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सीएम के टेक्निकल एडवाइजर ने खोली पोल...
Updated Thu, 21 Dec 2017 01:02 AM IST
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अमर उजाला ब्यूरो
हिसार।
थर्ड पार्टी, मेयर, ज्वाइंट कमिश्नर सहित कई अधिकारियों को एकत्रित कर मॉनीटरिंग का ड्रामा करने वाले नगर निगम की सीएम के टेक्निकल एडवाइजर विशाल सेठ ने पोल खोल दी। टेक्निकल एडवाइजर ने कहा कि आपकी सड़कों में पत्थर कम हैं। उन्होंने कैमरी रोड पर पेटी भरवाई तो वहां पत्थर कम निकला। सात ईंटों के उखाड़ने के बाद केवल एक पेटी रोड़ा भरा गया। जबकि टेक्निकल एडवाइजर ने अधिकारियों की आम लोगों को बेवकूफ बनाने वाली टेक्निक का खुलासा कर दिया।
उन्होंने कहा कि सात ईंटों के नीचे एक पेटी नहीं बल्कि सवा पेटी रोड़ा निकलना चाहिए। एक पेटी दबाने से बनता है। पेटी में भरा जाने वाला रोड़ा बिना कैंप्रेश (दबाया) होता है। उन्होंने अधिकारियों को चैलेंज किया कि अगर कहीं भी जहां आप कहो वहीं चेक कर लेते हैं। मैंने रात को सारी सड़कें देख ली। इस पर अधिकारियों ने कहा कि साहब हमारे सभी सड़कों में इतना ही रोड़ा मिलेगा। इस पर टेक्निकल एडवाइजर ने कहा कि मुझे आगे एक भी कोई ऐसी सड़क नहीं मिलनी चाहिए वरना मैं फिर बख्शूंगा नहीं। आपके खिलाफ सीधा लिख दूंगा।
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निकाली कमियां, बोले-पत्थर पर चिकनी मिट्टी क्यों डाली
टेक्निकल एडवाइजर ने कहा कि पत्थर पर चिकनी मिट्टी क्यों डाली। एस्टीमेट में क्या है। उन्होंने अधिकारियों से सवाल किया कि सैंड की परिभाषा क्या है। कहा बालू ईज नॉट सैंड। उन्होंने टेक्निकल रूप में कई कमियां निकाली और कहा कि इसका एंगल फ्रेम क्या है। इस पर स्क्रीन भी नहीं डाली गई। डब्ल्यूबीएम भी ठीक नहीं। टेक्निकल एडवाइजर ने चिकनी मिट्टी की लेयर डालने को लेकर अधिकारियों को फटकार लगाई। दुकानदारों ने चेकिंग कर रही टीम को खूब खरी खरी सुनाई। उन्होंने कहा कि ये क्या चेक कर रहो हो साहब आपके पीछे की सड़क चेक करो। एक से डेढ़ साल पहले बनी थी और हालात देख लो सारी टूट गई। इसके बाद विशाल सेठ ने उस सड़क को भी देखा।
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ज्वाइनिंग से पहले सीसी की सड़क को ठीक करवाने की कार्रवाई करे
कैमरी रोड की सड़क को लेकर आम लोगों के सवाल उठाने पर टेक्निकल एडवाइजर ने सेक्टर 15 मोड़ पर बीएंडआर की सीसी की सड़क देखी। उन्होंने कहा कि 20 साल चलने वाली सड़क डेढ़ साल में ही कैसे टूट गई। बीएंडआर के एक्सईएन कौन है। फोन पर जब उनकी बात करवाई गई तो कहा कि यहां से रिलीव और आगे ज्वाइंनिंग होने से पहले मुझे इस सड़क की पूरी डिटेल चाहिए और सड़क तोड़कर बनानी है या इसे कैसे ठीक करवाना है या फिर रिकवरी करनी है ये क्लीयर लिखकर ट्रांसफर वाली जगह जाओगे। ये सभी जानकारी मेरी मेल पर पहुंच जानी चाहिए। अगर रिकवरी करनी है तो ये सड़क आप लोग गावड़िया ठेकेदार की बता रहें हैं उनके काम कई जगह चल रहे हैं रिकवरी डाल दो।
