फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Haryana ›   Hisar News ›   सीएम की डेडलाइन 30 सितंबर को भी स्ट्रै कैटल फ्री नहीं हो पाएगा शहर

सीएम की डेडलाइन 30 सितंबर को भी स्ट्रै कैटल फ्री नहीं हो पाएगा शहर

Fri, 29 Sep 2017 12:49 AM IST
Updated Fri, 29 Sep 2017 12:49 AM IST
विज्ञापन
सीएम की डेडलाइन 30 सितंबर को भी स्ट्रै कैटल फ्री नहीं हो पाएगा शहर
अमर उजाला ब्यूरो
विज्ञापन

हिसार।
सीएम मनोहर लाल की ओर से प्रदेश को 30 सितंबर को स्ट्रे कैटल फ्री करने के लिए डेडलाइन दी गई थी। सीएम की इस डेडलाइन पर हिसार लावारिस पशु मुक्त नहीं हो पाएगा। शहर की सड़कों पर अब भी सैकड़ों नहीं हजारों की संख्या में लावारिस पशु हैं। निगम के मुख्य प्रोजेक्ट गो अभयारण्य की डिजाइन पर फिर ऑब्जेक्शन लग गई है। ऐसे में शहर को बेसहारा पशु मुक्त बनाने में एक बार फिर से अड़चन आएगी।
हिसार को स्ट्रे कैटल फ्री घोषित करने के लिए जनवरी 2017 में 30 जून की डेडलाइन तय की गई थी। इसके बाद 30 जुलाई फिर 15 अगस्त तय की गई। इसके बाद 31 अगस्त की तारीख तय की। पांचवीं 10 सितंबर की डेडलाइन थी। सीएम मनोहर लाल ने सितंबर के पहले सप्ताह में पूरे प्रदेश के लिए 30 सितंबर की डेडलाइन तय की थी। इस डेडलाइन पर भी शहर पशु मुक्त नहीं हो पाएगा। यहां यह भी जान लें कि सीएम मनोहर लाल ने 30 दिसंबर 2014 को हिसार में गो अभयारण्य बनाने का एलान किया था। सीएम का यह एलान तीन साल में भी पूरा होता नहीं दिख रहा। करीब 50 एकड़ में प्रस्तावित गो अभयारण्य में एक ही शेड बन सका है। यह शेड भी सांसद दुष्यंत चौटाला की ओर से दी गई 20 लाख की ग्रांट से बना है। प्रदेश सरकार की ग्रांट तो अब तक मंजूर ही नहीं हो सकी है।
विज्ञापन

इससे पहले भी लग चुकी ऑब्जेक्शन
अप्रूवल के लिए भेजी गई डिजाइन फाइल ऑब्जेक्शन लगकर निगम कार्यालय में आ गई है। चीफ इंजीनियर गुरुग्राम ने इसे ऑब्जेक्शन दूर कर फिर से भेजने के लिए लिखा है। इसके अलावा अधिकारियों को डिजाइन व फाइल स्पाइनिल बाइंडिंग कर भेजनी है। सीएम एनाउंसमेंट के मुख्य प्रोजेक्ट में ऑब्जेक्शन वाली यह पहली बात नहीं है, इससे पहले भी इस प्रोजेक्ट के डिजाइन और एस्टिमेट को लेकर ऑब्जेक्शन लग चुकी है। इसके बाद ही इसे दोबारा भेजा गया था।
विज्ञापन
विज्ञापन

चार करोड़ रुपये का है प्रोजेक्ट
गो अभयारण्य का यह प्रोजेक्ट फिलहाल चार करोड़ रुपये का है। इससे पहले यह प्रोजेक्ट 10 करोड़ रुपये का था। इस प्रोजेक्ट को लेकर गो सेवा आयोग ने धन की कमी बताते हुए इसे कम कम करने के लिए लिखा था। दूसरे जिला में बनने वाले गो अभयारण्य की तर्ज पर इसे भी चार करोड़ रुपये तक का ही प्रोजेक्ट तैयार करने के लिए कहा गया था। इसके बाद मुख्यालय के आदेश आने पर इसे री डिजाइन करवाना पड़ा और एस्टिमेट में बदलाव करना पड़ा।
ढंढूर की 50 एकड़ जमीन पर बनना है गो अभयारण्य
प्रदेश का पहला गो अभयारण्य हिसार शहर के बाहर ढूंढर गांव में बनाया जाना है। इसको लेकर 50 एकड़ जमीन जीएलएफ से ली गई थी। इस जमीन के साढ़े 12 एकड़ में नंदीशाला बनाई जा रही है। नंदीशाला का निर्माण लगभग पूरा हो चुका है। इस नंदीशाला में पानी की लाइन इत्यादि का काम बाकी है।

ऑब्जेक्शन लगी है। जल्द ही इसे दूर करवा दिया जाएगा। इस बार यह फाइल बाई हैंड लेकर जाएंगे। जल्द ही अप्रूवल मिलने की उम्मीद है। - विवेक गिल, एक्सईएन नगर निगम


हजारों की संख्या में सड़कों पर लावारिस पशु
जिले में करीब 13651 पशुओं की गणना की गई थी। करीब 35 गांव में पशु बाडे़ बनाए गए हैं। इसके अलावा शहर में नंदीशाला बनाई गई है। इसमें करीब आठ हजार पशु पकड़ने का दावा किया गया है। इसमें कुछ गो वंश को गोशालाओं में भी भेजा गया है। अगर इस आंकडे़ को पूरा सही भी मान लें तो भी प्रशासन के आंकडे़ के अनुसार ही चार से पांच हजार पशु सड़कों पर हैं।
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed