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Hisar News: राष्ट्रीय लोक अदालत में एक दिन में 29501 केस निपटाए
Sun, 13 Jul 2025 12:04 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, हिसार
संवाद न्यूज एजेंसी, हिसार
Updated Sun, 13 Jul 2025 12:04 AM IST
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सिरसा। राष्ट्रीय लोक अदालत में केसों की सुनवाई करते न्यायाधीश। संवाद
सिरसा। हरियाणा राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण के निर्देशानुसार शनिवार को न्यायालय परिसर सिरसा,ऐलनाबाद व डबवाली में राष्ट्रीय लोक अदालत का आयोजन किया गया। राष्ट्रीय लोक अदालत में विभिन्न न्यायालयों में 31 हजार 277 केसों में से 29 हजार 501 केसों का निपटारा किया गया। जिला विधिक सेवा प्राधिकरण के सचिव एवं मुख्य न्यायिक दंडाधिकारी प्रवेश सिंगला ने बताया कि राष्ट्रीय लोक अदालत में 6 बेंचों का गठन किया गया था। 29 हजार 501 केसों का निपटान कर पीड़ितों को 18 करोड़ 05 लाख 75 हजार 897 रुपये क्लेम राशि दी गई है।
लोक अदालत में चेक बाउंस, बैक रिकवरी, मोटर वाहन दुर्घटना,घरेलू विवाद,बिजली व पानी से संबंधित विवाद, दिवानी विवाद से जुड़े मामले शामिल थे। सचिव वाणी प्रवेश सिंगला ने बताया कि राष्ट्रीय लोक अदालत में अतिरिक्त प्रधान न्यायाधीश फैमिली कोर्ट सुमित गर्ग, अतिरिक्त जिला एवं सत्र न्यायाधीश नवजीत क्लेयर, न्यायिक दंडाधिकारी एवं प्रिंसिपल मजिस्ट्रेट जेजेबी एवं अतिरिक्त सिविल जज राकेश कादयान, सिविल जज जूनियर डिवीजन एवं न्यायिक दंडाधिकारी प्रथम श्रेणी रिचू, सिविल जज जूनियर डिवीजन एवं न्यायिक दंडाधिकारी प्रथम श्रेणी एवं उपमंडल न्यायिक दंडाधिकारी डबवाली सुमन पटलेन व अतिरिक्त सिविल जज सीनियर डिवीजन एवं उपमंडल न्यायिक दंडाधिकारी ऐलनाबाद आशीष आर्य ने केसों की सुनवाई की।
जिला विधिक सेवा प्राधिकरण के सचिव एवं मुख्य न्यायिक दंडाधिकारी प्रवेश सिंगला ने बताया कि लोक अदालत की प्रक्रिया बड़ी सरल एवं संक्षिप्त है क्योकि इसमें दोनों पक्षों को आमने-सामने बैठाकर बातचीत द्वारा समझौता करवाया जाता है, जिससे उनका आपसी मनमुटाव समाप्त हो जाता है। लोक अदालत की खास बात ये है कि इसमें फैसला होने के बाद फैसले को किसी भी न्यायालय में चुनौती नहीं दी जा सकती। लोक अदालत की प्रक्रिया बिलकुल संक्षिप्त व साधारण है।
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सिरसा न्यायालय में इतने केसों का सुनाया फैसला
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आपराधिक 5
श्रम विवाद 330
एमएसीटी 11
वैवाहिक विवाद 402
एनआई एक्ट 423
अन्य सिविल मामले 7125
अन्य/पीएलए 2893
राजस्व मामले 7115
सेवा संबंधी मामले 10500
ट्रैफिक चालान 25
इस प्रकार के मामले लाए जा सकते हैं
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लोक अदालत में वैवाहिक मामले, सिविल मामले पेंशन और अन्य सेवा संबंधी मामले जैसे कि रेलवे, श्रम विवाद भूमि अधिग्रहण मामले, मनरेगा से जुड़े मामले, बिजली, पानी, बैंक से जुड़े मामले, आपदा मुआवजा जैसे कि फसल में आग लग जाना इत्यादि मामले लाए जा सकते हैं।
कैदियों को दी जाती है सहायता
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जिला विधिक सेवा प्राधिकरण की ओर से विचाराधीन कैदियों को कानूनी सहायता भी दी जाती है। इसके लिए विधिक सेवा द्वारा जेल परिसर में मुफ्त कानूनी सहायता केंद्र की भी व्यवस्था की गई है, जिसमें पैनल अधिवक्ता जेल के अंदर जाकर कानून की जानकारी व केस लडऩे के लिए वकीलों की सेवाओं की दरख्वास्त लेकर सेवाएं प्रदान की जाती है।