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टेक्निकल एडवाइजर ने कहा होना चाहिए 1.9 क्यूबिक मीटर रोडा
विशाल सेठ ने पहले ही मोबाइल पर कैलकुलेट कर लिया। उन्होंने इंटरलोकिंग टाइलों की बाइंडिंग के काम से 7 ईंटें निकलवाई। सात ईंटें निकलाने के बाद एक पेटी यानी एक फुट पत्थर निकला। उन्होंने अधिकारियों से पहले पूछा कि ये पत्थर पूरा है। निगम अधिकारी बोले बिल्कुल ठीक है सर। उन्होंने पेटी उठवाकर समतल जगह पर रखवा ली और कहा कि देख लो भाई कहीं मिट्टी में कोई और पत्थर छिपा हो तो निकाल लो फिर मुझे मत कहना। कोई अधिकारी कुछ नहीं बोला। उन्होंने कहा कि ये पत्थर कम है। एक नहीं सवा फुट पत्थर होना चाहिए।
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वर्जन
कई जगह कमियां मिली है। हुडा की कम्युनिटी सेंटर की बिल्डिंग में भी कुछ कमियां थी। बीएंडआर की रोड में भी कमियां थी। तुलना करें तो बीएंडआर का काम निगम व हुडा से अच्छा है। पहला मौका है हिदायत दी है जल्द दोबारा आऊंगा फिर बचने का कोई मौका नहीं मिलेगा।
- विशाल सेठ, टेक्निकल एडवाइजर टू सीएम।
शहर की सड़कों पर निगम डाल रहा कम रोड़ा, जांच में खुली पोल
52 से 54 तथा 56 से 60 पेज एक सेकेंड लीड
- सीएम के टेक्निकल एडवाइजर विशाल सेठ ने जांच की सड़कों की
- बोले मेरे को दोबारा एक भी जगह ऐसी मिल गई तो मैं आपके खिलाफ लिखूंगा
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हिसार।
थर्ड पार्टी, मेयर, ज्वाइंट कमिश्नर सहित कई अधिकारियों को एकत्रित कर मॉनीटरिंग का ड्रामा करने वाले नगर निगम की सीएम के टेक्निकल एडवाइजर विशाल सेठ ने पोल खोल दी। टेक्निकल एडवाइजर ने कहा कि आपकी सड़कों में पत्थर कम हैं। उन्होंने कैमरी रोड पर पेटी भरवाई तो वहां पत्थर कम निकला। सात ईंटों के उखाड़ने के बाद केवल एक पेटी रोड़ा भरा गया। जबकि टेक्निकल एडवाइजर ने अधिकारियों की आम लोगों को बेवकूफ बनाने वाली टेक्निक का खुलासा कर दिया।
उन्होंने कहा कि सात ईंटों के नीचे एक पेटी नहीं बल्कि सवा पेटी रोड़ा निकलना चाहिए। एक पेटी दबाने से बनता है। पेटी में भरा जाने वाला रोड़ा बिना कैंप्रेश (दबाया) होता है। उन्होंने अधिकारियों को चैलेंज किया कि अगर कहीं भी जहां आप कहो वहीं चेक कर लेते हैं। मैंने रात को सारी सड़कें देख ली। इस पर अधिकारियों ने कहा कि साहब हमारे सभी सड़कों में इतना ही रोड़ा मिलेगा। इस पर टेक्निकल एडवाइजर ने कहा कि मुझे आगे एक भी कोई ऐसी सड़क नहीं मिलनी चाहिए वरना मैं फिर बख्शूंगा नहीं। आपके खिलाफ सीधा लिख दूंगा।
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निकाली कमियां, बोले-पत्थर पर चिकनी मिट्टी क्यों डाली
