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सरसों बेचने के लिए किसानों को लगना पड़ा लाइन में

Sat, 20 Apr 2019 12:20 AM IST
Rohtak Bureau रोहतक ब्यूरो
Updated Sat, 20 Apr 2019 12:20 AM IST
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सरसों बेचने के लिए किसानों को लगना पड़ा लाइन में
हिसार। अनाज मंडी में किसानों अपनी सरसों की फसल बेचने के लिए शुक्रवार को घंटों लाइन में लगना पड़ा। उन्हें फसल बेचने के लिए टोकन लेना था। शुक्रवार को काजला व किरतान गांव की सरसों की खरीद की जानी थी। इन गांवों के करीब 550 किसान मंडी पहुंचे हुए थे। हालांकि शाम तक सभी किसानों की सरसों की खरीद कर ली गई, लेकिन उन्हें टोकन प्राप्त करने के लिए सुबह से लेकर दोपहर बाद तक का इंतजार करना पड़ा। इस बात को लेकर किसानों में खासा रोष दिखाई दिया। उनका कहना था कि ऑनलाइन जमा कराने के बावजूद उन्हें घंटों लाइन में लगना पड़ रहा है। उधर, मंडी में गेहूं की आवक भी बढ़ रही है।
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शुक्रवार को किरतान और काजला गांव के करीब 550 किसान मंडी में सुबह-सवेरे ही पहुंच गए थे। उन्हें अपनी सरसों की फसल बेचने के लिए मार्केट कमेटी से टोकन प्राप्त करना था। कमेटी कार्यालय में एक साथ किसानों की भारी भीड़ जुट गई। इसके चलते लाइन लगा दी गई और भीड़ के मद्देनजर शांति व्यवस्था बनाए रखने के लिए एहतियातन पुलिस भी बुला ली गई। सुबह से लाइन में लगे किसानों के फार्म दोपहर बाद तक ही जमा हो पाए।
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ये बोले किसान

कई घंटे लाइन में लगने के बाद नंबर आया है। पहले ऑनलाइन रजिस्ट्रेशन कराया और अब टोकन के लिए लाइन में लगना पड़ा। जब खरीद का सिस्टम ऑनलाइन किया गया है तो फिर लाइन में लगने का क्या फायदा।
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- सुनील कुमार, किसान किरतान।


किसान पहले भी लाइन में लगते थे और अब ऑनलाइन होने के बाद भी लाइन में लगना पड़ रहा है। आज भी कई घंटे बाद टोकन मिल पाया है। यह टोकन देने की प्रक्रिया भी सरकार को ऑनलाइन करनी चाहिए।
शमशेर सिंह, किसान, पूर्व सरपंच काजला।


जब लाइन में ही लगना है तो ऑनलाइन प्रक्रिया का क्या फायदा है। बहुत सारे किसानों से कमेटी में ऑफलाइन फार्म जमा करा लिए गए, लेकिन उन्हें ऑनलाइन नहीं किया गया, जिस कारण उनकी फसल की सरकारी खरीद होने से रह गई।
-पवन कुमार, किसान एवं सरपंच काजला।

800 रुपये का अंतर
सरसों के भाव में करीब 800 रुपये का अंतर है। यदि किसान प्राइवेट बेचते हैं तो उन्हें करीब 3400 रुपये प्रति क्विंटल के हिसाब से दाम मिलते हैं, जबकि सरकारी खरीद 4200 रुपये प्रति क्विंटल की जा रही है। सरकार प्रति एकड़ आठ क्विंटल की खरीद कर रही है। इसके यदि किसी के पास ज्यादा एकड़ की फसल है तो सरकार अधिकतम 25 क्विंटल तक खरीदती है। इससे ज्यादा फसल एक ही किसान की नहीं खरीदी जाती।
ये है प्रक्रिया
आधार कार्ड, मोबाइल नंबर, फर्द नंबर, बैंक खाता नंबर के साथ सीएससी में या स्वयं भी ऑनलाइन का फार्म भरा जा सकता है। किसान का रजिस्ट्रेशन हो जाता है और उसका एक मैसेज किसान के पास आता है। संबंधित मंडी में गांवों के दिन निर्धारित किए हुए हैं। उसी निर्धारित दिन को मंडी में पहुंच कर अपनी फसल बेच सकते हैं।

मंडी में पहुंच चुका 15 हजार क्विंटल गेहूं
स्थानीय अनाज मंडी में अब तक करीब 15 हजार क्विंटल गेहूं पहुंच चुका है। इसमें से 5460 क्विंटल गेहूं की सरकारी खरीद हो चुकी है। शुक्रवार को 3010 क्विंटल गेहूं खरीदा गया। इससे पहले 1050 और 1400 क्विंटल गेहूं खरीदा गया था। गेहूं की खरीद हैफेड और डीएफएसआई द्वारा की जा रही है। बीच में बरसात के कारण दो दिन खरीद कार्य नहीं हो पाया था।



इंटरनेट में दिक्कत के कारण पहले पोर्टल नहीं चल रहा था। आज पोर्टल चला है तो किसानों के फार्म जमा कराए जा रहे हैं। करीब 10 हजार किसानों ने ऑनलाइन फार्म जमा कराए हैं। बचे हुए लगभग 4700 फार्म ऑनलाइन करने हैं। आज ही सभी किसानों के फार्म जमा कर लिए जाएंगे। किसी किसान को दिक्कत नहीं आने देंगे, सरकार के निर्देशानुसार किसान का एक-एक दाना खरीदा जाएगा।
-महाबीर जांगड़ा, चेयरमैन, मार्केट कमेटी, हिसार।
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