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मिलगेट एरिया में तोड़ी बस्ती की पैमाइश करने पहुंचा प्रशासन
Updated Mon, 18 Sep 2017 12:36 AM IST
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अमर उजाला ब्यूरो
हिसार।
मिलगेट एरिया के उजड़े परिवारों की सीएम से पुनर्वास की मांग के बाद प्रशासन ने रविवार को मौके पर जाकर जमीन की अस्थायी पैमाइश कराई। इससे उजड़े परिवारों ने पुनर्वास की उम्मीद जगी है। प्रशासन ने सवा साल पहले मिलगेट के साथ लगते 120 घरों की बस्ती को जेसीबी से तोड़ा था। प्रशासन का तर्क था कि डीसीएम हाईकोर्ट से जमीन संबंधी मुकदमा जीत चुकी है।
निगरानी समिति के हिसार लोकसभा अध्यक्ष प्रो. मनदीप मलिक, तहसीलदार कनब लाकड़ा, पटवारी मंगतराम, घर बचाओ संघर्ष समिति के प्रधान सुुखदेव चहल, काफी लोग रविवार को 12 बजे मौके पर पहुंचे, लेकिन मिल संबंधी पक्ष गैैरहाजिर रहा। तहसीलदार की टीम ने मिलगेट से कैंची चौक तक मेन सड़क के साथ लगती इस जमीन का मुआयना किया। इस दौरान उजड़े परिवार के काफी सदस्य मौके पर मौजूद थे। उजड़े 120 परिवारों के सदस्यों ने प्रशासन के हरकत में आने से पुनर्वास की उम्मीद जताई है।
मिल की सिर्फ 13 कनाल जमीन
घर बचाओ संघर्ष समिति के अध्यक्ष सुखदेव चहल ने बताया कि पंजाब एंड हरियाणा हाईकोर्ट ने फैसले में महज 13 कनाल जमीन मिल की बताई है। यह सारी जमीन 29 कनाल बनती है। 16 कनाल जमीन सरकारी है। प्रशासन ने इस 29 कनाल जमीन पर बनी सारी बस्ती को पिछले साल जून में जेसीबी से तुड़वा दिया था। चहल का कहना है कि मिल 13 कनाल अपनी जमीन ले ले। उनको कोई एतराज नहीं, लेकिन वे बाकी 16 कनाल जमीन उसे नहीं लेने देंगे।
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पुनर्वास के लिए सीएम से मिले थे
घर बचाओ संघर्ष समिति के अध्यक्ष सुखदेव चहल ने बताया कि वे पुनर्वास की मांग को लेकर सरकार के कई नुमाइंदों और अफसरों से निरंतर मिलते रहे हैं। उन्होंने पिछले दिनों सीएम से पंचायत भवन में खुले दरबार में ज्ञापन देकर पुनर्वास की मांग की थी। सीएम ने प्रशासनिक अधिकारियों से शिकायत का निवारण करने के आदेश दिए थे। उन्होंने कहा कि उनके पुनर्वास की फाइल अब सरकने लगी है। सरकार को वही जमीन हमें देनी चाहिए। उन्होंने कहा कि मिल प्रबंधन ने सारी 29 कनाल जमीन पर चारदीवारी करने का प्रयास किया था, लेकिन हमने प्रयास सफल नहीं होने दिया था।
चार परिवार एक मकान में रहने को मजबूर
बस्ती से उजड़े राजेश कुमार का कहना है कि उनकी बस्ती में मध्यम वर्गीय या निम्न मध्यम वर्गीय परिवार रहते थे। प्रशासन ने बस्ती के घर ढहा दिए थे। उसने बताया कि उजड़े परिवारों में कुछ ऐसे हैं, जो तीन-चार परिवार एक मकान में रहने को मजबूर हैं। उनसे ज्यादा किराया नहीं दिया जाता। इसलिए वे बड़ा मकान नहीं ले सकते हैं। सरकार और प्रशासन को उनका पुनर्वास करना चाहिए। यह बस्ती करीब 45 साल पुरानी थी।
धक्काशाही किसी की नहीं चलने दी जाएगी, चाहे कोई कितना बड़ा क्यों न हो। न किसी से ज्यादती बर्दाश्त होगी। जमीन के संबंध में जो तथ्य सामने आएंगे, उन्हीं के अनुसार समाधान का प्रयास किया जाएगा।
