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पांच साल से कैक्टस की देखरेख कर रहा 12 साल का लक्ष्य, प्रतियोगिता में उनके पौधों को देखा तक नहीं, बिगड़ी तबीयत

Wed, 04 Mar 2020 01:09 AM IST
Rohtak Bureau रोहतक ब्यूरो
Updated Wed, 04 Mar 2020 01:09 AM IST
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12-year lakshya care of cactus for five years
12-year lakshya care of cactus for five years - फोटो : Hisar
जब सात साल का था तो लक्ष्य को पौधों से प्यार हो गया। अपने पापा के साथ जिद करके स्कूल में देखे पौधों कोे घर पर लगाने की जिद करने लगा। घर पर पौधे लगाने के बाद सुबह-शाम अपने पिता के साथ उनकी देखभाल करनी शुरू कर दी। फूलों के पौधों के अलावा कैक्टस के पौधे भी तैयार करने लगा। सुबह उठने से लेकर शाम को सोते वक्त तक फूल-पौधों से खेलने और उनका पालन पोषण करने वाला 12 वर्षीय लक्ष्य मंगलवार को गुरु जंभेश्वर विश्वविद्यालय में आयोजित 7वीं पुष्प प्रदर्शनी में अपने पिता वेदपाल के साथ पहुंचा।
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पिता-पुत्र 22 तरह के कैक्टस को प्रदर्शनी में लेकर पहुंचे थे। वेदपाल ने आरोप लगाया कि उनके कैक्टस को प्रतियोगिता के दौरान निर्णायकों द्वारा देखा भी नहीं गया। 12 साल का लक्ष्य मायूस हो गया और पिता के साथ घर वापस पहुंचते-पहुंचते उसे बुखार हो गया। लक्ष्य ने कहा कि उसकी पॉजिशन नहीं आई, इस बात का गम नहीं है। दुख इस बात का है कि प्रतियोगिता में शामिल होने के बाद भी उनके पौधों का निरीक्षण तक नहीं किया गया।
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गांव सिवानी बोलान से आए वेदपाल ने बताया कि कैक्टस को प्रदर्शनी में शामिल न करने पर उसने एतराज भी जताया और उसकी शिकायत वीसी से भी। इतना ही नहीं जब मंच पर वीसी के सामने प्रदर्शनी में दोबारा भाग न लेने की बात भी कही। वेदपाल अपने रोते हुए बेटे के साथ घर लौट गया। वेदपाल ने कहा कि प्रदर्शनी में हिस्सा लेने के लिए उसे बुलाया गया था, वह पहली बार प्रदर्शनी में भाग ले रहा है।
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गुजवि में लगाई गई पुष्प प्रदर्शनी में प्रतिभागियों ने निर्णायक मंडल पर पक्षपात करने का आरोप लगाया है। इस संबंध में प्रतिभागियों ने कुलपति को लिखित शिकायत भी दी। पुष्प प्रदर्शनी में प्रतिभागियों ने कहा कि निर्णायक मंडल के सदस्यों ने उनके लगाए गए गमलों व फूलों को देखा तक नहीं। उन्होंने कहा कि मंडल के सदस्य अपने गिन-चुने ही प्रतिभागियों की प्रदर्शनी को ही देखा। उन्होंने इस संबंध में कुलपति को शिकायत देकर उचित कार्रवाई की मांग की। वहीं हिसार के सेक्टर 14 से आईं नीलू सिक्का ने बताया कि वह 12 साल से पुष्प प्रदर्शनी में भाग ले रही हैं। उनके पिता भी पुष्प प्रदर्शनी में जज की भूमिका निभाते थे। प्रदर्शनी में उन्होंने वेलेंटाइन स्पेशल हार्ट स्कॉप व सकुलेंट वैरायटी के होयाकोई के पौधे लगाए, लेकिन निर्णायक मंडल के सदस्यों ने उनके पौधों को देखा तक नहीं। वहीं एक अन्य प्रतिभागी के पौधे में नंबर नहीं डाला गया, स्पेशल बुलवाकर नंबर डलवाया गया। नियमानुसार नंबर नहीं डाले हुए पौधे के प्रतिभागी को अयोग्य कर दिया जाता है। वहीं ए-2 कैटेगरी में जिस प्लांट को प्रथम पुरस्कार दिया गया है, उसमें प्लास्टिक का इस्तेमाल किया गया है, जबकि प्लास्टिक बैन है।
प्रतियोगिता में सभी के पौधों को देखा जाना जरूरी होता है, हमारे निर्णायकों ने भी जरूर देखा होगा। फिर भी कोई शिकायत है तो हम जांच करवाएंगे।
- प्रो. टंकेश्वर कुमार, कुलपति, गुजवि
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