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हैरानी मीटिंग से पहले अब निगम को मिल गयी बंदर पकड़ने वाली एजेंसी
Updated Tue, 14 Nov 2017 12:38 AM IST
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अमर उजाला ब्यूरो
हिसार।
हाउस की मीटिंग से पहले निगम अधिकारियों ने जनप्रतिनिधियों को शांत रखने के लिए बंदर पकड़वाने के लिए टेंडर जारी कर दिया है। निगम ने मथुरा व राजस्थान की बंदर पकड़ने वाली टीम के सामने नया प्रतियोगी खड़ा कर दिया है। टेंडर लेने वाली एजेंसी अब मथुरा या राजस्थान की नहीं बल्कि भिवानी की है। इस एजेंसी ने करीब 775 रुपये प्रति बंदर पकड़ने की डिमांड की है। अधिकारियों ने इसके नाम टेंडर जारी कर दिया है। एक से दो दिन के अंदर वर्क ऑर्डर जारी भी हो जाएंगे। इसके बाद एजेंसी बंदर पकड़ने का काम शुरू कर देगी
कलेसर में छोड़ने के लिए गाड़ी देनी होगी निगम को
कांट्रेक्टर ने नगर निगम से बंदरों को कलेसर के जंगल में छोड़ने के लिए गाड़ी मांगी है। यानी बंदरों को पकड़ने के बाद कलेसर छोड़ने का खर्च कांट्रेक्टर के कांट्रेक्ट में नहीं है। परिवहन का खर्च निगम को देना होगा। नगर निगम के अधिकारियों ने कहा है कि फिलहाल शहर में एक हजार बंदर पकड़े जाने का टेंडर दिया गया है। पूरे शहर में कुल एक हजार बंदर पकड़े जाएंगे। अगर वार्ड के हिसाब से बात करें तो 50-50 बंदर प्रति वार्ड के हिसाब से पकड़े जाएंगे।
इस बार आई तीन एजेंसियां
नगर निगम में बंदर पकड़ने का टेंडर भरने के लिए इस बार नगर निगम में तीन एजेंसियां आई हैं। इसमें मथुरा व राजस्थान की एजेंसी है। सबसे कम रेट देने वाली इस बार भिवानी की ही एजेंसी है। निगम अब इस एजेंसी को बंदर पकड़ने की अनुमति देगा।
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वर्जन
बंदर पकड़वाने के लिए लगाए गए टेंडर खुल गए हैं। भिवानी की एक एजेंसी के सबसे कम रेट हैं। जल्द ही इसे वर्क ऑर्डर जारी कर दिया जाएगा- जयबीर यादव, ज्वाइंट कमिश्नर नगर निगम।
भिवानी की टीम पकड़ेगी शहर के बंदर
- निगम ने मथुरा व राजस्थान की बंदर पकड़ने वाली टीम के सामने नया प्रतियोगी खड़ा किया
- 775 रुपये प्रति बंदर के हिसाब से बंदर पकड़ेगी भिवानी की टीम
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हिसार।
हाउस की मीटिंग से पहले निगम अधिकारियों ने जनप्रतिनिधियों को शांत रखने के लिए बंदर पकड़वाने के लिए टेंडर जारी कर दिया है। निगम ने मथुरा व राजस्थान की बंदर पकड़ने वाली टीम के सामने नया प्रतियोगी खड़ा कर दिया है। टेंडर लेने वाली एजेंसी अब मथुरा या राजस्थान की नहीं बल्कि भिवानी की है। इस एजेंसी ने करीब 775 रुपये प्रति बंदर पकड़ने की डिमांड की है। अधिकारियों ने इसके नाम टेंडर जारी कर दिया है। एक से दो दिन के अंदर वर्क ऑर्डर जारी भी हो जाएंगे। इसके बाद एजेंसी बंदर पकड़ने का काम शुरू कर देगी
कलेसर में छोड़ने के लिए गाड़ी देनी होगी निगम को
कांट्रेक्टर ने नगर निगम से बंदरों को कलेसर के जंगल में छोड़ने के लिए गाड़ी मांगी है। यानी बंदरों को पकड़ने के बाद कलेसर छोड़ने का खर्च कांट्रेक्टर के कांट्रेक्ट में नहीं है। परिवहन का खर्च निगम को देना होगा। नगर निगम के अधिकारियों ने कहा है कि फिलहाल शहर में एक हजार बंदर पकड़े जाने का टेंडर दिया गया है। पूरे शहर में कुल एक हजार बंदर पकड़े जाएंगे। अगर वार्ड के हिसाब से बात करें तो 50-50 बंदर प्रति वार्ड के हिसाब से पकड़े जाएंगे।
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इस बार आई तीन एजेंसियां
नगर निगम में बंदर पकड़ने का टेंडर भरने के लिए इस बार नगर निगम में तीन एजेंसियां आई हैं। इसमें मथुरा व राजस्थान की एजेंसी है। सबसे कम रेट देने वाली इस बार भिवानी की ही एजेंसी है। निगम अब इस एजेंसी को बंदर पकड़ने की अनुमति देगा।
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बंदर पकड़वाने के लिए लगाए गए टेंडर खुल गए हैं। भिवानी की एक एजेंसी के सबसे कम रेट हैं। जल्द ही इसे वर्क ऑर्डर जारी कर दिया जाएगा- जयबीर यादव, ज्वाइंट कमिश्नर नगर निगम।
भिवानी की टीम पकड़ेगी शहर के बंदर
- निगम ने मथुरा व राजस्थान की बंदर पकड़ने वाली टीम के सामने नया प्रतियोगी खड़ा किया
- 775 रुपये प्रति बंदर के हिसाब से बंदर पकड़ेगी भिवानी की टीम