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गिरफ्तार रोडवेज के 37 कर्मचारियों को देर रात जमानत,किरमारा , पाबड़ा दूसरे केस में फंसे
Updated Thu, 06 Sep 2018 01:27 AM IST
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अमर उजाला ब्यूरो
हिसार। हाईकोर्ट के आदेश तथा एस्मा के बावजूद रोडवेज ने चक्का जाम किया तो प्रशासन ने सख्ती बरतते हुए प्रधान दलबीर किरमारा सहित 37 लोगों को गिरफ्तार कर लिया। कर्मचारियों की गिरफ्तारी के बाद प्रशासन ने धीरे धीरे बसों का संचालन शुरू कराया। कुुल 226 बसों में से 83 बसों को चलाने का दावा किया गया। देर रात रोडवेज के 35 कर्मचारियों को निजी मुचलके पर जमानत पर रिहा कर दिया। रोडवेज कर्मचारी यूनियन के प्रधान दलबीर किरमारा, कुलदीप पाबड़ा को कैमरा तोड़ने के केस चलते जमानत नहीं मिली।
रात 12 बजे से ही रोडवेज कर्मचारियों ने बसों को बंद कर दिया। सुबह करीब साढे़ तीन बजे एक चालक ने बस चलाने का प्रयास किया। कर्मचारियों ने इसका विरोध किया तो चालक ने गेट के बीच में बस रोक दी। डीएसपी ने उसे बस चलाने को कहा, लेकिन काफी देर तक बस में बैठने के बाद चालक हाथ जोड़कर नीचे उतर गया। इस दौरान गाली-गलौच भी हुईं। वर्कशॉप के बाहर हड़ताली कर्मचारियों ने नारेबाजी शुरू कर दी। सुबह चंडीगढ़, दिल्ली, गुरुग्राम सहित अन्य रूट के लिए चलने वाली करीब 30 से अधिक बसों के समय ठप हो गए। करीब 8 बजे पुलिस ने कर्मचारी नेताओं को हिरासत में लेकर बसों में बिठाना शुरू कर दिया। दलबीर किरमारा, रमेश सैनी ने हिरासत में लिए जाने का कड़ा विरोध जताया। 37 कर्मचारियों को पुलिस बस में बैठाकर ले जाया गया। कर्मचारियों की गिरफ्तारी के समय तनाव की स्थिति बन गई थी। बस स्टैंड पर मौजूद ड्यूटी मजिस्ट्रेट नायब तहसीलदार हरकेश गुप्ता, डीएसपी अमरजीत सिंह, डीएसपी दलजीत सिंह, रोडवेज यातायात प्रबंधक जितेन्द्र सिंह ने रोडवेज की बसों को बूथों पर लगवाया। सुबह 10.30 बजे तक कुछ रूटों पर बसें चलाई गई। सभी रूटों पर बस सेवाएं शाम तक सुचारु नहीं हो पाई।
यूनियन नेताओं ने कहा कच्चे कर्मचारियों को नौकरी से हटाने का दबाव डालकर बसें चलाने का प्रयास किया गया। कर्मचारी इतनी संख्या में नहीं थे कि सभी रूटों पर बसें चलाई जा सकें। कर्मचारी नेताओं की गिरफ्तारी व जबरदस्ती बसें चलवाने के विरोध स्वरूप रोडवेज कर्मचारियों व उनके समर्थन में आए संगठनों ने पारिजात चौक पर प्रदर्शन किया।
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कर्मचारी नेता राजपाल नैन, किसान नेता का. कृष्णस्वरूप गोरखपुरिया, रमेश बैनीवाल, जयभगवान बड़ाला, सतपाल डाबला, सुभाष ढिल्लो, राजू बिश्नोई, जोगेंद्र लांबा, विजय सिंह चैहड़कलां, रमेश श्योकंद व कुलदीप बैनीवाल व जगमति मलिक ने कहा राज्य कमेटी के फैसले के अनुसार आगामी कार्रवाई की जाएगी।
रोडवेज ने कर रखी थी छुट्टियां रद्द
रोडवेज प्रशासन ने हड़ताल पर पाबंदी के चलते एस्मा लगा रखा था। एस्मा के तहत रोडवेज प्रशासन ने वर्कशॉप व अन्य जगहों पर नोटिस चस्पा रखे थे। इन नोटिसों में कर्मचारियों को ड्यूटी पर तैनात रहने के आदेश लिखे हुए थे। साथ ही हाजिरी न लगाने वाले कर्मचारी के खिलाफ एस्मा के तहत कार्रवाई होने बारे चेता रखा था।
