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सता पक्ष ने केंद्रीय बजट को सराहा तो विपक्ष ने बताया चुनावी जुमला

Sat, 02 Feb 2019 01:31 AM IST
Rohtak Bureau रोहतक ब्यूरो
Updated Sat, 02 Feb 2019 01:31 AM IST
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सता पक्ष ने केंद्रीय बजट को सराहा तो विपक्ष ने बताया चुनावी जुमला
अमर उजाला ब्यूरो
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हिसार। केंद्र सरकार की ओर से शुक्रवार को पेश किए गए बजट को लेकर पक्ष और विपक्ष ने अपनी मिली जुली प्रतिक्रिया दी है। सत्ता पक्ष ने जहां बजट को सराहते हुए इसे किसान सहित हर वर्ग का हितैषी बताया है। वहीं विपक्ष का कहना है कि इस बजट में ऐसा कुछ नहीं है, जिससे लोगों को राहत मिल सके। यह बजट सिर्फ चुनावी जुमला है। किसानों को भी राहत देने के नाम पर सिर्फ जले पर नमक छिड़का है। हालांकि इनकम टैक्स की छूट सीमा ढाई लाख से पांच लाख रुपये तक करने को नौकरीपेशा लोगों ने सराहनीय कदम बताया है।


आयकर टैक्स स्लैब में बड़े बदलाव के साथ पांच लाख रुपये तक की आय पर टैक्स छूट का जो प्रस्ताव रखा है, उससे देश के करीब तीन करोड़ लोगों सहित अधिकांश मध्यम आय वर्ग को सीधा लाभ मिलेगा। स्टैंडर्ड डिडक्शन को भी 40 हजार से बढ़ाकर 50 हजार रुपये करने और बैंकों में जमा एफडी के ब्याज पर भी 40 हजार तक कोई टैक्स नहीं लगने जैसे फैसले सराहनीय हैं, जो विशेष रूप से मध्यम वर्ग के लिए फायदेमंद हैं।
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-हरपाल सिंह धायल, सीए

सरकार द्वारा प्रस्तुत अंतरिम बजट को संतुलित कहा जा सकता है, क्योंकि यह हर वर्ग को किसी न किसी तरीके से फायदा पहुंचाने वाला है। इनकम टैक्स रिटर्न की प्रोसेस 24 घंटे में पूरी होगी, जिससे लोगों को भारी सुविधा मिलेगी। कैपिटल गेन टैक्स का बेनिफिट भी दो हाउस तक क्लेम करने की घोषणा से लाखों लोगों को फायदा होगा।
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दीपक धनखड़, सीए

केंद्र सरकार प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में हर वर्ग के भले के लिए लगातार प्रयासरत है। शुक्रवार को पेश किए गए बजट में भी इसकी झलक देखने को मिली है। किसानों, व्यापारियों से लेकर नौकरीपेशा तक को इस बजट में राहत दी गई है। इनकम टैक्स छूट सीमा 5 लाख तक करना भी सराहनीय कदम है।
सुरेंद्र पूनिया, जिलाध्यक्ष, भाजपा

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का विजन इस बजट में देखने को मिला है। बजट की प्रत्येक घोषणा आम जनजीवन पर सकारात्मक प्रभाव डालेगी। राष्ट्रीय कामधेनु आयोग की स्थापना भी सराहनीय प्रयास है। इससे गोवंश को सहारा मिलेगा और उनके लिए ज्यादा प्रयास होंगे।
-गौतम सरदाना, मेयर नगर निगम

वित्तमंत्री पीयूष गोयल ने बजट में न्यू इंडिया की झलक पेश की है। हर वर्ग का इसमें ख्याल रखा गया है। निश्चित रूप से मोदी सरकार जनता के हितों को ध्यान में रखकर फैसले ले रही है। हरियाणा को एक और एम्स मिलने से प्रदेश वासियों को भी लाभ होगा।
-भीम महाजन, युवा भाजपा नेता

कर्मचारी हित में पहली बार बजट देखने को मिला है। इनकम टैक्स में छूट की सीमा पांच लाख रुपये करने से नौकरीपेशा लोगों को बड़ा फायदा होगा। इनकम में से कटने वाले हाउसिंग बिल्डिंग लोन के ब्याज को भी डेढ़ लाख से दो लाख कर दिया गया है। इसी तरह ग्रेच्युटी में भी बढ़ोतरी करने से लाभ मिलेगा।
-सियानंद टेकना, प्रिंसिपल, राकवमाविद्यालय, खरबला खेड़ा

इस बार पूरी उम्मीद थी कि केंद्र सरकार इनकम टैक्स में छूट देगी। उम्मीदों पर खरा उतरते हुए वित्तमंत्री ने बजट में इनकम टैक्स छूट पांच लाख करके लाभ पहुंचाया है। यह फैसला कर्मचारी वर्ग के लिए सराहनीय है।
देवीलाल नेगी, अध्यापक


यूजीसी की छात्रवृत्ति बढ़ाने से युवाओं खासकर विद्यार्थियों को सीधा लाभ मिलेगा। असंगठित क्षेत्र में काम करने वालों को नई सामाजिक सुरक्षा योजना का एलान भी उपयोगी है। इस क्षेत्र में 60 साल की उम्र पार करने वालों को 3 हजार रुपये पेंशन देना भी ऐतिहासिक फैसला है।
-सुनील कुमार, युवा छात्र नेता