गांवों में लगाए जाते हैं जागरूकता शिविर
राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण ग्रामीण स्तर पर निशुल्क कानूनी साक्षरता शिविर भी आयोजित करता है। शिविर में ग्रामीणों को उनके कानूनी अधिकार बताए जाते हैं। जिला बार एसोसिएशन के पूर्व उपाध्यक्ष एडवोकेट लक्की दुग्गल ने बताया कि मुफ्त कानूनी सहायता कोई दान नहीं है यह आपका संवैधानिक व कानूनी अधिकार है। आम जनता को जागरूक करने के लिए राज्य के पिछड़े एवं दूरदराज के इलाकों में कानूनी शिविर लगाए जाते है।
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लोक अदालत में चेक बाउंस, बैक रिकवरी, मोटर वाहन दुर्घटना,घरेलू विवाद,बिजली व पानी से संबंधित विवाद, दिवानी विवाद से जुड़े मामले शामिल थे। सचिव वाणी प्रवेश सिंगला ने बताया कि राष्ट्रीय लोक अदालत में अतिरिक्त प्रधान न्यायाधीश फैमिली कोर्ट सुमित गर्ग, अतिरिक्त जिला एवं सत्र न्यायाधीश नवजीत क्लेयर, न्यायिक दंडाधिकारी एवं प्रिंसिपल मजिस्ट्रेट जेजेबी एवं अतिरिक्त सिविल जज राकेश कादयान, सिविल जज जूनियर डिवीजन एवं न्यायिक दंडाधिकारी प्रथम श्रेणी रिचू, सिविल जज जूनियर डिवीजन एवं न्यायिक दंडाधिकारी प्रथम श्रेणी एवं उपमंडल न्यायिक दंडाधिकारी डबवाली सुमन पटलेन व अतिरिक्त सिविल जज सीनियर डिवीजन एवं उपमंडल न्यायिक दंडाधिकारी ऐलनाबाद आशीष आर्य ने केसों की सुनवाई की।
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जिला विधिक सेवा प्राधिकरण के सचिव एवं मुख्य न्यायिक दंडाधिकारी प्रवेश सिंगला ने बताया कि लोक अदालत की प्रक्रिया बड़ी सरल एवं संक्षिप्त है क्योकि इसमें दोनों पक्षों को आमने-सामने बैठाकर बातचीत द्वारा समझौता करवाया जाता है, जिससे उनका आपसी मनमुटाव समाप्त हो जाता है। लोक अदालत की खास बात ये है कि इसमें फैसला होने के बाद फैसले को किसी भी न्यायालय में चुनौती नहीं दी जा सकती। लोक अदालत की प्रक्रिया बिलकुल संक्षिप्त व साधारण है।
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सिरसा न्यायालय में इतने केसों का सुनाया फैसला
आपराधिक 5
श्रम विवाद 330
एमएसीटी 11
वैवाहिक विवाद 402
एनआई एक्ट 423
अन्य सिविल मामले 7125
अन्य/पीएलए 2893
राजस्व मामले 7115
सेवा संबंधी मामले 10500
ट्रैफिक चालान 25
इस प्रकार के मामले लाए जा सकते हैं
लोक अदालत में वैवाहिक मामले, सिविल मामले पेंशन और अन्य सेवा संबंधी मामले जैसे कि रेलवे, श्रम विवाद भूमि अधिग्रहण मामले, मनरेगा से जुड़े मामले, बिजली, पानी, बैंक से जुड़े मामले, आपदा मुआवजा जैसे कि फसल में आग लग जाना इत्यादि मामले लाए जा सकते हैं।
कैदियों को दी जाती है सहायता
जिला विधिक सेवा प्राधिकरण की ओर से विचाराधीन कैदियों को कानूनी सहायता भी दी जाती है। इसके लिए विधिक सेवा द्वारा जेल परिसर में मुफ्त कानूनी सहायता केंद्र की भी व्यवस्था की गई है, जिसमें पैनल अधिवक्ता जेल के अंदर जाकर कानून की जानकारी व केस लडऩे के लिए वकीलों की सेवाओं की दरख्वास्त लेकर सेवाएं प्रदान की जाती है।
गांवों में लगाए जाते हैं जागरूकता शिविर
राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण ग्रामीण स्तर पर निशुल्क कानूनी साक्षरता शिविर भी आयोजित करता है। शिविर में ग्रामीणों को उनके कानूनी अधिकार बताए जाते हैं। जिला बार एसोसिएशन के पूर्व उपाध्यक्ष एडवोकेट लक्की दुग्गल ने बताया कि मुफ्त कानूनी सहायता कोई दान नहीं है यह आपका संवैधानिक व कानूनी अधिकार है। आम जनता को जागरूक करने के लिए राज्य के पिछड़े एवं दूरदराज के इलाकों में कानूनी शिविर लगाए जाते है।