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गंभीर बीमारी से जूझ रहे बच्चे को लेकर अभिभावक विभाग व अस्पताल के लगा रहे चक्कर
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अमर उजाला ब्यूरो
हिसार। जन्म से ही गंभीर बीमारी हाइड्रोसिफ्लस का शिकार गांव बुढाखेड़ा निवासी राजू अपने ढाई वर्षीय बच्चे के इलाज और आर्थिक सहायता के लिए बाल कल्याण समिति और सामान्य अस्पताल के चक्कर लगाकर थक चुका है, लेकिन किसी ने सुध नहीं ली है
हालात यह है कि बीमारी के चलते बच्चे प्रिंस के दोनों पैर खराब हो गए हैं और काम करना छोड़ चुके हैं। इसके साथ ही बच्चे की बीमारी के चलते सिर में एक तरह का तरल पदार्थ भर जाने के कारण सिर का आकार भी बढ़ा हुआ है। महता ने बताया कि विभाग की पीड़ित परिवार की अनदेखी के बाद अब राष्ट्रीय बाल संरक्षण आयोग को भी इस बारे में अवगत कराया गया है। इस पर आयोग के रजिस्ट्रार डॉ जगन्नाथ पति ने स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण विभाग के मुख्य सचिव सहित जिला उपायुक्त को आवश्यक कार्रवाई का निर्देश देते हुए रिपोर्ट तलब की है।
सामाजिक कार्यकर्ता प्रवीन महता ने बताया कि पीड़ित एक गरीब परिवार से संबंधित है और बच्चे के इलाज के लिए आर्थिक परेशानी से जूझ रहा है। फिर भी विभाग व अस्पताल प्रशासन उनकी परेशानी का कोई समाधान नहीं कर रहे हैं। बच्चे का पिता राजू जिला बाल कल्याण समिति के समक्ष बच्चे को साथ लेकर पेश हो चुका है। समिति के आदेश पर सिविल सर्जन हिसार को बाल संरक्षण विभाग द्वारा पत्र लिखने के बावजूद बच्चे के इलाज को लेकर कोई सकारात्मक संज्ञान नहीं लिया गया है। अगर ऐसे हालात में बच्चे का इलाज नहीं किया गया तो बीमारी के चलते उसकी आंखें भी खराब हो सकती है। इसके साथ ही शरीर के अन्य मुख्य अंगों पर भी असर पड़ सकता है।
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हिसार। जन्म से ही गंभीर बीमारी हाइड्रोसिफ्लस का शिकार गांव बुढाखेड़ा निवासी राजू अपने ढाई वर्षीय बच्चे के इलाज और आर्थिक सहायता के लिए बाल कल्याण समिति और सामान्य अस्पताल के चक्कर लगाकर थक चुका है, लेकिन किसी ने सुध नहीं ली है
हालात यह है कि बीमारी के चलते बच्चे प्रिंस के दोनों पैर खराब हो गए हैं और काम करना छोड़ चुके हैं। इसके साथ ही बच्चे की बीमारी के चलते सिर में एक तरह का तरल पदार्थ भर जाने के कारण सिर का आकार भी बढ़ा हुआ है। महता ने बताया कि विभाग की पीड़ित परिवार की अनदेखी के बाद अब राष्ट्रीय बाल संरक्षण आयोग को भी इस बारे में अवगत कराया गया है। इस पर आयोग के रजिस्ट्रार डॉ जगन्नाथ पति ने स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण विभाग के मुख्य सचिव सहित जिला उपायुक्त को आवश्यक कार्रवाई का निर्देश देते हुए रिपोर्ट तलब की है।
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सामाजिक कार्यकर्ता प्रवीन महता ने बताया कि पीड़ित एक गरीब परिवार से संबंधित है और बच्चे के इलाज के लिए आर्थिक परेशानी से जूझ रहा है। फिर भी विभाग व अस्पताल प्रशासन उनकी परेशानी का कोई समाधान नहीं कर रहे हैं। बच्चे का पिता राजू जिला बाल कल्याण समिति के समक्ष बच्चे को साथ लेकर पेश हो चुका है। समिति के आदेश पर सिविल सर्जन हिसार को बाल संरक्षण विभाग द्वारा पत्र लिखने के बावजूद बच्चे के इलाज को लेकर कोई सकारात्मक संज्ञान नहीं लिया गया है। अगर ऐसे हालात में बच्चे का इलाज नहीं किया गया तो बीमारी के चलते उसकी आंखें भी खराब हो सकती है। इसके साथ ही शरीर के अन्य मुख्य अंगों पर भी असर पड़ सकता है।
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