-प्रो. मनदीप मलिक, अध्यक्ष निगरानी समिति हिसार लोकसभा
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हिसार।
मिलगेट एरिया के उजड़े परिवारों की सीएम से पुनर्वास की मांग के बाद प्रशासन ने रविवार को मौके पर जाकर जमीन की अस्थायी पैमाइश कराई। इससे उजड़े परिवारों ने पुनर्वास की उम्मीद जगी है। प्रशासन ने सवा साल पहले मिलगेट के साथ लगते 120 घरों की बस्ती को जेसीबी से तोड़ा था। प्रशासन का तर्क था कि डीसीएम हाईकोर्ट से जमीन संबंधी मुकदमा जीत चुकी है।
निगरानी समिति के हिसार लोकसभा अध्यक्ष प्रो. मनदीप मलिक, तहसीलदार कनब लाकड़ा, पटवारी मंगतराम, घर बचाओ संघर्ष समिति के प्रधान सुुखदेव चहल, काफी लोग रविवार को 12 बजे मौके पर पहुंचे, लेकिन मिल संबंधी पक्ष गैैरहाजिर रहा। तहसीलदार की टीम ने मिलगेट से कैंची चौक तक मेन सड़क के साथ लगती इस जमीन का मुआयना किया। इस दौरान उजड़े परिवार के काफी सदस्य मौके पर मौजूद थे। उजड़े 120 परिवारों के सदस्यों ने प्रशासन के हरकत में आने से पुनर्वास की उम्मीद जताई है।
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मिल की सिर्फ 13 कनाल जमीन
घर बचाओ संघर्ष समिति के अध्यक्ष सुखदेव चहल ने बताया कि पंजाब एंड हरियाणा हाईकोर्ट ने फैसले में महज 13 कनाल जमीन मिल की बताई है। यह सारी जमीन 29 कनाल बनती है। 16 कनाल जमीन सरकारी है। प्रशासन ने इस 29 कनाल जमीन पर बनी सारी बस्ती को पिछले साल जून में जेसीबी से तुड़वा दिया था। चहल का कहना है कि मिल 13 कनाल अपनी जमीन ले ले। उनको कोई एतराज नहीं, लेकिन वे बाकी 16 कनाल जमीन उसे नहीं लेने देंगे।
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पुनर्वास के लिए सीएम से मिले थे
घर बचाओ संघर्ष समिति के अध्यक्ष सुखदेव चहल ने बताया कि वे पुनर्वास की मांग को लेकर सरकार के कई नुमाइंदों और अफसरों से निरंतर मिलते रहे हैं। उन्होंने पिछले दिनों सीएम से पंचायत भवन में खुले दरबार में ज्ञापन देकर पुनर्वास की मांग की थी। सीएम ने प्रशासनिक अधिकारियों से शिकायत का निवारण करने के आदेश दिए थे। उन्होंने कहा कि उनके पुनर्वास की फाइल अब सरकने लगी है। सरकार को वही जमीन हमें देनी चाहिए। उन्होंने कहा कि मिल प्रबंधन ने सारी 29 कनाल जमीन पर चारदीवारी करने का प्रयास किया था, लेकिन हमने प्रयास सफल नहीं होने दिया था।
चार परिवार एक मकान में रहने को मजबूर
बस्ती से उजड़े राजेश कुमार का कहना है कि उनकी बस्ती में मध्यम वर्गीय या निम्न मध्यम वर्गीय परिवार रहते थे। प्रशासन ने बस्ती के घर ढहा दिए थे। उसने बताया कि उजड़े परिवारों में कुछ ऐसे हैं, जो तीन-चार परिवार एक मकान में रहने को मजबूर हैं। उनसे ज्यादा किराया नहीं दिया जाता। इसलिए वे बड़ा मकान नहीं ले सकते हैं। सरकार और प्रशासन को उनका पुनर्वास करना चाहिए। यह बस्ती करीब 45 साल पुरानी थी।
धक्काशाही किसी की नहीं चलने दी जाएगी, चाहे कोई कितना बड़ा क्यों न हो। न किसी से ज्यादती बर्दाश्त होगी। जमीन के संबंध में जो तथ्य सामने आएंगे, उन्हीं के अनुसार समाधान का प्रयास किया जाएगा।
-प्रो. मनदीप मलिक, अध्यक्ष निगरानी समिति हिसार लोकसभा