प्राइवेट बसें लगी पहले बूथों पर
रोडवेज कर्मचारियों के हड़ताल पर जाने के कारण यात्री परेशान थे। इसका फायदा उठाते हुए प्राइवेट बस संचालकों ने अपनी बसें बूथों पर लगानी शुरू कर दी। इन बसों के चलने से यात्रियों ने राहत की सांस ली। लेकिन लंबी दूरी की बसें नहीं चलने से यात्री दोपहर तक परेशान रहे।
37 कर्मचारियों को जमानत, किरमारा को दूसरे केस में फंसाया
रोडवेज बसों का संचालन रोक करने के प्रयास में पुलिस ने 37 कर्मचारियों को गिरफ्तार किया। यातायात प्रबंधक जितेंद्र यादव की शिकायत पर कर्मचारी नेता दलबीर किरमारा, सुशील कुमार, जोगेन्द्र, ईश्वर सिंह, रामपाल, रामबिलास, ओमप्रकाश, सुरेंद्र सिंह, अनिल कुमार, नरेंद्र कुमार, रवि शर्मा, रोहताश, विक्रम, कुलबीर, कुलदीप सिंह, राम सिंह, सुभाष, प्रेम सिंह, बहादुर सिंह, आत्माराम, सुरेंद्र सिंह, रमेश कुमार, सुरेश, पटेल सिंह, बुधराम, रमेश कुमार, सतबीर सिंह, पवन कुमार, सतपाल सिंह, पवन कुमार, दर्शन कुमार, धर्मपाल, वजीर सिंह, कृष्ण कुमार, जोगेन्द्र सिंह को गिरफ्तार किया। देर रात सभी को निजी मुचलके पर रिहा कर दिया। प्रधान दलबीर किरमारा व कुलदीप पाबड़ा को फोटोग्राफर से मारपीट तथा कैमरा तोड़ने के मामले में गिरफ्तार रखा गया है।
हमने करीब 75 प्रतिशत बसों का संचालन शुरू करा दिया है। बुधवार को 83 बसों को चलाया गया। हड़ताल के कारण जो कर्मचारी नहीं आए उन पर कार्रवाई की जाएगी। इस बारे में मुख्यालय को रिपोर्ट बनाकर भेज दी है।
- जितेंद्र यादव, वर्कशाप मैनेजर, हिसार
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हिसार। हाईकोर्ट के आदेश तथा एस्मा के बावजूद रोडवेज ने चक्का जाम किया तो प्रशासन ने सख्ती बरतते हुए प्रधान दलबीर किरमारा सहित 37 लोगों को गिरफ्तार कर लिया। कर्मचारियों की गिरफ्तारी के बाद प्रशासन ने धीरे धीरे बसों का संचालन शुरू कराया। कुुल 226 बसों में से 83 बसों को चलाने का दावा किया गया। देर रात रोडवेज के 35 कर्मचारियों को निजी मुचलके पर जमानत पर रिहा कर दिया। रोडवेज कर्मचारी यूनियन के प्रधान दलबीर किरमारा, कुलदीप पाबड़ा को कैमरा तोड़ने के केस चलते जमानत नहीं मिली।
रात 12 बजे से ही रोडवेज कर्मचारियों ने बसों को बंद कर दिया। सुबह करीब साढे़ तीन बजे एक चालक ने बस चलाने का प्रयास किया। कर्मचारियों ने इसका विरोध किया तो चालक ने गेट के बीच में बस रोक दी। डीएसपी ने उसे बस चलाने को कहा, लेकिन काफी देर तक बस में बैठने के बाद चालक हाथ जोड़कर नीचे उतर गया। इस दौरान गाली-गलौच भी हुईं। वर्कशॉप के बाहर हड़ताली कर्मचारियों ने नारेबाजी शुरू कर दी। सुबह चंडीगढ़, दिल्ली, गुरुग्राम सहित अन्य रूट के लिए चलने वाली करीब 30 से अधिक बसों के समय ठप हो गए। करीब 8 बजे पुलिस ने कर्मचारी नेताओं को हिरासत में लेकर बसों में बिठाना शुरू कर दिया। दलबीर किरमारा, रमेश सैनी ने हिरासत में लिए जाने का कड़ा विरोध जताया। 37 कर्मचारियों को पुलिस बस में बैठाकर ले जाया गया। कर्मचारियों की गिरफ्तारी के समय तनाव की स्थिति बन गई थी। बस स्टैंड पर मौजूद ड्यूटी मजिस्ट्रेट नायब तहसीलदार हरकेश गुप्ता, डीएसपी अमरजीत सिंह, डीएसपी दलजीत सिंह, रोडवेज यातायात प्रबंधक जितेन्द्र सिंह ने रोडवेज की बसों को बूथों पर लगवाया। सुबह 10.30 बजे तक कुछ रूटों पर बसें चलाई गई। सभी रूटों पर बस सेवाएं शाम तक सुचारु नहीं हो पाई।