नरेंद्र मोदी सरकार युवाओं को दो करोड़ रोजगार देने का वादा करके सत्ता में आई थी। मगर फिलहाल यह सरकार रोजगार देने में नाकाम रही है। अब लोकसभा चुनावों को देखते हुए फिर से बजट में लुभावने वादे किए गए हैं। युवा इस बार बहकावे में नहीं आएगा।
-बबलू कुलचानिया, युवा

युवाओं को स्वावलंबी बनाने के लिए लगातार मोदी सरकार प्रयास कर रही है। घर खरीदने वालों को जीएसटी की दर में कमी करने का सुझाव देकर भी अच्छा कदम उठाया है। स्वरोजगार देने के लिए लोन भी दे रहे हैं। कुल मिलाकर केंद्रीय बजट सराहनीय है।
-विनेश नागपाल, युवा

पहले जैसे किसानों का नाम लिया जा रहा था, वैसे तो अब खोदा पहाड़ निकली चुहिया जैसी कहावत चरितार्थ हो गई। खेती करने वाले किसान की हालत कैंसर के मरीज जैसी है। सरकार ने उसका इलाज करने के बजाय की गोली दे दी है, ताकि वोट मिल सके। सिर्फ 6 हजार रुपये सालाना देने का वादा चुनावी जुमला है। कम से कम पांच हजार रुपये प्रति महीने सरकार को देने चाहिए थे। किसानों का कर्जा माफ कर खाद बीज पर सब्सिडी, सस्ता डीजल देकर प्रधानमंत्री फसल बीमा के नाम पर की जा रही लूट को बंद करना चाहिए था। -दयानंद पूनिया, राज्य सचिव, किसान सभा

केंद्र सरकार की तरफ से पेश किया गया बजट किसान विरोधी है। जनता इसका जवाब चुनाव में देगी। किसानों को उम्मीद थी कि बजट में स्वामीनाथन कमेटी की रिपोर्ट को लागू किया जाएगा। फसलों के समर्थन मूल्य पर शत-प्रतिशत खरीद का प्रावधान होगा, किसानों की कर्जा माफी होगी, फसल बीमा योजना में प्रीमियम कम होगा। मगर सरकार द्वारा ऐसा कोई निर्णय नहीं लिया गया। किसान सम्मान योजना केवल किसान वोट पाने की योजना है। अगर सीधे सहायता राशि देनी है तो तेलंगाना राज्य की तर्ज पर दी जाए। यह बजट पूरी तरह से निराशाजनक है।
रवि आजाद, युवा प्रदेशाध्यक्ष, भाकियू

केंद्र सरकार ने जो बजट पेश किया है, उसमें किसानों के साथ भद्दा मजाक किया गया है। 66 पैसे प्रतिदिन एक किसान को देकर ही भाजपा किसान की आय दोगुना करना चाहती है। भारत देश के आजाद होने के बाद से अब तक किसी भी प्रधानमंत्री ने इतना भद्दा मजाक किसानों के साथ नहीं किया। केंद्र सरकार किसानों को सिर्फ यह लॉलीपोप देकर किसानों को वोट बैंक समझने की भूल कर रही है। इसका जवाब किसान जल्द ही भाजपा को देंगे।
-सुरेश कोथ, राष्ट्रीय अध्यक्ष, भारतीय किसान संघर्ष समिति।

केंद्र की मोदी सरकार लगातार महिलाओं के हित में कदम उठा रही है। अब भी लोन संबंधी योजनाओं का महिलाएं भी लाभ उठाकर स्वावलंबी बन सकती है। निश्चित रूप से यह बजट सराहनीय है।
-बबली चाहर, कामकाजी महिला

केंद्र सरकार के बजट में घर खरीदने वालों के लिए जीएसटी की दर में कमी करने का सुझाव उपयोगी है। इनकम टैक्स में पांच लाख तक छूट का प्रावधान स्वागत योग्य कदम है। अभी युवाओं को रोजगार देने के मामले में केंद्र सरकार को और प्रयास करने चाहिए थे।

अंतरिम बजट होने के बावजूद केंद्र सरकार ने अच्छा बजट पेश किया है। एमएसएमई को ब्याज पर दो प्रतिशत की छूट देना भी अच्छा कदम है। कुछ चीजें ऐसी हैं, जिनकी देश को बहुत जरूरत है। रक्षा बजट बढ़ाकर सरकार ने मजबूत इरादे दिखाए हैं।

-अजय बत्रा, व्यापारी

केंद्र सरकार के बजट से व्यापारी वर्ग भी खुश है। छोटे और मध्यम वर्ग के व्यापारियों को भी लाभ मिला है। पांच लाख रुपये तक इनकम टैक्स में छूट से भी फायदा होगा। किसान मजबूत होगा तो व्यापारी अपने आप खुशहाल हो जाएगा, क्योंकि किसानों से ही व्यापार आगे बढ़ता है।
महेश चौधरी, प्रधान, राजगुरु मार्केट एसोसिएशन
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