लेकर पाणची निवासी बन गए। नाटक में यह भी बताया गया कि किस तरह मांगेराम अपने गुरु लख्मीचंद से मिले और फिर सांगी बन ने की ठान ली और लख्मीचंद को अपना गुरु मान लिया। नाटक में गुरु लख्मीचंद की अपने पसंदीदा शिष्य मांगेराम से लड़ाई के दृश्य को भी भली भांति दिखाया गया। नाटक में मांगेराम जी द्वारा लिखित रागिनियों को कविताओं के रूप में इस्तेमाल किया गया। नाटक का लेखन, संगीत एवं निर्देशन मनीष जोशी द्वारा किया गया है। अभिनय रंग-मंच की यह कोशिश है कि नाटक के माध्यम से ज्यादा से ज्यादा लोग हरियाणवी संस्कृति और लख्मीचंद, मांगेराम जैसे हरियाणा के सूर्य कवियों के बारे में जान सके। प्रस्तुति के दौरान मांगेराम के सबसे बड़े पुत्र नौरत्न, मांगेराम की पोती प्रियंका कौशिक भी मौजूद रही, हरियाणा के सुप्रसिद्ध साहित्यकार पूर्णचंद शर्मा भी मौजूद रहे और हिसार के कार्टूनिस्ट और कवि मनोज छाबड़ा मौजूद रहे।
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हिसार।
अभिनय रंग मंच द्वारा आयोजित नाट्य उत्सव के दूसरे दिन नाटक मांगे प्रेम का मंचन हुआ। अभिनय रंगमंच द्वारा हरियाणा में मांगेराम जी की जीवनी पर नाट्य मंचन किया गया। मांगे प्रेम नाटक हरियाणा के सुप्रसिद्ध कवि पंडित मांगेराम जी की जीवनी पर आधारित है। नाटक में मांगेराम के जन्म से लेकर उनकी मृत्यु तक उनके जीवन के बारे में बताया गया। नाटक में यह बताया गया कि पंडित मांगेराम एक जमींदार के घर में जन्मे और उनके नाना ने उन्हें बचपन से ही गोद ले लिया और वो सुसाणा गांव में जन्म लेकर पाणची निवासी बन गए। नाटक में यह भी बताया गया कि किस तरह मांगेराम अपने गुरु लख्मीचंद से मिले और फिर सांगी बन ने की ठान ली और लख्मीचंद को अपना गुरु मान लिया। नाटक में गुरु लख्मीचंद की अपने पसंदीदा शिष्य मांगेराम से लड़ाई के दृश्य को भी भली भांति दिखाया गया। नाटक में मांगेराम जी द्वारा लिखित रागिनियों को कविताओं के रूप में इस्तेमाल किया गया। नाटक का लेखन, संगीत एवं निर्देशन मनीष जोशी द्वारा किया गया है। अभिनय रंग-मंच की यह कोशिश है कि नाटक के माध्यम से ज्यादा से ज्यादा लोग हरियाणवी संस्कृति और लख्मीचंद, मांगेराम जैसे हरियाणा के सूर्य कवियों के बारे में जान सके। प्रस्तुति के दौरान मांगेराम के सबसे बड़े पुत्र नौरत्न, मांगेराम की पोती प्रियंका कौशिक भी मौजूद रही, हरियाणा के सुप्रसिद्ध साहित्यकार पूर्णचंद शर्मा भी मौजूद रहे और हिसार के कार्टूनिस्ट और कवि मनोज छाबड़ा मौजूद रहे।