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यूनियन नेताओं ने कहा कच्चे कर्मचारियों को नौकरी से हटाने का दबाव डालकर बसें चलाने का प्रयास किया गया। कर्मचारी इतनी संख्या में नहीं थे कि सभी रूटों पर बसें चलाई जा सकें। कर्मचारी नेताओं की गिरफ्तारी व जबरदस्ती बसें चलवाने के विरोध स्वरूप रोडवेज कर्मचारियों व उनके समर्थन में आए संगठनों ने पारिजात चौक पर प्रदर्शन किया।
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कर्मचारी नेता राजपाल नैन, किसान नेता का. कृष्णस्वरूप गोरखपुरिया, रमेश बैनीवाल, जयभगवान बड़ाला, सतपाल डाबला, सुभाष ढिल्लो, राजू बिश्नोई, जोगेंद्र लांबा, विजय सिंह चैहड़कलां, रमेश श्योकंद व कुलदीप बैनीवाल व जगमति मलिक ने कहा राज्य कमेटी के फैसले के अनुसार आगामी कार्रवाई की जाएगी।
रोडवेज ने कर रखी थी छुट्टियां रद्द
रोडवेज प्रशासन ने हड़ताल पर पाबंदी के चलते एस्मा लगा रखा था। एस्मा के तहत रोडवेज प्रशासन ने वर्कशॉप व अन्य जगहों पर नोटिस चस्पा रखे थे। इन नोटिसों में कर्मचारियों को ड्यूटी पर तैनात रहने के आदेश लिखे हुए थे। साथ ही हाजिरी न लगाने वाले कर्मचारी के खिलाफ एस्मा के तहत कार्रवाई होने बारे चेता रखा था।
प्राइवेट बसें लगी पहले बूथों पर
रोडवेज कर्मचारियों के हड़ताल पर जाने के कारण यात्री परेशान थे। इसका फायदा उठाते हुए प्राइवेट बस संचालकों ने अपनी बसें बूथों पर लगानी शुरू कर दी। इन बसों के चलने से यात्रियों ने राहत की सांस ली। लेकिन लंबी दूरी की बसें नहीं चलने से यात्री दोपहर तक परेशान रहे।
37 कर्मचारियों को जमानत, किरमारा को दूसरे केस में फंसाया
रोडवेज बसों का संचालन रोक करने के प्रयास में पुलिस ने 37 कर्मचारियों को गिरफ्तार किया। यातायात प्रबंधक जितेंद्र यादव की शिकायत पर कर्मचारी नेता दलबीर किरमारा, सुशील कुमार, जोगेन्द्र, ईश्वर सिंह, रामपाल, रामबिलास, ओमप्रकाश, सुरेंद्र सिंह, अनिल कुमार, नरेंद्र कुमार, रवि शर्मा, रोहताश, विक्रम, कुलबीर, कुलदीप सिंह, राम सिंह, सुभाष, प्रेम सिंह, बहादुर सिंह, आत्माराम, सुरेंद्र सिंह, रमेश कुमार, सुरेश, पटेल सिंह, बुधराम, रमेश कुमार, सतबीर सिंह, पवन कुमार, सतपाल सिंह, पवन कुमार, दर्शन कुमार, धर्मपाल, वजीर सिंह, कृष्ण कुमार, जोगेन्द्र सिंह को गिरफ्तार किया। देर रात सभी को निजी मुचलके पर रिहा कर दिया। प्रधान दलबीर किरमारा व कुलदीप पाबड़ा को फोटोग्राफर से मारपीट तथा कैमरा तोड़ने के मामले में गिरफ्तार रखा गया है।
हमने करीब 75 प्रतिशत बसों का संचालन शुरू करा दिया है। बुधवार को 83 बसों को चलाया गया। हड़ताल के कारण जो कर्मचारी नहीं आए उन पर कार्रवाई की जाएगी। इस बारे में मुख्यालय को रिपोर्ट बनाकर भेज दी है।
- जितेंद्र यादव, वर्कशाप मैनेजर, हिसार