टेक्निकल एडवाइजर ने कहा कि पत्थर पर चिकनी मिट्टी क्यों डाली। एस्टीमेट में क्या है। उन्होंने अधिकारियों से सवाल किया कि सैंड की परिभाषा क्या है। कहा बालू ईज नॉट सैंड। उन्होंने टेक्निकल रूप में कई कमियां निकाली और कहा कि इसका एंगल फ्रेम क्या है। इस पर स्क्रीन भी नहीं डाली गई। डब्ल्यूबीएम भी ठीक नहीं। टेक्निकल एडवाइजर ने चिकनी मिट्टी की लेयर डालने को लेकर अधिकारियों को फटकार लगाई। दुकानदारों ने चेकिंग कर रही टीम को खूब खरी खरी सुनाई। उन्होंने कहा कि ये क्या चेक कर रहो हो साहब आपके पीछे की सड़क चेक करो। एक से डेढ़ साल पहले बनी थी और हालात देख लो सारी टूट गई। इसके बाद विशाल सेठ ने उस सड़क को भी देखा।
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ज्वाइनिंग से पहले सीसी की सड़क को ठीक करवाने की कार्रवाई करे
कैमरी रोड की सड़क को लेकर आम लोगों के सवाल उठाने पर टेक्निकल एडवाइजर ने सेक्टर 15 मोड़ पर बीएंडआर की सीसी की सड़क देखी। उन्होंने कहा कि 20 साल चलने वाली सड़क डेढ़ साल में ही कैसे टूट गई। बीएंडआर के एक्सईएन कौन है। फोन पर जब उनकी बात करवाई गई तो कहा कि यहां से रिलीव और आगे ज्वाइंनिंग होने से पहले मुझे इस सड़क की पूरी डिटेल चाहिए और सड़क तोड़कर बनानी है या इसे कैसे ठीक करवाना है या फिर रिकवरी करनी है ये क्लीयर लिखकर ट्रांसफर वाली जगह जाओगे। ये सभी जानकारी मेरी मेल पर पहुंच जानी चाहिए। अगर रिकवरी करनी है तो ये सड़क आप लोग गावड़िया ठेकेदार की बता रहें हैं उनके काम कई जगह चल रहे हैं रिकवरी डाल दो।
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टेक्निकल एडवाइजर ने कहा होना चाहिए 1.9 क्यूबिक मीटर रोडा
विशाल सेठ ने पहले ही मोबाइल पर कैलकुलेट कर लिया। उन्होंने इंटरलोकिंग टाइलों की बाइंडिंग के काम से 7 ईंटें निकलवाई। सात ईंटें निकलाने के बाद एक पेटी यानी एक फुट पत्थर निकला। उन्होंने अधिकारियों से पहले पूछा कि ये पत्थर पूरा है। निगम अधिकारी बोले बिल्कुल ठीक है सर। उन्होंने पेटी उठवाकर समतल जगह पर रखवा ली और कहा कि देख लो भाई कहीं मिट्टी में कोई और पत्थर छिपा हो तो निकाल लो फिर मुझे मत कहना। कोई अधिकारी कुछ नहीं बोला। उन्होंने कहा कि ये पत्थर कम है। एक नहीं सवा फुट पत्थर होना चाहिए।
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वर्जन
कई जगह कमियां मिली है। हुडा की कम्युनिटी सेंटर की बिल्डिंग में भी कुछ कमियां थी। बीएंडआर की रोड में भी कमियां थी। तुलना करें तो बीएंडआर का काम निगम व हुडा से अच्छा है। पहला मौका है हिदायत दी है जल्द दोबारा आऊंगा फिर बचने का कोई मौका नहीं मिलेगा।
- विशाल सेठ, टेक्निकल एडवाइजर टू सीएम।
शहर की सड़कों पर निगम डाल रहा कम रोड़ा, जांच में खुली पोल
52 से 54 तथा 56 से 60 पेज एक सेकेंड लीड
- सीएम के टेक्निकल एडवाइजर विशाल सेठ ने जांच की सड़कों की
- बोले मेरे को दोबारा एक भी जगह ऐसी मिल गई तो मैं आपके खिलाफ लिखूंगा